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ये मोदी लहर है : बधाई हो मोदी जी

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भारत में अभी सम्पन्न हुए लोकसभा के चुनाव के नतीजे आ चुके हैं जिसमें अभी तक मोदी मैजिक बरकरार है अर्थात भारतीय जनता पार्टी की विजय हुई है। चुनाव नतीजों के आने के बाद सभी तमाम अटकलों पर विराम लग गया है जिसमें कहा जा रहा था कि महागठबंधन मोदी के रास्ते में कुछ रुकावटें पैदा करेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । इस बार बीजेपी पिछले लोकसभा  चुनाव से ज्यादा सीटें निकालने में सफल हुई है। 542  सीटों में से 344+ (कांग्रेस-87, अन्य-107 अनुमानित) सीटें निकालना अद्भुत है। कुछ राज्य तो ऐसे हैं जहां बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया है अर्थात सारी की सारी सीटें जीत ली हैं।  इस बार जहां एक तरफ प्रियंका गांधी को उतारकर कांग्रेस अपना पक्ष मजबूत कर रही थी यह जानते हुए जनता उसके वंशवाद खुश नहीं है तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में हुए सपा बसपा गठबंधन में ऐसा लोग सोच रहे थे कि दलित वोट  बसपा की तरफ जाएगा और मुस्लिम व ज्यादातर पिछडे वर्ग का वोट सपा को जाएगा और सपा और बसपा में उसी हिसाब से सीटों का बँटवारा हुआ था लेकिन मोदी का मैजिक ऐसा चला कि दलितों और मुस्लिम वोटों में जबरदस्त सें...

लोकसभा चुनाव 2019: कौन बनेगा विजेता

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  लोकसभा चुनाव 2019 का माहौल गरम है।जब भी बाहर जाओ चौराहों पर , चाय की दुकानों पर बस एक ही चर्चा चल रही है.. लोकसभा चुनाव 2019। हर इंसान अपनी अपनी पार्टी की उपलब्धियों को गिनाता नजर आता है और दूसरी विपक्षी पार्टियों की आलोचना करता है। इन चर्चाओं को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि इस चुनाव में किसी एक पार्टी का दबदबा है। किसी भी पार्टी का इस बार बहुमत से सरकार बना पाना थोडा सा मुश्किल लग रहा है। हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी कुछ हद तक मजबूत नजर आती है लेकिन दूसरी पार्टियों के द्वारा जो महागठबंधन का दांव खेला गया है उससे भाजपा को बहुत बडा नुकसान होने की सम्भावना लग रही है। आइए जानते हैं कि इस बार चुनाव में विभिन्न पार्टियों की यथास्थिति क्या है... सबसे पहले बात करते हैं सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी की। भाजपा फिलहाल अन्य पार्टियों से थोडी सी मजबूत नजर आ रही है जिसकी वजह है नरेंद्र मोदी और उनके द्वारा लिए गए कुछ कडे और सराहनीय फैसले जैसे नोटबन्दी,सर्जिकल स्ट्राइक, पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ के गए राजनीति और कूटनीतिक प्रयास, ग्रामीण स्तर पर जारी की गई कु...

भाजपा की हार, विपक्षियों की नइया पार

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हाल ही में हुए चुनावों में जिस तरह भाजपा को हार का सामना करना पडा है उससे साफ तौर पर कहा जा सकता है कि अब जनता की नजरों में भाजपा की छवि धूमिल हो रही है। भले ही सोशल मीडिया पर भाज...

लो ! हनुमानजी भी दलित निकले

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कितना अजीब लगता है जब इंसान अपने फायदे के लिए हर हद पार कर जाता है। आजकल भारतीय राजनीति में भी यही हो रहा है। एक के बाद एक ऐसे बयान आ रहे हैं जिन्हें सुनकर ही हँसी आ जाती है। अभी ...

भाजपा तलवार , कमजोर होती धार

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एक सत्य बात है कि अगर किसी का उत्थान हुआ है तो उसका पतन निश्चित है और जिसका पतन हुआ है एक न एक दिन उसका उत्थान होना भी तय है। यह बात राजनीति में भी अक्सर लागू होती है।पिछले लगभग 45 से 48  सालों से भारत में कांग्रेस एक मुख्य शासक के रूप में जानी जाती थी । यह जनता का कांग्रेस में विश्वास की वजह से था या जनता के पास कांग्रेस के अलावा कोई अन्य बेहतर विकल्प न होने की वजह से था ,वो अलग बात है  लेकिन पिछले कुछ सालों से भारतीय राजनीति में भाजपा ने जिस तरह अपनी पैठ बनाई वह काबिले तारीफ है। हम इस बात पर बहस नहीं करना चाहते कि यह सब कैसे हुआ पर इतना अवश्य है कि देश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी में अपना विश्वास जताया है और सत्ता पर बैठाया है।  एक और सत्य बात यह है कि बुलंदियों पर  एक बार पहुँचना तो आसान होता है पर उस बुलन्दी पर टिके रहना या लोगों की आशाओं पर टिके रहना कतई आसान नहीं है। ठीक यही हुआ है कांग्रेस के साथ , शुरू से जनता ने उसे सर आँखों पर बैठाकर रखा पर समय के साथ लोगों की सोच ,आशाएं और मानसिकता बदलती रहती है और इन पर हमेशा खरा उतरना मुमकिन नहीं होता है। देश की ...

तूतीकोरिन में हिंसा भडकी: स्टरलाइट प्रोटेस्ट

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तमिलनाडु के तूतीकोरिन में हालात  बिगडते ही जा रहे हैं। लगभग तीन महीने से शान्तिपूर्ण तरीके से स्टरलाइट कापर प्लांट का विरोध कर रहे लोगों का सब्र अचानक मंगलवार को टूट गया और वे हिंसक हो गए ,तोडफोड करने लगे और बसों को आग लगा दी। विकराल रूप से भडकी हुई इस भीड को पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल करके रोकने का प्रयास किया मगर वे असफल रहे और अन्त में फायरिंग करनी पडी जिसकी वजह से लगभग 11 लोगों की मौत हो गई और 30 से भी अधिक प्रदर्शनकारी घायल हो गए। हालांकि इसके बाद माहौल कुछ शान्त जरूर हुआ मगर लोगों में तनाव की स्थिति बनी हुई थी और आज यानी बुधवार को एक बार फिर हिंसा भडक गई जिसमें एक की मौत और तीन लोग घायल हो गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि इस प्लांट से जो प्रदूषण फैल रहा है उसकी वजह से वहां के स्थानीय लोगों को तरह तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धित बीमारियां जैसे सांस फूलना, मितली आना या उल्टी होना बढती ही जा रही हैं इसलिए इस प्लांट का बन्द होना जरूरी है। क्या है स्टरलाइट इण्डस्ट्री ? दरअसल दुनिया की बडी बडी खनन कम्पनियों में से एक भारतीय कम्पनी है जिसका नाम है "वेदांता" , और इस...

UPTET 2011 : अभ्यर्थियों का शोषण

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UPTET 2011 भर्ती का जब से विज्ञापन निकाला गया तभी से इस भर्ती को अवरोधित करने के लिए एक के बाद एक विवादों ने जन्म लिया । इस भर्ती का विज्ञापन निकले आज लगभग सात साल हो चुके हैं लेकिन अभ...

राम मंदिर या बाबरी मस्जिद

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आए दिनों सोशल  मीडिया पर मैसेज आता रहता है कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए या फिर बाबरी मस्जिद ? जाहिर सी बात है कि इस सवाल के जवाब में एक मुस्लिम धर्म को मानने वाला बाबरी मस्जिद का पक्ष लेगा और हिन्दू धर्म को मानने वाला राम मंदिर का। इस सवाल के जवाब में अपनी व्यक्तिगत राय  देना अच्छी बात है लेकिन जब हम इस एक सवाल के लिए लोगों को आपस में लडते झगडते देखते हैं ,गाली गलौज करते देखते हैं तो बडा दुख होता है। हमारे पास जब इस तरह का मैसेज बार बार आता है तो कभी कभी सोचते हैं कि देश में लोगों को आपस लडाने के लिए या शान्ति भंग करने के लिए ऐसे ऐसे मुद्दे उपलब्ध हैं तो देश को हानि पहुँचाने के लिए किसी आतंकवादी की जरूरत ही नहीं है। हम समझते हैं कि अयोध्या में राम मन्दिर बनेगा या बाबरी मस्जिद , इस मुद्दे से आम आदमी को कोई फायदा नहीं होने वाला । हाँ , राजनीतिक दल वोट बटोरने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल बखूबी करना जानते हैं।ऐसा नहीं है कि सरकार या नेताओं के पास अयोध्या मामले का हल नहीं है,बस वे इस मसले को हल होने ही नहीं देना चाहते  क्योंकि  अगर  अयोध्या का मसला सुलझ गया त...

हार की जिम्मेदार खुद भाजपा सरकार

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www.rajdwriter.com 15 march 2018, गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर भाजपा की  हार  पर चौराहों और चाय की दुकानों पर चर्चा शुरू हो गई है।कुछ लोग कह रहे हैं कि भाजपा की हार सपा और बसपा के आपसी गठबंधन और उनकी जाती...

सारे दलित एक हों

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  इलाहाबाद में हुई दलित छात्र की नृशंस हत्या और हत्या के बाद पुलिस प्रशासन की आनाकानी यह साबित करती है कि यूपी ही नहीं पूरे देश में कहीं भी दलित और पिछडे लोग सुरक्षित नहीं है...

राम मंदिर विवाद

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अगर कोई राजनीतिक विवाद हो या आर्थिक घोटाले की बात होती है तो हर कोई बढ चढ के बोलता है और अपनी बेबाक राय देता है कि यह होना चाहिए या वह नही होना चाहिए मगर  जब कभी भी धार्मिक आस्था की बात आती है तो बडे बडों की बोलती बन्द हो जाती है या यूँ कहिए कि हर कोई बोलने से बचता है  और अगर किसी ने हिम्मत करके कुछ कह भी दिया तो उसे लेने के देने पड जाते हैं। धर्म पर बोलने के लिए कोई इंसान या संस्था भगवान या अल्लाह से नही बल्कि उनके समर्थकों से डरते हैं। यही हुआ सुप्रीम कोर्ट में भी जब राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विध्वंश मामले में सुनवाई होनी थी लेकिन कोर्ट ने साफ साफ कह दिया कि यह धार्मिक आस्था का विषय है इसलिए कोई भी फैसला लेना आसान काम नही है क्योंकि  अगर कोई फैसला किसी के पक्ष में सुनाया जाता है तो यह दूसरे पक्ष की आस्था और विश्वास पर प्रहार होगा इसलिए बेहतर यही होगा कि दोनों पक्ष आपस में मिलकर बीच का कोई रास्ता निकालें।चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि अगर दोनों पक्षों में मध्यस्थता की भूमिका भी निभाने की जरूरत पडी तो वह तैयार हैं या किसी अन्य न्यायाधीश को इसके लिए नियुक्त किया जा सकता ...

यूपी में योगी

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उत्तर प्रदेश  में इस समय बदलाव पर बदलाव हो रहा है।जिस तरह विधानसभा चुनाव का परिणाम आने पर यूपी भगवामय और मोदीमय हुआ था उसी तरह 18 मार्च 2017 की शाम को जब विधायक दल की बैठक हुई तो यूपी योगीमय हो गया। जी हाँ योगी आदित्यनाथ जी को उत्तर प्रदेश में विधायक दल ने अपना नेता चुना है अर्थात् मुख्यमंत्री पद के लिए चुना है। योगी आदित्यनाथ जी का मुख्यमंत्री बनना लगभग पहले से तय था क्योंकि ज्यादातर यूपीवासी यही चाहते भी थे। हालाँकि केशव प्रसाद मौर्य और एक दो और सीनियर नेताओं पर सम्भावना जताई जा रही थी मगर इन नेताओं पर सर्वसम्मति नही बन सकी। उत्तर प्रदेश में नई सरकार और नया मुख्यमंत्री बनने से जनता में नई उम्मीदें जगी हैं मगर अब तक यूपी में पिछली सरकारों ने बहुत अच्छा कार्य नही किया है इसलिए भाजपा और योगी आदित्यनाथ जी को जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निम्नलिखित पाँच बडी चुनौतियों का सामना करना पडेगा। 【1 】बिगडी कानून व्यवस्था: हर कोई जानता है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों से कानून व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है और आम जनता का कानून और पुलिस प्रशासन पर से विश्वास ...