बडों को सम्मान दीजिए
इंसान की जिन्दगी में हर रिश्ते की अलग अलग एहमियत होती है। जितने तरह के रिश्ते होते उतने ही रंगों में इंसान को ढलना होता है। जो इंसान इन विभिन्न तरह के रिश्तों के अनुसार अपने आपको बदलता है या सामंजस्य स्थापित करता है वही इस समाज में सामाजिक और व्यावहारिक समझा जाता है उसी की लोग इज्जत भी करते हैं। कुछ लोग होते हैं जिनका अपनी पत्नी से अच्छा रिश्ता होता है पर भाइयों से या मां बाप से नहीं बनती। कुछ लोगों की भाइयों से बनती है तो उसकी पत्नी उससे खुश नही है। ये भी सही ही है कि एक इंसान से दुनिया का हर इंसान तो खुश नही रह सकता पर हमें दुनिया की फिकर क्यों करनी चाहिए क्योंकि दुनिया तो बहुत बडी है। हम इतनी तो कोशिश कर ही सकते है कि जो हमारे अपने हैं अपने परिवार के सदस्य हैं या जो खास मित्र हैं उन्हें तो नाराज न किया जाए। आप अगर ध्यान दें तो दिन भर में आपकी मुलाकात 30 इसानों से ज्यादा नही होती होगी (वे इंसान जिनके साथ आप बोलते हो या कोई प्रतिक्रिया करते हो) ।एक सामान्य इंसान का दायरा 10 से 30 इंसानों के बीच ही सीमित रहता है । इन 10 से 30 इंसानों के बीच में भी हम सामान्य नही रह पाते बल्कि पता नही कितनी बार चिल्लाते हैं गुस्सा करते हैं या नाराज होते हैं।
आजकल के नौजवानों की समस्या होती है कि वे घर के बुजुर्गों से ज्यादा परेशान रहते हैं । इनकी शिकायत होती है कि घर के दादा जी या दादी जी फालतू में बोलते रहते हैं कि ये करो या ये न करो, यहां मत जाओ या वहां मत जाओ और सबसे बडी बात कि वे एक ही बात को कई बार दोहराते हैं । दादा जी और दादी जी की बातों को ज्यादातर लोग यह कहकर हमेशा अनसुना करते कि अरे इनका तो रोज का काम है फालतू की बक बक करना और कभी कभी लोग बुजुर्गों पर चिल्लाते भी हैं। जबकि सच्चाई तो यह है कि बुजुर्गों की बातें हमेशा लाभदायक ही होती हैं क्योंकि उनकी हर बात उनके स्वयं के अनुभव पर आधारित होती है ।
अगर आप बुजुर्गों की बात नही मानते तो न माने लेकिन उन पर चिल्लाना गलत बात है।
अगर कोई बुजुर्ग आप को अपनी कोई राय दे रहा है तो इसका मतलब यह नही है कि वह आप पर अपनी मर्जी थोप रहा है बल्कि इसलिए दे रहा है कि आप उनके अपने हैं उनके अपने बेटे या नाती पोते है और वे नही चाहते कि आप किसी मुसीबत में फंसें या फिर नाकाम हो। हो सकता है कि आप की सोच नई हो और अपने हिसाब से ही काम करना चाहते हों, तो बेशक कीजिए पर कुछ पल के लिए अपने बुजुर्गों की सुन तो लीजिए।
इसी तरह कभी कभी जब मां बाप अपने बच्चों की बीवियों से कुछ कह देते हैं या डाट देते हैं तो बच्चे इस तरह से उन मां बाप से पेश आते है जैसे कि उन्होंनें कोई बहुत बडा अपराध कर दिया हो । वे यह समझने की कोशिश भी नही करते कि मां ने या पिता जी ने क्यों ऐसा किया ? हर कोई जानता है कि एक मां और एक बाप कभी भी अपने बच्चे का बुरा नही चाहेगा लेकिन हम और आप इतनी छोटी सी बात को भी समझ नही पाते और उन पर चिल्लानें लगते हैं। हो सकता है कि कभी कभी मां बाप से भी गलती हो जाए या उन्हें कोई गलतफहमी हो जाए जिसके चलते वे आपको , आपकी बीवी को या आपके बच्चे को डाट दे तो आपका फर्ज बनता है कि आप इस बात को जानबूझ कर इग्नोर करें और मां बाप पर चिल्लाने की जगह उनका सम्मान करें। यकीन मानिए अगर आपने ऐसा किया और अपने मां बाप को समझने की कोशिश की तो यकीनन आपके बच्चे भी आपको भविष्य में समझेंगे क्योंकि बच्चे भी बडों से ही सीखते हैं।
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