बडों को सम्मान दीजिए
इंसान की जिन्दगी में हर रिश्ते की अलग अलग एहमियत होती है। जितने तरह के रिश्ते होते उतने ही रंगों में इंसान को ढलना होता है। जो इंसान इन विभिन्न तरह के रिश्तों के अनुसार अपने आपको बदलता है या सामंजस्य स्थापित करता है वही इस समाज में सामाजिक और व्यावहारिक समझा जाता है उसी की लोग इज्जत भी करते हैं। कुछ लोग होते हैं जिनका अपनी पत्नी से अच्छा रिश्ता होता है पर भाइयों से या मां बाप से नहीं बनती। कुछ लोगों की भाइयों से बनती है तो उसकी पत्नी उससे खुश नही है। ये भी सही ही है कि एक इंसान से दुनिया का हर इंसान तो खुश नही रह सकता पर हमें दुनिया की फिकर क्यों करनी चाहिए क्योंकि दुनिया तो बहुत बडी है। हम इतनी तो कोशिश कर ही सकते है कि जो हमारे अपने हैं अपने परिवार के सदस्य हैं या जो खास मित्र हैं उन्हें तो नाराज न किया जाए। आप अगर ध्यान दें तो दिन भर में आपकी मुलाकात 30 इसानों से ज्यादा नही होती होगी (वे इंसान जिनके साथ आप बोलते हो या कोई प्रतिक्रिया करते हो) ।एक सामान्य इंसान का दायरा 10 से 30 इंसानों के बीच ही सीमित रहता है । इन 10 से 30 इंसानों के बीच में भी हम सामान्य नही रह पाते बल्क...