ऐ राधा तेरे बिना

राधा तेरे बिना:
नाम अधूरा है मेरा हर काम अधूरा है
ऐ राधा तेरे बिन तेरा श्याम अधूरा है

तू जो पास नही रहती बेचैन रहता हूँ
मत पूछो कि दूरियाँ किस तरह सहता हूँ
मान ले मेरी बातें राधा मैं सच कहता हूँ
तेरे बिन वृन्दावन का धाम अधूरा है
ऐ राधा तेरे बिन तेरा श्याम अधूरा है

जैसे हवाएं बिन खुशबू के तनहा बहती हैं
रातें जुदाई चाँद से हर इक लमहा सहती हैं
जैसे बहारें फूलों के बिन तनहा रहती हैं
जैसे सीता बिन नाम श्रीराम अधूरा है
ऐ राधा तेरे बिन तेरा श्याम अधूरा है

देखो इन दुनिया वालों से तुम न घबराना
दूर से सूरत दिखा के अब तो छोडो तरसाना
आज शाम को यमुना तट पर मिलने आ जाना
मत करना बहाने कि काम अधूरा है
ऐ राधा तेरे बिन तेरा श्याम अधूरा है
नाम अधूरा है मेरा हर काम अधूरा है
ऐ राधा तेरे बिन तेरा श्याम अधूरा है।

राधिका गोरी से:

आज हम चोरी से, राधिका गोरी से
मिल कर ही आएंगे
दरारें जो भी हैं, हमारे दिल में सब
सिल कर ही आएंगे
बिना राधा किशन की जिन्दगी कितनी अधूरी है
बताएंगे वो जीने के लिए कितनी जरूरी है
करें इनकार भले, मगर हम नाम उनके
दिल कर ही आएंगे
हम मिल कर ही आएंगे
ना पूरा हूँ मैं उनके बिन ना पूरा नाम है मेरा
वो मंजिल है मेरी पाना उन्हें ही काम है मेरा
राह में कांटों से,भले ही मेरे कदम
छिल कर ही आएंगे
हम मिलकर ही आएंगे
आज पहनाएंगे पायल प्यार से उनके पैरों में
भले ही रूठे हैं और गिन रहे हैं हमको गैरों में
आँखों के सपनों में, उन्हें हम अपनों में
शामिल कर ही आएंगे
हम मिलकर ही आएंगे
आज हम चोरी से ,राधिका गोरी से
मिल कर ही आएंगे
दरारें जो भी हैं ,हमारे दिल में सब
सिल कर ही आएंगे
हम मिल कर ही आएंगे।

शरारत:

चाहे चूडी टूट जाए
या सहेली रूठ जाए
आज तेरी कलाई न छ़ोडूंगा
प्रीत तुझसे ही राधा मैं जोडूंगा

देख कुछ भी न कहना बलदाऊ भइया से
भूल कर भी कभी अब यशोदा मइया से
गर शिकायत तूने के
या शरारत तूने की
रोज गगरी तेरी मैं ये फोडूंगा
प्रीत तुझसे ही राधा मैं जोडूंगा

रोज यमुना के तट पर सुबह हो या शाम
मेरी मुरली पुकारे है बस राधा नाम
मुझे  बोल माखनचोर
चाहे बोल कुछ और
तोसे नाता कभी भी न तोडूंगा
प्रीत तुझसे ही राधा मैं जोडूंगा

चाहे चूडी टूट जाए
या सहेली रूठ जाए
आज तेरी कलाई न छ़ोडूंगा
प्रीत तुझसे ही राधा मैं जोडूंगा।

ओ राधा तेरे चेहरे से:

ओ राधा तेरे चेहरे से मेरी नजरें नही हटती
कैसे बजाऊं तेरे बिन अब मुरली नही बजती

क्या गजब प्रीत की है ये डोर
बस खिंचा जाता हूँ तेरी ओर
मैं कितनी करूँ कोशिश ये डोरी नही कटती
कैसे बजाऊं तेरे बिन अब मुरली बजती नही

तेरे कजरारे कजरारे  नैन
ले गये मेरी आंखों का चैन
कितना बहकाऊं खुद को मैं बेचैनी नही घटती 
कैसे बजाऊं तेरे बिन अब मुरली नही बजती

दूर होकर कहो रात दिन
कैसे रहती हो कान्हा के बिन
क्या बिरह की अग्नि तेरे हृदय में नही लगती

ओ राधा तेरे चेहरे से मेरी नजरें नही हटती
कैसे बजाऊं तेरे बिन अब मुरली नही बजती

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