हार की जिम्मेदार खुद भाजपा सरकार

www.rajdwriter.com
15 march 2018,

गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर भाजपा की  हार  पर चौराहों और चाय की दुकानों पर चर्चा शुरू हो गई है।कुछ लोग कह रहे हैं कि भाजपा की हार सपा और बसपा के आपसी गठबंधन और उनकी जातीय राजनीति का परिणाम है तो कुछ लोग इसे महज एक इत्तेफाक समझ रहे हैं लेकिन भाजपा की इस करारी हार के पीछे भाजपा खुद भी कुछ हद तक जिम्मेदार है। पिछली लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में वह विकास के मुद्दे को आधार बनाकर मैदान में उतरी तो देश और प्रदेश की जनता (चाहे वह दलित हों,मुस्लिम हों ,सवर्ण हो या पिछडे)  ने भाजपा को आँख बन्द करके वोट दिया , इस उम्मीद के साथ कि प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधरेगी और अपराध पर अंकुश लगेगा।  

परन्तु भाजपा जैसे ही चुनाव जीती वह अपने विकास के मुद्दे को ही भूल गई। भाजपाई समर्थकों की दबंगई चालू हो गई। दलितों, पिछडों और मुसलमानों को दबाया जाने लगा ,उन पर अत्याचार और भेदभाव की घटनाएं सामने आने लगी। हो सकता है कि भाजपा के शीर्ष पर बैठे आलाकमान को इस बात की जानकारी न हो पर आए दिन सवर्णों के द्वारा दलितों और मुसलमानों को अपमानित करने की घटनाएं बढने लगी हैं।

भाजपा को यह समझना चाहिए कि उनकी सरकार बनाने में सिर्फ सवर्णों का ही हाथ नहीं है बल्कि हर जाति हर धर्म के लोगों का हाथ है। भाजपाई दबंगई से इस वक्त हर दलित, पिछडे और मुसलमान परेशान हैं ऐसे में जाहिर है आने वाले समय में ये भाजपा का कतई समर्थन नहीं करेंगे और इसका फायदा सपा और बसपा पूरी तरह से उठाएंगे। भाजपा भले ही यह दावा करती है कि वह जातिवाद की राजनीति नहीं करती है लेकिन सच तो यह है कि उसकी सरकार में ही ज्यादातर जातिगत भेदभाव सामने आते हैं।

आने वाले समय में यदि भाजपा दबंग समर्थकों का यही रवैया रहा तो अगले चुनावों में उसकी और भी ज्यादा दुर्गति हो सकती है क्योंकि भाजपा को हराने के लिए सपा और बसपा के अलावा अन्य पार्टियाँ भी एकजुट हो सकती हैं। अगर भाजपा को इन एकजुट होती पार्टियों से लडना है  तो उसे अतिआत्मविश्वास से बाहर निकलना होगा, गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर मिली करारी शिकस्त से एक सबक लेना होगा और उसे जनता को खुश रखना होगा, उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना होगा ।

Comments

Popular posts from this blog

BS-3 वाहन- डिस्काउंट के पीछे का सच

E-श्रमिक कार्ड बन रहा है

किसानों को किसान ही रहने दो