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सुना है तेरी आंखों में

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सुना है तेरी आँखों में बसते हैं समन्दर डूब गया वो जिस जिस ने देखा इनके अन्दर सर से लेकर पांव तलक सुन्दर ही सुन्दर है तेरी हर एक झलक लगती है जन्नत का मंजर वैसे तो तेरी नजरें मासूम बहुत लगती हैं पर तिरछी होकर देखें तो लगें कोई कातिल खंजर जब से मिला हूं तुझसे तुझको सोच रहा हूँ मेरे दिल पर कर दिया तूने ये कैसा मंतर बहुत गुमां था मुझको  हर इक जीत पे अबतक तुझपे दिल हारा सब जीतने वाला मैं सिकन्दर सुना है तेरी आँखों में बसते हैं समन्दर डूब गया वो जिस जिस ने देखा इनके अन्दर हमको मोहब्बत क्या हो गई: हमको उनसे मोहब्बत क्या हो गयी जैसे कोई बडी कुछ खता हो गयी नाम क्या आया उसका लबों पे मेरे पल में ही सारी दुनिया खफा हो गयी हमने कितना भरोसा किया था मगर बेवफा दुनिया फिर बेवफा हो गयी ऐसा फैला ये गम का शहर पूछो मत प्यार की हर गली लापता हो गयी जब से पहरे लगे हैं मुलाकात पर तनहा थी जिन्दगी बेमज़ा हो गयी हमको उनसे मोहब्बत क्या हो गयी जैसे कोई बडी कुछ खता हो गयी मैं तेरी किस्मत बनूं: मैं तेरी किस्म...

तू जो मिला है

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दिल में बसा लो अपना बना लो इसके शिवा कुछ चाहूँ नही तू जो मिला है दुनिया मिली है रब से अब  कुछ  मांगू नही तेरा मेरा साथ है ऐसा जैसे चन्दा और गगन तू है मेरी सांसें और मैं हूँ तेरे दिल की धडकन तुझसे बिछड कर मेरे सनम अब इक पल भी जी पाऊं नही दिल में बसा लो...... तेरी प्यारी बातें हैं संगीत की मीठी सी सरगम जितना भी सुनता हूँ इनको उतना ही लगता है कम छोड के तेरे इश्क तराने और मैं अब कुछ गाऊं नही दिल में बसा लो.... तोड के दुनिया भर के गुल तेरे कदमों में बिछा दूं मैं जी करता है दुनिया भर की खुशियां तुमपे लुटा दूं मैं तेरे बदले मैं रो लूं पर भूल के तुझको रुलाऊं नही दिल में बसा लो... दिल में बसा लो अपना बना लो इसके शिवा कुछ चाहूँ नही तू जो मिला है दुनिया मिली है रब से मैं कुछ अब मांगू नही   ***** सावन की पहली बारिश में पहली पहली बार हुआ हमको  उनसे इश्क हुआ उनको हमसे प्यार हुआ वो भी भीग रहे थे उधर हम भी भीग रहे थे इधर यूँ तो हम अन्जान थे उनसे फिर भी यूँ टकराई नजर बन्द लबों से धीरे धीरे चुपके से इकरार हुआ हमको उनसे इश्क हुआ ..... ...

नवरात्र : मइया का गुणगान

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प्रथम शैलपुत्री ------------ मंत्र: वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्धकृत शेखराम। वृषारूढा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम।। गीत/भजन ~~~~~~ मुरझाया हुआ जीवन फूलों जैसा खिल जाएगा नवरात्...

ऐ राधा तेरे बिना

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राधा तेरे बिना: नाम अधूरा है मेरा हर काम अधूरा है ऐ राधा तेरे बिन तेरा श्याम अधूरा है तू जो पास नही रहती बेचैन रहता हूँ मत पूछो कि दूरियाँ किस तरह सहता हूँ मान ले मेरी बातें रा...

इक पत्थर से प्यार किया है

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दिल देकर हमने दर्द उधार लिया है खुदा समझकर इक पत्थर से प्यार किया है जिसकी खातिर हमने गँवा दी नीदें अपनी रातों की वो हरजाई कीमत क्या समझे मेरे जजबातों की उसने तो हरदम गैरों पे ही ऐतबार किया है वो तो अपनी दुनिया में ही मस्त है खुश है अपनो में उसको क्या दिलचस्पी होगी मेरे अधूरे सपनों में उसने मेरे दिल से बस धोखा हर बार किया है दिल की दरारें वो सिलने ना आएगा पता है हमको वो मिलने ना आएगा फिर भी दिल ने उसका इन्तजार किया है दिल देकर हमनें दर्द उधार लिया है खुदा समझकर इक पत्थर से प्यार किया है ### तेरी मोहब्बत मेरा वहम है, सच तो ये है तू बेरहम है मेरा ये दर्द और मेरा ये आँसू  ऐ बेवफा सब तेरा करम है तेरी अदायेँ हैँ एक धोखा  काश मैँ तेरा दिवाना न होता न होती नीँदेँ हराम मेरी  न तेरी याद मेँ  दिल ही रोता तेरे तसव्वुर मेँ रो रहा हूँ मैँ तनहा और तनहा हो रहा हूँ तेरी अदावत के आँसुओँ से मैँ अपनी पलकेँ भिगो रहा हूँ  ******* तेरे झूठे वादों मेँ तेरी बेवफाई झलकती है तेरे बेशरम इरादों से तेरी बेहयाई टपकती है तू समझती कि तू सबसे हसीँ है  तुझमे सब है बस वफा ...

मेरे बेकाबू जजबात

वैसे तो शराब पीकर भी मैं मदहोश नहीं रहता पर तुझे देखने के बाद मुझे होश नहीं रहता                          ***** ​इक आरजू है दिल मेँ बरसों से  कि तेरी जुल्फ को ओढूँ और रात हो जाये  इक जुस्तजू है दिल मेँ बरसों से  तेरा आँचल उडा दूँ और बरसात हो जाये  ये दीवानगी नहीँ मेरा इश्क है  कि तुझको छू लूँ और मन गुलाब हो जाये  ये गुजारिश नही मेरी ख्वाहिश है  कि तेरी नजर उठे और पानी शराब हो जाये ** तेरा चेहरा है या आफत है  तेरी अँगडाई, अँगडाई नहीँ कयामत है  तुझे हँसी आती है मेरी  दीवानगी पे किसी दिन मर मिटोगे तुम मेरी आशिकी पे  तु दूर रहती है तो जान जाने लगती है  मेरी तनहाई मुझपे मुस्कुराने लगती है  तेरी पायल तेरी चूडी तेरी बिन्दिया की चमक  मुझे सताती है दिन रात अब तू ही बता काबू मेँ करुँ  कैसे  ' बेकाबू जजबात, । ### कितना अच्छा कितना प्यारा आज सारा आलम है खुशियाँ भी हैं थोडी थोडी थोडा ...

राज़-ए-उल्फत

आँखों ही आँखों मे इक अफसाना बना देती है वो दीवानी हँसती है औऱ दीवाना बना देती है औरों को जरूरत होगी मयखाने मे जाके पीने की मेरे लिए वो आँखों से पैमाना बना देती है हर कोई खिंचा जाता है उसके जलवे ही कुछ ऐसे हैं वो शमा सी जलती है सबको परवाना बना देती है मैं समझ नहीं पाता हूँ कैसे हक मैं उसपे जताऊँ कभी अपना कहती है तो कभी बेगाना बना देती है आँखों ही आँखों मे इक अफसाना बना देती है वो दीवानी हँसती है औऱ दीवाना बना देती है **************************************** ये दिल हमारा जिसपे फिदा है वो इस जमाने में सबसे जुदा है बच न सका कोई दिल उससे ऐसी दिल को चुराने की उसमें अदा है अन्दाज भी है बहुत सीधा सादा निभाना भी आता है हर एक वादा दिल चीरते हैं अगर आँखों से तो नाजुक हैं वो फूलों से भी ज्यादा आँखों से नीदें चुराते हैं अक्सर सपनों में आकर सताते हैं अक्सर जब भी करें बात हम उनसे जालिम हँस के गिराते हैं बिजली सी दिल पर कैसे रहें हम बिना बात उनसे जाहिर करें कैसे जजबात उनसे करते बयाँ दिल की हर एक हसरत होती अगर इक मुलाकात उनसे कोई गज़ल है या कोई कहानी कोई अप्सरा है या परियों की रानी दिल करता है ...