लो ! हनुमानजी भी दलित निकले

कितना अजीब लगता है जब इंसान अपने फायदे के लिए हर हद पार कर जाता है। आजकल भारतीय राजनीति में भी यही हो रहा है। एक के बाद एक ऐसे बयान आ रहे हैं जिन्हें सुनकर ही हँसी आ जाती है। अभी यूपी के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने एक बयान दिया कि हनुमानजी वंचित समाज के थे और दलित जाति से सम्बन्ध रखते थे। उनका यह बयान आते ही एकाएक भारतीय राजनीति में भूचाल सा आ गया है। हमारी समझ में नहीं आ रहा  कि योगी जी ने क्या समझकर यह बयान दिया । क्या वे दलितों के मन में भाजपा के लिए थोडी बहुत जगह बनाना चाहते हैं या फिर यह साबित करना चाहते हैं कि दलित सवर्णों की सेवा करने के लिए ही बने हैं क्योंकि हनुमानजी भी भगवान श्रीराम की सेवा में अपना सारा जीवन व्यतीत किये थे। धर्म और जाति पात के खेल में इंसानों की तो बात ही छोडिए भगवान को भी नहीं बख्शा जा रहा है ..क्यों ? सिर्फ़ कुछ वोटों के लिए ?

हनुमानजी को दलित कहने का अभिप्राय तो यही हुआ कि भगवान शिव भी दलित हैं क्योंकि हनुमानजी को उन्हीं का अवतार माना जाता है। अगर शिवजी दलित होंगे तो जाहिर सी बात है कि उनका परिवार भी (गौरी, गणेश जी आदि) दलित ही कहलाएगा ।शायद योगी जी ने यह बयान देकर भारतीय दलितों को यह बताने की कोशिश की है कि दलित आज से नहीं बल्कि युगों युगों से सवर्णों की सेवा करने के लिए ही बने हैं। ऐसा लगता है कि इंसानों को जातपात में बाँटने के बाद भगवान का भी बँटवारा शुरू हो गया है। सवर्णों के भगवान अलग,पिछडों के भगवान अलग और दलितों के भगवान अलग। कोई योगी जी को समझाने का प्रयास करे कि वो देश भर के ब्राह्मणों को हनुमानजी और शिवजी की पूजा करने से रोक दें क्योंकि एक ब्राह्मण एक दलित की पूजा करे यह उसे शोभा नहीं देता। अजी ! धर्म भ्रष्ट हो जाएगा एक एक ब्राह्मण का जो शिव जी ,गणेश ,काली, दुर्गा और हनुमानजी की पूजा करेगा और उनका प्रसाद व चरणामृत ग्रहण करेगा ।ब्राह्मण अपना धर्म बचाएं और दलितों की पूजा करना छोड दें।

एक तरफ हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी 'भारत माता की जय ' के नारे लगाते नजर आ रहे हैं तो योगी जी धर्म और जाति की राजनीति करते दिखाई देते हैं।मोदी जी कहते हैं कि हम सब भारत माँ की संतान हैं तो योगी जी भगवानों के जाति निर्धारण मे लगे हुए हैं।चुनाव नजदीक आते ही सारे नेता राष्ट्रीय एकता की बात छोडकर ,लोगों को धर्म और जाति में तोडकर अपने अपने पक्ष में करने में लगे हुए हैं।ये भारत है यहां चंद वोटों के लिए धर्म और जाति के नाम पर कुछ भी हो सकता है।भगवान को भी पिछडा व दलित कहा जा सकता है और एक दो गाय की मौत के लिए करोड़ों की गाडियाँ फूँकी जा सकती हैं और सुबोध सिंह जैसे पुलिस के नौजवानों की बलि भी दी जा सकती है।

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