किसानों का दर्द कौन समझेगा
उत्तर प्रदेश में किसानों की हालत तो हमेशा खराब ही रहती है। पहले तो ऊँची लागत लगा कर किसी तरह खेतों में जुताई बुवाई की जाती है और जब खेतों में फसलें तैयार होने लगती हैं तो आवारा पशुओं का आक्रमण किसानों की सारी मेहनत और लागत पर पानी फेर देता है। एक एक साथ 20-20 आवारा पशु जिस खेत में पडते हैं उस खेत की सारी फसलें चौपट। किसान की सारी किसानी धरी की धरी रह जाती है। यदि दिन में किसान किसी तरह अपने खेतों की रखवाली कर भी लेता है तो रात में ये पशु खेती का सत्यानाश करने पहुंच जाते हैं और सुबह होने पर किसान के पास सिर्फ माथा पीटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। कुछ किसान तार और बाँस लगाकर अपने खेतों को सुरक्षित रखने का प्रयास तो करते हैं लेकिन पशुओं की संख्या इतनी अधिक होती है कि किसी तरह की रोकथाम उन्हें खेत में प्रवेश करने से रोक नहीं पाती। अब यह भी तो मुमकिन नहीं है कि किसान अपने सारे खेतों में रोक लगा सके ताकि आवारा पशुओं से इनके खेतों की सुरक्षा हो सके। प्रदेश सरकार ने वादे तो कर लिए कि आवारा पशुओं के लिए पशुशाला का निर्माण किया जाएगा लेकिन इस पर कुछ खास अमल नहीं हो सका है। खेतों ...