राम मंदिर विवाद

अगर कोई राजनीतिक विवाद हो या आर्थिक घोटाले की बात होती है तो हर कोई बढ चढ के बोलता है और अपनी बेबाक राय देता है कि यह होना चाहिए या वह नही होना चाहिए मगर  जब कभी भी धार्मिक आस्था की बात आती है तो बडे बडों की बोलती बन्द हो जाती है या यूँ कहिए कि हर कोई बोलने से बचता है  और अगर किसी ने हिम्मत करके कुछ कह भी दिया तो उसे लेने के देने पड जाते हैं। धर्म पर बोलने के लिए कोई इंसान या संस्था भगवान या अल्लाह से नही बल्कि उनके समर्थकों से डरते हैं। यही हुआ सुप्रीम कोर्ट में भी जब राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विध्वंश मामले में सुनवाई होनी थी लेकिन कोर्ट ने साफ साफ कह दिया कि यह धार्मिक आस्था का विषय है इसलिए कोई भी फैसला लेना आसान काम नही है क्योंकि  अगर कोई फैसला किसी के पक्ष में सुनाया जाता है तो यह दूसरे पक्ष की आस्था और विश्वास पर प्रहार होगा इसलिए बेहतर यही होगा कि दोनों पक्ष आपस में मिलकर बीच का कोई रास्ता निकालें।चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि अगर दोनों पक्षों में मध्यस्थता की भूमिका भी निभाने की जरूरत पडी तो वह तैयार हैं या किसी अन्य न्यायाधीश को इसके लिए नियुक्त किया जा सकता है।
वास्तव में अगर  देखा जाए तो यह एक समझदारी भरा फैसला है क्योंकि अगर फैसला हिन्दू और मुस्लिम दोनों मे से किसी एक के पक्ष में होता है तो यूपी में दंगे और विरोध प्रदर्शन की सम्भावनाएं बढ जाएंगी और धार्मिक या साम्रदायिक दंगे के हर दुष्परिणाम से हर कोई वाकिफ है । इन दंगों में न जाने कितने निर्दोषों और लाचारों की अनावश्यक रूप से  बलि चढ जाती है।



परन्तु सवाल अब भी और बहुत बडा  है कि क्या राम मन्दिर का विवाद आपसी बातचीत से निपटाया जा सकता है ? किसी भी विवाद को निपटाने के लिए दोनों पक्षों के रवैये में लचीलापन और व्यवहार में उदारता का होना बहुत ही जरूरी है। राम मंदिर का विवाद सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच  का विवाद नही है  बल्कि भारत के  दो  बडे धर्मों को मानने वाले करोडों लोगों के बीच का है और इस मामले में किसी भी फैसले से इतने सारे लोगों को संतुष्ट कर पाना आसान काम नही है।
यह वह समय है जब हिन्दुओं के बडे बडे साधू सन्तों और मठाधीशों तथा मुस्लिमों के मौलवियों और वरिष्ट जानकारों की बुद्धि और विवेक की परीक्षा होनी है क्योंकि इन सबको ऐसे फैसले लेने हैं कि विवाद भी समाप्त हो जाए साथ ही साथ किसी तरह का कोई साम्प्रदायिक या धार्मिक तनाव या दंगे का माहौल भी न बने।
जहाँ तक अदालत का सवाल है तो अब शायद वह समय आ गया है जब हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों को यह समझना होगा कि  आपस की लडाई से कुछ हासिल नही होगा। न तो हिन्दू मस्जिद बनने देंगे और न मुस्लिम मंदिर बनने देंगे , पीढियाँ बीतती जाएंगी और मामला इसी तरह अदालतों में चलता रहेगा।
दोनों धर्मों के लोगों को यह समझना होगा और एक दूसरे को आश्वस्त करना होगा कि इस्लाम की मौजूदगी में न तो हिन्दुत्व को कोई हानि होगी और न ही हिन्दू धर्म के मौजूद होने से मुस्लिमों के धर्म को कोई नुकसान होगा। चाहे हिन्दू धर्म के श्री राम हों या इस्लाम के अल्लाह सबने दुनिया में अच्छाई ,सत्य, धर्म और इंसानियत की तरफ से और बुराई , असत्य, अधर्म और शैतानियत के खिलाफ ही लडाई लडी है। रास्ते भले ही अलग हैं मगर मंजिल हर धर्म की एक ही होती है और वो है दुनिया में  अच्छाई , शान्ति और अमन का माहौल  कायम रखना।
अयोध्या में न मंदिर न मस्जिद बनने से तो कही बेहतर है कि ये दोनों ही बन जाएं।हालाँकि यह सच है कि अयोध्या श्री राम चन्द्र जी की जन्म स्थली के रूप में ही जाना जाता है मगर मुगल शासकों के द्वारा वहाँ मस्जिद निर्माण हो जाने से बहुत से मुस्लिमों की आस्था भी जुड चुकी है इसलिए यदि अयोध्या में मंदिर के साथ साथ मस्जिद भी बनता है तो यह दो बडे धर्मों के संगम का केन्द्र होगा और यह संगम अपने  आप में एक मिसाल कायम करेगा। मंदिर और मस्जिद का एक साथ होना भारत के विभिन्न धर्मों के अनुयायिओं के बीच धार्मिक एकता और सद्भाव का उदाहरण पेश करेगा।
राजनीति बन्द होनी चाहिए:
अब राम मंदिर और बाबरी मस्जिद पर और राजनीति नही होनी चाहिए ।चूंकि हर बार के चुनाव में राम मंदिर भाजपा की तरफ से प्रमुख मुद्दा होता है और इस समय भाजपा अपने विजयरथ पर सवार है लोगों का विश्वास और भरोसा उसके साथ है तथा सबसे बडी चीज यह है कि केन्द्र और यूपी राज्य ,दोनों में उसी की सरकार है।इसलिए राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद को खत्म करने का यह एक  स्वर्णिम अवसर है । प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व पार्टी के अन्य वरिष्ट नेता  बेहतर, दूरदर्शी  और समझदार राजनीतिज्ञ हैं तथा किसी भी धर्म संकट से निपटने में सक्षम हैं  परन्तु साथ ही साथ यह भी ध्यान रखना है यह राम मंदिर का  विवाद बहुत ही सेन्सिटिव है शायद इसीलिए अदालतों में भी आजतक कोई फैसला नही आ सका है ,थोडी सी भी चूक किसी  बडे दंगे का रूप ले सकती है या लोगों का भरोसा भाजपा पर से उठ सकता है और यह भाजपा की छवि को धूमिल कर सकता है साथ ही साथ विरोधियों एक मौका मिल सकता है भाजपा के विजयरथ को रोकने का जो कि भाजपा बिल्कुल भी नही चाहेगी ।
इसलिए हम अपने देश और प्रदेश की सरकार से आशा करते हैं कि राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद हमेशा के लिए खत्म होगा और देश में अमन और शान्ति भी कायम रहेगी। हिन्दू और मुस्लिम भाइयों से उम्मीद रखते हैं कि इस बडे मसले को हल करने में धैर्य और सहयोग का रास्ता अपनाएंगे तथा आपस में मिलकर उचित फैसला लेंगे।
हम ऐसे देश में रहते हैं जहाँ हर धर्म के लोग पाए जाते हैं और सभी एक दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं।इसलिए हम सबको कुछ इस तरह का वातावरण बनाना है कि देश में ईश्वर  का भी सम्मान हो, GOD  का  भी सम्मान हो, वाहे गुरू का भी सम्मान हो और अल्लाह का भी सम्मान हो । ऐसा सिर्फ तभी हो सकता है जब विभिन्न धर्मों को मानने वाले  हम इंसानों में आपस में प्रेम और भाईचारा होगा।
याद रखिए:
जैसे  इंसानियत के बिना हर इंसान अधूरा है
चाँद सितारों के बिना सारा आसमान अधूरा है
हिन्दू भी पूरे नही  हैं मुसलमान भाइयों के बिन
और हिन्दुओं के बिना हर मुसलमान अधूरा है
मिलने दो आज लोगों  मोहम्मद को ईश्वर  से
इक दूजे बिन अल्लाह और भगवान अधूरा है
हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही बाहें हैं  देश की
इन दोनों के बिन अपना  हिन्दुस्तान अधूरा है।

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