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कोरोना के कारण मानसिक दबाव बढने मत दो

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भारत सहित पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझ रही है। जो संक्रमित हैं वो तो हैं ही साथ ही साथ जो व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ हैं वे भी एक मानसिक दबाव झेल रहे हैं। जैसे ही कहीं सुनाई देता है फला जगह पर एक कोरोना पोजिटिव व्यक्ति मिला है अचानक धडकने बढ जाती हैं कि हाय अब क्या होगा यह वायरस तो थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक अजीब सा डर मन में घर कर गया है कि कहीं यह वायरस हमारे मोहल्ले गाँव या घर तक न आ जाए। कुल मिलाकर कहा जाए तो लोग कोरोना के भय में मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। इसके बाद जो तरह तरह की गलत अफवाहें फैल रही हैं उससे मन और भी बेचैन हो उठता है। थोडी सी भी सामान्य खाँसी या जुखाम बुखार हो गया तो बस फिक्र सताने लगी कि कहीं ये वो तो नहीं.. ऐसे में क्या किया जाए जाए कि लोग इस तरह के मानसिक  दबाव से बाहर आ सकें । इसके लिए हम आपको कुछ बातें बता रहे हैं जिनको अमल में लाकर आप अपने आपको मानसिक रूप से दृढ़ रख सकेंगे- 👍 सबसे पहले तो यदि आपके मन में किसी तरह की नकारात्मक सोच ने घर बना रखा है तो सकारात्मक में बदलिए। जैसे कि कुछ लोग बोलते हैं कि कोरोना जिसको हुआ उसकी म...

आओ दिए जलाएं

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आपको याद तो है न आज 5 अप्रैल है और आज रात 9 बजे लगातार 9 मिनट तक आपको दीपक जलाकर रखना है। दीपक किसी भी तरह का हो सकता है तेल का ,मोमबत्ती का ,टार्च या मोबाइल फ्लैश का। टार्च मा मोबाइल फ्लैश का आप्शन इसलिए है क्योंकि बहुत लोगों के पास मोमबत्ती आदि नहीं होगी तो बाजार में भीड लगाने नहीं जाना है बस मोबाइल या टार्च जलाकर देश की इस एकजुटता में शामिल हो जाना है बस। बहुत लोगों का सवाल है कि इससे आखिर होगा क्या ? वैसे साधारण तौर पर तो इससे फायदे बहुत हैं लेकिन कोरोना में इसका फायदा क्या होगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा। पहला फायदा यह है कि मोमबत्ती का मोम और तेल वाले दिए का तेल जब जलता है तो वातावरण में एक शुद्धता का अनुभव होता है और छोटे मोटे कई जीवाणु इस शुद्धता की वजह से स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं या फिर कमजोर हो जाते हैं । ये तो था वैज्ञानिक कारण अब बात करते हैं सामाजिक कारण की। हमारे प्रधानमंत्री जी ने एक साथ दिए जलाने को इसलिए भी कहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लाकडाउन की वजह से लोग घरों से बाहर नहीं जा पा रहे हैं जिससे उनमें चिडचिडापन , प्रशासन के प्रति रोष और आपसी बिखराव सा मह...

घर पर रहिए: स्वस्थ रहिए

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पूरी दुनिया इस समय कोरोना के काल से ग्रसित है। हर एक देश इसके इलाज की खोज के लिए प्रयासरत है लेकिन कोई सफलता फिलहाल तो दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सिर्फ एक ही विकल्प बचता है दुनिया भर के सामने कि जब तक इसका इलाज नहीं मिल जाता , बचाव किया जाए और उसके लिए कई देशों ने लाकडाउन का सहारा लिया है जिससे लोग आपस में एक दूसरे से थोडी दूरी बनाए रखें और इस वायरस को फैलने का कम से कम मौका मिले। हमारे भारत में भी इस समय 14 अप्रैल 2020 तक लाकडाउन है। हाँ इससे लोगों को थोडी सी परेशानियों का सामना जरूर करना पड रहा है लेकिन एक बेहतर भविष्य के लिए इतनी परेशानी उठाने में किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।  लाकडाउन के समय सब कुछ भारत में ठीक ठाक चल ही रहा था और वायरस की रफ्तार भी कम हो रही थी लेकिन तभी 27-30 मार्च के बीच जो पलायन की प्रक्रिया शुरू हुई , और लोग बसें ट्रेनों के बन्द होने के कारण पैदल ही रोड पर निकल गए और बेवजह भीड बनाई , इस सारी प्रक्रिया में वायरस को एक बार फिर पनपने और अपनी रफ्तार बढाने का मौका मिला है। जिस तरह से लोग एक साथ गाँव की तरफ भागे वास्तव में इस घटना ने सरकार...

आ अब लौट चलें

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कोरोना वायरस ने सारी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। जहाँ एक तरफ एक महामारी के रूप में यह मानव जाति पर संकट बनकर छाया हुआ है वहीं यह पूरी दुनिया को दशकों पीछे भी ढकेल रहा है। हम भारत की बात करते हैं। भारत दुनिया की सबसे बडी जनसंख्या वाला दूसरा देश है तो जाहिर है यहां पर यदि आपसी सम्पर्क से फैलने वाली बीमारी आती है तो कुछ ज्यादा ही तबाही मचाती है। जब इस तरह की बीमारी का कोई कारगर इलाज उपलब्ध नहीं होता है तो इस तबाही को रोकने का सिर्फ एक ही तरीका बनता है वह है लाकडाउन या लोगों को घर में रहने के लिए मजबूर करना ताकि ये एक दूसरे के सम्पर्क में कम से कम आ सकें।  परन्तु इस तरह के लाकडाउन करने से पहले यदि प्लानिंग न की जाए तो इसके बहुत साइड इफेक्ट्स भी सामने आते हैं जैसा कि इस समय भारत में हो रहा है।  भारत एक ऐसा देश है जहां पर कुछ राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश के ज्यादातर लोग रोजगार के सिलसिले में महानगरों दिल्ली, मुम्बई, सूरत आदि में रहते हैं। ये वो लोग हैं जो मेहनत ज्यादा करते हैं लेकिन सैलरी कम पाते हैं। विभिन्न उद्योगों या फैक्ट्रियों में का...

कोरोना :सतर्कता ही बचाव है

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कोरोना वायरस दुनिया भर के लिए चिन्ता का विषय बन चुका है। अभी तक इसका कोई कारगर इलाज, दवा या टीका उपलब्ध नहीं हो सका है। दिनों दिन यह संक्रमण लोगो में बढता ही जा रहा है जिससे लोगों में खलबली सी मची हुई है । इसके इलाज के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग और खोज जारी है लेकिन अभी तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी है। ऐसे में लोगों के पास एक ही रास्ता है कि वो साफ सफाई रखें, संक्रमित लोगों से दूर रहकर  अपना बचाव स्वयं करें।  लक्षण : तेज बुखार के साथ खाँसी और साँस लेने में तकलीफ, घबराहट ,चक्कर आना । क्या सतर्कता बरतें ? सबसे पहले तो आप इस वायरस के बारे में सही जानकारी प्राप्त करें और किसी तरह की अफवाह के चक्कर में न आए जो आपमें फालतू की घबराहट पैदा करे । आइए इस वायरस के बारे में आपको कुछ जानकारी देते हैं - ☺️ यह एक लाइलाज संक्रमण है जिसका अभी तक कोई कारगर इलाज उपलब्ध नहीं है ।  ☺️ याद रखिए अभी तक भारत में यह संक्रमण अपने आप नहीं होता बल्कि तब होता है जब आप किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आते हैं। ☺️ आप साफ सफाई पर विशेष ध्यान देकर, संक्रमित व्यक्ति से दूर रह...