घर पर रहिए: स्वस्थ रहिए


पूरी दुनिया इस समय कोरोना के काल से ग्रसित है। हर एक देश इसके इलाज की खोज के लिए प्रयासरत है लेकिन कोई सफलता फिलहाल तो दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सिर्फ एक ही विकल्प बचता है दुनिया भर के सामने कि जब तक इसका इलाज नहीं मिल जाता , बचाव किया जाए और उसके लिए कई देशों ने लाकडाउन का सहारा लिया है जिससे लोग आपस में एक दूसरे से थोडी दूरी बनाए रखें और इस वायरस को फैलने का कम से कम मौका मिले। हमारे भारत में भी इस समय 14 अप्रैल 2020 तक लाकडाउन है। हाँ इससे लोगों को थोडी सी परेशानियों का सामना जरूर करना पड रहा है लेकिन एक बेहतर भविष्य के लिए इतनी परेशानी उठाने में किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। 
लाकडाउन के समय सब कुछ भारत में ठीक ठाक चल ही रहा था और वायरस की रफ्तार भी कम हो रही थी लेकिन तभी 27-30 मार्च के बीच जो पलायन की प्रक्रिया शुरू हुई , और लोग बसें ट्रेनों के बन्द होने के कारण पैदल ही रोड पर निकल गए और बेवजह भीड बनाई , इस सारी प्रक्रिया में वायरस को एक बार फिर पनपने और अपनी रफ्तार बढाने का मौका मिला है। जिस तरह से लोग एक साथ गाँव की तरफ भागे वास्तव में इस घटना ने सरकार और घर में रह रहे जागरूक लोगों की नींद उडा दी थी। फिलहाल अब फिर से लोग सामान्य हो रहे हैं। जब हमने कुछ लोगों से पूछा कि भाई इतना भी जरूरी क्या था कि सरकार के मना करने के बाद भी आप लोग लाकडाउन तोड दिए और सडकों पर आ गए मौत से मिलने ? तो जवाब जो मिला वो हजम नहीं हुआ । वो बोल रहे थे कि हम रोज कमाते हैं रोज खाते हैं , अब काम बन्द है तो क्या खाएं हम खाने को मर रहे थे और दूसरी बात मरना है तो घर वालों के सामने मरो शहर में अकेले क्या मरना, कोई बोला बीवी बच्चे बुला रहे थे इसलिए आ गए। वे सब ऐसा बोल रहे थे शायद इन बेवकूफों को खतरे का सही अन्दाजा नहीं हुआ है अभी।

मैं ऐसे लोगों से पूछना चाहता हूँ कि जब आप मलेरिया टाइफाइड और अन्य बीमारियों से ग्रस्त होते हैं और महीनों बिस्तर पर पडे होते हैं तब तो आपको खर्चे की चिन्ता नहीं होती और आज जब आपको खर्चा भी मिल रहा है भोजन भी मिल रहा और रहने का किराया तक माफ है फिर भी आप घरों में या जहां हैं वहां रुकना नहीं चाहते क्यों ? एक पल के लिए मान लिया सरकार की मदद आप तक नहीं पहुंची तो क्या जिन्दगी भर आपने जिनको कमा के दिया है वो परिवार आपका दो तीन हफ्ते का खर्च नहीं उठा सकता ? बिल्कुल उठा सकता है लेकिन आप अपनी बेवकूफी की वजह से खुद को भी खतरे में डाल रहे हैं और परिवार के साथ साथ पूरे देश को भी। अरे अब तो समझदारी दिखाओ और घर पर रहो। वैसे भी आप शहर से गांव आ भी गए तो 14 दिन तक न परिवार में घुस पाओगे न काम कर पाओगे। आगे आपकी मर्जी.. आप किसी की सुनते तो हो नहीं।
फिलहाल हम यही कहना चाहेंगे कि आप सब घर पर ही रहें या जहां आपको रखा गया है वहीं पर रहें क्योंकि यही समय की मांग है और देश की जरूरत। बहुत कम समय आता है जब देश आपसे कुछ मांगता है और यह वही समय है। देश को सपोर्ट कीजिए इसे सुरक्षित रखने में मदद कीजिए।

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