UPTET 2011 : अभ्यर्थियों का शोषण

UPTET 2011 भर्ती का जब से विज्ञापन निकाला गया तभी से इस भर्ती को अवरोधित करने के लिए एक के बाद एक विवादों ने जन्म लिया । इस भर्ती का विज्ञापन निकले आज लगभग सात साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक यह पूरी नहीं की गई।इन सात सालों के दौरान तमाम ऐसे अभ्यर्थी हैं जो अब अन्य भर्तियों के लिए ओवरएज हो चुके हैं और उन्हें सिर्फ इसी भर्ती का भरोसा रह गया है। इस भर्ती में कुल 72825 पद शामिल थे जिसमें लगभग 66000 से ज्यादा पद भरे जा चुके हैं और अब भी 7000+ पद खाली हैं जिनको पूरा करने में राज्य सरकार आनाकानी कर रही है। 

आपको बता दें कि इन शेष पदों पर भर्ती का रास्ता देख रहे अभ्यर्थियों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है। देश की जिस न्याय व्यवस्था पर अभी तक अभ्यर्थियों को भरोसा था वह टूटता नजर आ रहा है । सुप्रीम कोर्ट से आदेश होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया के ठप होने के सम्बंध में जब सम्बंधित अधिकारियों से बातचीत की जाती है तो वे भर्ती प्रक्रिया अवरोधित होने का कुछ और कारण बताते हैं और जब मुख्यमंत्री जी से कभी बात होती है तो वे कुछ अलग तरह का ही बयान देकर एक झूठा सा आश्वासन दे देते हैं।इन भिन्न भिन्न बयानों और आश्वाशनों से ही यह साबित होता है कि सरकार और अधिकारी सब मिलकर UPTET 2011 के समस्त अचयनित अभ्यर्थियों को बेवकूफ बना रहे हैं।

इसी के चलते अभ्यर्थियों ने जनवरी 2018  से लखनऊ में क्रमिक अनशन पर बैठने का फैसला किया ,करीब एक महीना बीत जाने के बाद भी जब कोई सरकारी अफसर या नेता उनकी बातें सुनने नहीं आया तो अभ्यर्थियों ने आमरण अनशन का फैसला किया। इसके बाद लगभग 5000 से भी अधिक की संख्या में यूपीटेट 2011 भर्ती के अचयनित अभ्यर्थी लखनऊ में सडकों पर उतर आए और सरकार तथा अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। राज्य सरकार की कठोरता देखिए, अभ्यर्थियों की बात सुनने के स्थान पर पुलिस भेजकर उनका आन्दोलन रोकने की कोशिश की गई और उनपर लाठियां बरसाई गई तथा महिला अनशनकारियों से बदतमीजी से बात की गई । फिलहाल तमाम कोशिशों के बाद जब पुलिस भीड को काबू नहीं कर पाई तो हर बार की तरह मजबूर होकर राज्य सरकार ने  एक अधिकारी भेज दिया और अभ्यर्थियों को "आश्वासन" का लालीपाप थमा के उन्हें एक बार फिर उल्लू बनाने में सफल हो गई।

अब तो ऐसा लगता है कि यूपी राज्य की सरकार पूरी तरह से बहरी हो चुकी है क्योंकि उसे सात साल से प्रताडित और शोषित हो रहे UPTET 2011 के  अभ्यर्थियों की आवाजें सुनाई नहीं दे रही है और देश की न्यायपालिका पूरी तरह से अन्धी हो चुकी है क्योंकि उसे अभ्यर्थियों की पीडा और समस्या दिखाई नहीं दे रही है। कारण चाहे कुछ भी हो ,चाहे राज्य की वर्तमान सरकार पिछली सरकार से द्वेष के चलते जानबूझकर यह भर्ती पूरी नहीं करना चाहती या न्यायपालिका खोखली और शिथिल हो चुकी है , मानसिक शोषण तो अभ्यर्थियों का ही हो रहा है। यह शोषण तब तक होता रहेगा जब तक कि समस्त अभ्यर्थी एकजुट नहीं हो जाते। 

अब समस्त अभ्यर्थियों से अपील है कि यदि आपको इंसाफ और नौकरी चाहिए तो चुप रहने से काम नहीं चलने वाला ।सबको साथ आने की जरूरत है ,एक होने की जरूरत है। एकता में ही शक्ति है और एक होकर ही किसी तानाशाह से इंसाफ हासिल किया जा सकता है। अगर वर्तमान सरकार विद्यार्थियों और नौजवानों की समस्या हल नहीं कर सकती तो उसे अगली बार सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यही सही समय है अपनी आवाज उठाने का क्योंकि सामने 2019 का चुनाव है। समस्त विद्यार्थी, नौजवान और UPTET 2011 के अभ्यर्थी एक हो जाइए और दिखा दो कि नौजवानों का हक छीनने वाले सरकार नहीं बना सकते।

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