शान-ए-हिन्दुस्तान
ये पाकिस्तान जब भारत की जानिब देखता होगा क्यों शोले को लगाया हाथ बस ये सोचता होगा कभी सीमा उल्लंघन तो कभी घुसपैठ कर करके मुकरता जाता है जो हर इक दफा वादे नया करके वो भारत को हराने का हुनर ही खोजता होगा ये पाकिस्तान जब भारत की जानिब देखता होगा कभी अंधियारी रातों में कभी दिन के उजालों में जो उसने एक मारा दस को मारा भारत वालों ने खीझकर अपना चेहरा अपने हाथों नोचता होगा ये पाकिस्तान जब भारत की जानिब देखता होगा अकेला पड चुका दुनिया में पाकिस्तान बेचारा कहीं हो जाए ना फिर सर्जिकल स्ट्राइक दोबारा वो दरवाजा भी अब डर के ही अक्सर खोलता होगा ये पाकिस्तान जब भारत की जानिब देखता होगा हमेशा मुँह की खाता है फिर भी ये मुँह उठाता है दे के आतंक दुनिया को नेक खुद को बताता है ये नक्शे में जमाने के कहीं होगा कि ना होगा हमें लगता है अब तो जंग में ही फैसला होगा ये पाकिस्तान जब भारत की जानिब देखता होगा क्यों शोले को लगाया हाथ बस ये सोचता होगा ■यह कविता यूट्यूब पर देखें■