BS-3 वाहन- डिस्काउंट के पीछे का सच
क्या आपने भी BS-3 बेस्ड वाहन डिस्काउंट की लालच में खरीद लिया है ? अगर हाँ तो बधाई हो गाडी की खरीद पर आपकी बचत के लिए, लेकिन अब तैयार हो जाइए इससे मिलने वाले झटकों के लिए । जी हां , सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद जिस तरह से आटोमोबाइल कम्पनियों ने अचानक गाडियों की खरीद पर डिस्काउंट की बरसात कर दी और सारे के सारे बीएस-3 बेस्ड वाहन दो दिन के अन्दर बेच लिए इसे आटोमोबाइल कम्पनियों की सतर्कता और सूझ बूझ के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। आटोमोबाइल कम्पनियां इतनी बेवकूफ तो हैं नही कि अपना खुद का नुकसान करेंगी ।इन कम्पनियों ने डिस्काउंट का पासा फेंककर अपने नुकसान का रिस्क अपने ग्राहकों पर टाल दिया है क्योंकि उन्हें पता है कि बीएस 6 से अपग्रेड होने के बाद बीएस 3 वाहनों को कोई पूछने वाला नही होगा। फिलहाल आटोमोबाइल कम्पनियों ने तो अपनी लागत निकाल ली है लेकिन आम लोगों ने डिस्काउंट लेने के चक्कर में इस बात को इग्नोर ही कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने बीएस 3 के वाहनों की मैन्यूफैक्चरिंग और बिक्री पर रोक क्यों लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण से पर्यावरण की सुरक्षा और लोगों के स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण माना है । चूंकि बीएस 3 के वाहन लोगों की स्वास्थ्य सम्बन्धी कसौटियों पर खरा नही उतरते हैं इसलिए लोगों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कोर्ट ने यह बडा फैसला सुनाया था परन्तु लोगों की लालची मानसिकता तो देखिए उन्होंनें अपने स्वास्थ्य को तवज्जो न देकर अपनी लालच को ही तवज्जो दी और दो दिन के अन्दर सारे बीएस 3 बेस्ड वाहन खरीद लिए। ये तो वही बात हो गई कि जिस रोग को देश से निकालने का आदेश हुआ उन्हीं रोगों को लोगों ने पैसे खर्च करके अपने अपने घरों में पनाह दे दी है।
दूसरी झटका देने वाली बात यह है कि दो या तीन साल के बाद बीएस 3 बेस्ड वाहन लोगों की तकलीफों को और भी बढाने वाले हैं क्योंकि अभी तक आप जब अपनी पुरानी गाडियां बेचते थे तो आपको अच्छा पैसा मिल जाता था या यूं कहिए कि दो तीन साल पुरानी गाडी (यदि आपने सम्भाल के चलाई हो) की रिसेल पर असली कीमत का 50% से 80% तक मिल ही जाता था , लेकिन बीएस 6 के बाद बीएस 3 बेस्ड वाहनों की रिसेल के मामलों में अब ऐसा नही होगा । बीएस3 बेस्ड वाहनों की तीन साल बाद रिसेल वैल्यू बहुत ही कम या फिर न के बराबर होगी। इसकी मुख्य वजह है कि 2020 तक लगभग सभी वाहन बीएस 6 से अपग्रेड हो चुके होंगे जो कि बीएस 3 की सारी कमियों का सोल्यूशन होगा और प्रदूषण तथा मानव स्वास्थ्य की सभी कसौटियों पर खरा होगा इसलिए कोई भी पढा लिखा जागरुक इंसान बीएस3 की अपेक्षा बीएस 6 की गाडियों को ही तवज्जो देगा।
इस हिसाब से अगर देखा जाए तो बीएस 6 से अपग्रेड होने के बाद बीएस 3 बेस्ड सभी वाहन कबाड के रूप में ही देखे जाएंगे क्योंकि कुछ समय बाद जब आप बीएस 6 बेस्ड वाहन खरीदना चाहेंगे और उसके लिए अपनी पुरानी बीएस 3 बाइक बेचना चाहेंगे तो आप पुरानी बाइक की रिसेल पर उतनी कीमत नही पा सकेंगे जितनी कि अभी (बीएस6 से पहले) मिलती है ।
कुल मिलाकर इतना कहा जा सकता है कि अभी जिनको लग रहा है कि 5000 से 12000 तक के डिस्काउंट पर वाहन खरीदकर फायदे में हैं वास्तव में दो या तीन साल बाद उन्हें खुद महसूस होगा कि यह सौदा कितना नुकसानदायक है। जितने डिस्काउंट पर अभी आपने गाडी ली है उससे कहीं ज्यादा का नुकसान आपको उसकी रिसेल के वक्त होगा।
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