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राम मंदिर या बाबरी मस्जिद

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आए दिनों सोशल  मीडिया पर मैसेज आता रहता है कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए या फिर बाबरी मस्जिद ? जाहिर सी बात है कि इस सवाल के जवाब में एक मुस्लिम धर्म को मानने वाला बाबरी मस्जिद का पक्ष लेगा और हिन्दू धर्म को मानने वाला राम मंदिर का। इस सवाल के जवाब में अपनी व्यक्तिगत राय  देना अच्छी बात है लेकिन जब हम इस एक सवाल के लिए लोगों को आपस में लडते झगडते देखते हैं ,गाली गलौज करते देखते हैं तो बडा दुख होता है। हमारे पास जब इस तरह का मैसेज बार बार आता है तो कभी कभी सोचते हैं कि देश में लोगों को आपस लडाने के लिए या शान्ति भंग करने के लिए ऐसे ऐसे मुद्दे उपलब्ध हैं तो देश को हानि पहुँचाने के लिए किसी आतंकवादी की जरूरत ही नहीं है। हम समझते हैं कि अयोध्या में राम मन्दिर बनेगा या बाबरी मस्जिद , इस मुद्दे से आम आदमी को कोई फायदा नहीं होने वाला । हाँ , राजनीतिक दल वोट बटोरने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल बखूबी करना जानते हैं।ऐसा नहीं है कि सरकार या नेताओं के पास अयोध्या मामले का हल नहीं है,बस वे इस मसले को हल होने ही नहीं देना चाहते  क्योंकि  अगर  अयोध्या का मसला सुलझ गया त...

नवरात्र : मइया का गुणगान

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प्रथम शैलपुत्री ------------ मंत्र: वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्धकृत शेखराम। वृषारूढा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम।। गीत/भजन ~~~~~~ मुरझाया हुआ जीवन फूलों जैसा खिल जाएगा नवरात्...

ऐ राधा तेरे बिना

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राधा तेरे बिना: नाम अधूरा है मेरा हर काम अधूरा है ऐ राधा तेरे बिन तेरा श्याम अधूरा है तू जो पास नही रहती बेचैन रहता हूँ मत पूछो कि दूरियाँ किस तरह सहता हूँ मान ले मेरी बातें रा...

राम मंदिर विवाद

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अगर कोई राजनीतिक विवाद हो या आर्थिक घोटाले की बात होती है तो हर कोई बढ चढ के बोलता है और अपनी बेबाक राय देता है कि यह होना चाहिए या वह नही होना चाहिए मगर  जब कभी भी धार्मिक आस्था की बात आती है तो बडे बडों की बोलती बन्द हो जाती है या यूँ कहिए कि हर कोई बोलने से बचता है  और अगर किसी ने हिम्मत करके कुछ कह भी दिया तो उसे लेने के देने पड जाते हैं। धर्म पर बोलने के लिए कोई इंसान या संस्था भगवान या अल्लाह से नही बल्कि उनके समर्थकों से डरते हैं। यही हुआ सुप्रीम कोर्ट में भी जब राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विध्वंश मामले में सुनवाई होनी थी लेकिन कोर्ट ने साफ साफ कह दिया कि यह धार्मिक आस्था का विषय है इसलिए कोई भी फैसला लेना आसान काम नही है क्योंकि  अगर कोई फैसला किसी के पक्ष में सुनाया जाता है तो यह दूसरे पक्ष की आस्था और विश्वास पर प्रहार होगा इसलिए बेहतर यही होगा कि दोनों पक्ष आपस में मिलकर बीच का कोई रास्ता निकालें।चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि अगर दोनों पक्षों में मध्यस्थता की भूमिका भी निभाने की जरूरत पडी तो वह तैयार हैं या किसी अन्य न्यायाधीश को इसके लिए नियुक्त किया जा सकता ...

क्या आप ईश्वर को मानते हैं

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ईश्वर एक ऐसी शक्ति है जिस पर दुनिया के गिने चुने लोगों को छोडकर सब विश्वास करते हैं और जो विश्वास नहीं करते हैं उन्हें नास्तिक कहा जाता है। इससे पहले कि मेरे प्रिय पाठकगण म...