क्या आप ईश्वर को मानते हैं
ईश्वर एक ऐसी शक्ति है जिस पर दुनिया के गिने चुने लोगों को छोडकर सब विश्वास करते हैं और जो विश्वास नहीं करते हैं उन्हें नास्तिक कहा जाता है।
इससे पहले कि मेरे प्रिय पाठकगण मुझसे पूछें मैं उनको बताना चाहूँगा कि मैं नास्तिक नहीं हूँ मैं भी आस्तिक हूँ और मैं भी उस अलौकिक शक्ति में विश्वास करता हूँ जो इस समस्त सँसार का मालिक और संचालक है।
इस पूरे ब्रह्माण्ड मेँ अगर कोई शक्ति है जो सँसार की समस्त अच्छी और बुरी शक्तियों को नियँत्रित कर सकती है तो वो ईश्वर ही है । ये बात अलग है कि हर धर्म मेँ ईश्वर का स्वरुप अलग अलग होता लेकिन सत्य तो ये है कि वो सब एक ही शक्ति पुँज के अलग अलग नाम हैँ ।
भूत प्रेत , दैत्य दानव, मानव और पशु पक्षी सभी की शक्तियाँ ईश्वर के आगे बहुत छोटी हैँ ।
इसलिए किसी भी शक्ति के प्रभाव मेँ आने से पहले इतना अवश्य ध्यान मेँ रखेँ कि ईश्वर सबसे बडी शक्ति है । समस्त शक्तियों का केन्द्र ईश्वर है ।
मैं अल्लाह को भी मानता हूँ भगवान को भी मानता हूँ , GOD और वाहे गुरू बाबा जी को भी मानता हूँ पर फर्क सिर्फ इतना है कि आप लोग अलग अलग धर्म या सम्प्रदाय से जोडकर देखते हो और मैं इन सबको एक मानता हूँ।
मैं इनपे विश्वास करता और मानता हूँ कि हम सबके जीवन में इनका (अल्लाह,ईश्वर,GOD,बाबा जी) बहुत महत्व है।
कम से कम हमें इतना तो सुकून रहता है कि दुनिया में जब हर कोई हमारी मदद करने से मना कर देगा तो ईश्वर जो कि सबकी मदद करता है वो हमारी मदद जरूर करेगा।
हम अपने इष्ट देव की पूजा या इबादत इसलिए करते है कि वो हमारी दुख के समय में मदद करें या हमारे अन्त समय पे हमारे लिए स्वर्ग का दरवाजा खोल के रखें।
इस लेख में मैं सिर्फ उन पाखण्डों का जिक्र करुंगा जो हमें अपने इष्ट देव के पास नहीं बल्कि हमें उनसे दूर ले जाते हैं और ये पाखण्ड हमारी आँखों के सामने होते हैं तथा हम सब कुछ देखते हुए भी इन पाखंडों और पाखंडियों का साथ देते हैं।
सबसे पहले तो सवाल यह है कि ईश्वर को प्राप्त कैसे किया जाए ,ईश्वर की कृपा पाने के लिए क्या करना चाहिए..क्या ईश्वर भी अपनी कृपा प्रदान करने के लिए रिश्वत लेता है ? जवाब होगा नहीं क्योंकि वो तो खुद ही सारे ब्रह्माण्ड का मालिक है उसे किसी चीज की क्या आवश्यकता है।
लेकिन भोले भाले इंसानों को भक्ति के ठेकेदारों ने बहका के रखा है कि घी के दिए जलाओ तो ईश्वर खुश होंगे अब बताइये कि एक गरीब इंसान जो मुश्किल से दो वक्त की रोटी का इन्तजाम भी नहीं कर पाता वो ईश्वर को चढाने के लिए घी कहाँ से लाएगा। अब इसका मतलब ये तो नहीं है कि ईश्वर गरीबों की सुनेगा ही नही क्योंकि वह घी के दिए नहीं जला जा सकता।
और इंसान भी पीछे नहीं है वह भी अपना मतलब के लिए ईश्वर को रिश्वत आफर कर ही देता है । जब भी इंसान का कोई काम फँसता है वो ईश्वर से सच्चे मन से मदद मांगने की जगह ईश्वर से ही डील करता करता है और कहता है हे ईश्वर मेरा फला फला काम पूरा करा दो तो मैं तुम्हें सवा किलो बेसन के लड्डू चढाऊंगा । लो जी अब भगवान के भी क्या दिन आ गये हैं कि सवा किलो लड्डू खाने के लिए इंसान का काम तो करना ही पडेगा।
जबकि सच ये है कि आज तक भगवान ने किसी का भी चढाया लड्डू खाया नहीं है लेकिन काम सबका किया है फिर भी एक इंसान है कि समझना नहीं चाहता।
ईश्वर तो भाव का भूखा होता है जानते सब है समझता कोई नहीं है कि ईश्वर को किसी लड्डू या नारियल की जरूरत नहीं है ,हाँ अगर उसी नारियल लड्डू के पैसे से आप किसी अनाथ गरीब बच्चे की मदद कर दें तो जरूर ईश्वर आपसे खुश हो जाएगा।
लेकिन आप ये बात नहीं समझोगे क्योकि आपके मन में पाखंडियों ने ऐसी बातें भर दी है कि सच आपको दिखाई नहीं देगा।
इसी को ईश्वर की अंधी भक्ति कहते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि अपने ईश्वर की पूजा करने के लिए तन का स्वच्छ होना ज्यादा जरूरी है या मन का ?
बहुत से लोगों का जवाब होगा मन का ।
क्योंकि मन ही ईश्वर का वास्तविक निवास स्थान होता है परन्तु जो पाखंडी होते हैं उनका तन तो साफ होता है परन्तु मन बहुत ही घटिया और गन्दा होता है
ये पाखंडी वेश भूषा तो ऐसी बना के रखते हैं मानो इनके जैसा कोई पंडित या विद्वान ही नहीं है
लेकिन जब कोई युवती इनका आशिर्वाद लेने के लिए झुकती है तो इन पाखंडियों का ध्यान आशिर्वाद देने पर नहीं बल्कि उस युवती के सुन्दर अंगों पर होता है और ऐसी नजर से देखते हैं जैसे कि कोई भूखा इंसान खाने को देखता है।
यही मन की अशुद्धता है जो आजकल प्रायः आम बात हो गई है।मैं ये नहीं कह रहा कि सारे साधू या पंडित ऐसे है लेकिन अगर तालाब में कुछ गन्दी मछलियाँ हैं तो तालाब तो गन्दा कहा ही जायेगा।
और हम सब इनके माया जाल में इस तरह फँस जाते है कि एक विद्वान और पाखंडी में अन्तर नहीं कर पाते।
अभी कुछ ही दिन पहले मैं मां की मन्नत को पूरा करने के लिए देवी मां के दर्शन हेतु एक बडे मंदिर गया था। ऐसा माना जाता है कि खाली पेट मां का दर्शन करना चाहिए इसलिए हम सब सुबह ही नहा धोकर तैयार होकर निकल गये।
चूंकि रास्ता लम्बा था तो वक्त काफी हो गया और हम करीब ३ बजे मंदिर पहुंचे ।
पहुंचने के बाद धर्मशाला में देवी मां के दर्शन के लिए हलवा पूरी बनाई गई और ४ बज गया और मेरा भूख से बुरा हाल था।
मैं तो यही सोच रहा था कि कितनी जल्दी दर्शन किया जाए और कुछ खाने को मिले।
अब आप ही सोचिए मैं दर्शन हेतु गया हूं और मेरा ध्यान खाने पे है उस समय मुझे याद आया जो मैंने कहीं पढ़ा था कि भूखे पेट भजन नहीं होता।
खैर किसी तरह हम मुख्य मंदिर पहुंचे और लम्बी लम्बी लाइन देख के तो मेरी हालत और खराब हो गई।
जैसे ही हम लोग लाइन में खड़े हुए उसके बाद १० मिनट ही हुए थे कि लाइन में काफी आगे खड़ी युवती गिरी और बेहोश हो गई ।
२ लोगों ने उसे बाहर निकाल के स्वच्छ खुली हवा में ले गए।
ये सब देख के मैं और परेशान हो गया क्योंकि अभी हमें देवी मां के करीब पहुंचने में काफी समय था। मैं अपनी भूख और समस्या के बारे में सोच ही रहा था कि आगे से एक और अधेड़ उम्र के आदमी को भी चक्कर आने लगा और वो बाहर निकलने की कोशिश करने लगा पर भीड इतनी थी निकल नहीं पा रहा था और कोई जगह भी नहीं दे रहा था परिणाम ये हुआ कि वह भी बैठ गया तो किसी तरह पुलिस वालों ने उसे बाहर किया।
एक तरफ हम लोग भीड में परेशान अपनी बारी काफी इंतजार की रहे थे और दूसरी तरफ मैंने देखा कि मंदिर के ही कुछ कर्मचारी पैसे लेकर कुछ लोगों को छोटे रास्ते से अन्दर घुसा के दर्शन करवा रहे हैं।
मैंने पूछा कि अरे वहां से भी कोई रास्ता है क्या ?
तो एक सज्जन ने कहा कि वहाँ पर अमीरों के लिए VIP दर्शन हो रहा है ।
अब आप सोचिए पुराने समय में लोग सब कुछ त्याग कर वर्षों तपस्या करके ईश्वर तक पहुँचते थे और आज तो 100 रुपये दो ईश्वर के दर्शन लो।
अगर सिफारिश या धन से ईश्वर की कृपा मिलती होती तो पुराने समय में किसी भी साधू महात्मा को ईश्वर के दर्शन न होते बल्कि सारे वरदान और ईश्वर की कृपा राजा महाराजा लोग लोग धन देकर ले लेते। आजकल के तो पढे लिखे अमीर लोगों का बस चले तो पंडितों को रिश्वत खिलाकर ईश्वर को अपने घर पर ही बुला लें लेकिन ऐसा सम्भव नहीं है ।
खैर,मेरा कहने का मतलब है कि अगर आपके पास समय नहीं हैं आप जल्दी में हैं तो क्या जरूरत है ईश्वर के पास आने की।
लोग ईश्वर को खुश करने के लिए खुद को तकलीफ पहुँचाते है जोकि बिल्कुल भी उचित नहीं है । हम ईश्वर की सन्तान हैं और वह हमारा परमपिता।कोई भी माँ बाप अपने बच्चे को दुख में देखकर खुश नहीं हो सकता तो आप बताओ हमें दुख में देखकर ईश्वर कैसे प्रसन्न होगा।
इसलिए ये खयाल दिल से निकाल द़े कि हम खुद को तकलीफ देंगे तो भगवान हमारी जल्दी से सुनेगा।आप अपना काम ईमानदारी और मन से करते रहिए ,किसी का दिल मत दुखाइए, किसी का बुरा मत कीजिए यकीन मानिए ईश्वर आपसे हमेशा प्रसन्न रहेगा और आप जब भी उसकी मदद मांगेंगे वो यकीनन आपकी मदद करेगा।
यह मेरा खुद का अनुभव है।
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