शहीदों की शहादत याद रहे
आज शहीदों की लाशों को देखकर आँखों में आँसू उतर आए हैं । ऐसा लग रहा है मेरे खाली दिल में किसी ने अचानक दुख ही दुख भर दिया है। कुछ लिखना चाहता हूँ पर हाथ की अगुलियों लिखने को तैयार नहीं।मन में इतना गुस्सा है कि सोचता हूँ आतंकवाद का संचालन करने वाले हर देश में शोलों की बरसात करके सब खतम दूँ। मुझे लगता है कि यह सिर्फ मेरी ही सोच नहीं बल्कि इस समय हर हिन्दुस्तानी नौजवान के मन में इसी तरह गुस्से का गुबार भरा होगा। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में कहने को 42 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए हैं लेकिन इस घटना ने हम सारे हिन्दुस्तानियों की जान निकाल ली है।हर कोई बदहवास कहता फिर रहा है कि ...अचानक यह क्या हो गया ? जब आमने सामने की जंग होती है और हमारे जवान मरते हैं तो हमें फक्र होता है कि हमारे इतने जवान शहीद हुए लेकिन जब कोई पीछे से छुपकर वार करता है और बेवजह हमारे जवानों की जान लेता है तो यह हमारे सब्र का इम्तिहान है।शायद इन आतंकियों का समर्थन करने वाले लोगों को एहसास नहीं है कि विश्व शान्ति का समर्थन करने वाले भारत के सब्र का बाँध जब टूटेगा तो इतनी सर्जिकल स्ट्राइक...