यूपी में योगी

उत्तर प्रदेश  में इस समय बदलाव पर बदलाव हो रहा है।जिस तरह विधानसभा चुनाव का परिणाम आने पर यूपी भगवामय और मोदीमय हुआ था उसी तरह 18 मार्च 2017 की शाम को जब विधायक दल की बैठक हुई तो यूपी योगीमय हो गया। जी हाँ योगी आदित्यनाथ जी को उत्तर प्रदेश में विधायक दल ने अपना नेता चुना है अर्थात् मुख्यमंत्री पद के लिए चुना है। योगी आदित्यनाथ जी का मुख्यमंत्री बनना लगभग पहले से तय था क्योंकि ज्यादातर यूपीवासी यही चाहते भी थे। हालाँकि केशव प्रसाद मौर्य और एक दो और सीनियर नेताओं पर सम्भावना जताई जा रही थी मगर इन नेताओं पर सर्वसम्मति नही बन सकी।



उत्तर प्रदेश में नई सरकार और नया मुख्यमंत्री बनने से जनता में नई उम्मीदें जगी हैं मगर अब तक यूपी में पिछली सरकारों ने बहुत अच्छा कार्य नही किया है इसलिए भाजपा और योगी आदित्यनाथ जी को जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निम्नलिखित पाँच बडी चुनौतियों का सामना करना पडेगा।
【1】बिगडी कानून व्यवस्था:
हर कोई जानता है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों से कानून व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है और आम जनता का कानून और पुलिस प्रशासन पर से विश्वास उठ चुका है। एक गरीब इंसान को मामूली सी एफआईआर दर्ज करवाने के लिए भी थानों के चक्कर पे चक्कर लगाने पडते हैं या फिर किसी बडे अफसर या नेता  से सिफारिश करवानी पडती है ।हर दिन  बढते हुए अपराध, चोरी , छिनैती, दंगे और रिश्वतखोरी इस बिगडी हुई कानून व्यवस्था का ही परिणाम है। गुण्डों और अपराधियों में अब किसी भी तरह से कानून का डर नही रह गया है बल्कि अब तो वो खुले आम अपराध करते हैं और बच के निकल भी जाते हैं। अपराधियों की इस बढी हुई हिम्मत का ही परिणाम है कि पुलिस वालों की भी हत्या कर दी जाती है। यूपी में नये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सामने सबसे बडी चुनौती यही है कि वो प्रदेश में कानून व्यवस्था को फिर से मजबूत बनाएं ताकि जनता का विश्वास जो कि  कानून और पुलिस के ऊपर से उठ चुका है उसे फिर से कायम किया जा सके।
【2महिलाओ की सुरक्षा:
योगी आदित्यनाथ जी के सामने दूसरी सबसे बडी जो  चुनौती है वह है महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करना। महिलाओं की सुरक्षा एक राष्ट्रीय मुद्दा है जिसकी शुरुआत प्रदेशों से ही होनी चाहिए। आज प्रदेश में शायद ही ऐसी कोई जगह हो जहाँ पर महिलाओं के साथ छेडछाड और दुष्कर्म की घटनाएं सामने न आती हों चाहे वह स्कूलों और कालेजों के गेट हों , बस स्टैण्ड हों, रेलवे स्टेशन हों या अन्य कोई पब्लिक प्लेस । बिगडी हुई कानून व्यवस्था के चलते महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नही हैं।योगी जी को उत्तर प्रदेश में ऐसा माहौल कायम करना है कि हमारे घरों की बहू बेटियाँ  रास्ते और बाजारों में सुरक्षित महसूस करे। हालाँकि भाजपा  के घोषणा और संकल्प पत्र में महिलाओं की सुरक्षा हेतु एन्टी रोमियो स्क्वाड बनाने का जिक्र है लेकिन इसे लागू करना योगी आदित्यनाथ जी के हाथों में ही है।एक बार अगर एन्टी रोमियो स्क्वाड बन गया और यूपी में लागू हो गया तो शायद महिलाओं के मन से डर निकल जाए और वे बेखौफ होकर प्रदेश में कहीं भी आ जा सकें, साथ ही  यह एन्टी रोमियो स्क्वाड  अन्य प्रदेशों के लिए भी मिसाल बन जाएगा।
【3】छात्रों की उम्मीदों पर खरा उतरना:
योगी आदित्यनाथ जी से सबसे ज्यादा उम्मीद छात्र समुदाय ने लगा रखी है क्योंकि पिछली सरकारों ने सिर्फ भर्तियों के नाम पर छात्रों का आर्थिक और मानसिक शोषण ही किया गया है। पिछली सरकार में शायद ही कोई भर्ती होगी जिसे पूरा किया गया हो और जो पूरी भी हुई हैं उन पर भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की तलवारें ही लटक रही हैं । कभी कभी तो एक ही भर्ती के लिए चार- चार बार  आवेदन और प्रत्यावेदन मांगे गए जैसे प्राइमरी की 72825 शिक्षको की भर्ती बसपा के शासन काल में निकाली गई थी और सपा का भी पूरा शासन काल बीत गया इस दौरान न जाने कितनी बार छात्रों का आर्थिक रूप से शोषण किया गया । मानसिक दबाव के चलते कुछ ने आत्महत्या भी कर ली लेकिन अभी तक वह भर्ती प्रक्रिया पूरी नही हो पाई और मामला इस समय भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।भाजपा की नई सरकार से छात्रों में उत्साह और उम्मीद जगी है। साफ सुथरी प्रतियोगी परीक्षाएं और भर्तियाँ सम्पन्न कराना तथा रोजगार के नये अवसर उपलब्ध कराना योगी आदित्यनाथ जी के सामने एक चुनौती से कम नही है।

【4】किसानों की उम्मीदों पर खरा उतरना:
नई सरकार में अगली चुनौती है किसानों को खेती बाडी करने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना। पिछली सरकारों ने किसानों के लिए योजनाएं तो बनाई लेकिन उन योजनाओं का ठीक तरीके से क्रियान्वयन नही हो पाया । इन योजनाओं से जो लाभ किसानों को होना चाहिए था वो सारे लाभ बीच के दलालों और अधिकारियों को ही मिला । जो सस्ते बीज और खाद सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को मिलने चाहिए  वो प्राइवेट बीज और खाद की दुकानों पर पहुँच जाते हैं और वहाँ से ऊँचे दामों पर किसानों को वही बीज खरीदने पडते हैं। ठीक यही हाल सिंचाई के लिए बिजली का भी रहा । कहने को तो गांवों में 18 घण्टे  बिजली का प्रावधान है मगर मुश्किल से 10 से 12  घण्टे ही बिजली मिलती है और वो भी किश्तों में कट पिट कर। ज्यादातर बिजली ऐसे समय में ही दी जाती है कि किसान उसका इस्तेमाल न कर सकें अर्थात् रात में। रात में ही बिजली टिकने की वजह से सिंचाई आदि में बहुत परेशानी होती है।
योगी आदित्यनाथ जी को किसानों का दर्द समझना होगा और इन्हें सस्ते खाद, बीज, बिजली और पानी के साथ सस्ते कर्ज उपलब्ध कराने होंगे ताकि उनकी खेती आसानी से हो सके।
【5】प्रदेश में अमन और शान्ति कायम रखना
चूंकि अभी तक हमारे नये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की पहचान एक कट्टरवादी हिन्दू नेता के रूप में ही होती है और उत्तर प्रदेश में हिन्दुओं के साथ साथ मुस्लिम और अन्य धर्म के लोग भी रहते हैं। अब तक जो भी था वो था मगर अब अगर यूपी एक परिवार है तो योगी आदित्यनाथ इस परिवार के मुखिया हैं और एक मुखिया का कर्तव्य होता है कि अपने परिवार के हर सदस्य के साथ एक समान व्यवहार करे और उन्हें सम्मान दे तथा हर तरह से आपस में प्रेम और सद्भाव को कायम रखे।
इसलिए योगी आदित्यनाथ जी के सामने अब तक की सबसे बडी चुनौती है अपनी कट्टरवादी सोच और प्रदेश के अन्य धर्मों के लोगों के बीच सकारात्मक सामंजस्य या तालमेल बनाए रखना।
अगर भाजपा और योगी आदित्यनाथ जी की सरकार इन पाँचों चुनौतियों को पूरा करके जनता का विश्वास हासिल कर लेती है तो आने वाले समय में यूपी में भाजपा का ही राज होगा अन्यथा जनता अगले पाँच साल बाद भाजपा का भी वही हाल करेगी जो बसपा और सपा का किया है।

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