भाजपा की हार, विपक्षियों की नइया पार
हाल ही में हुए चुनावों में जिस तरह भाजपा को हार का सामना करना पडा है उससे साफ तौर पर कहा जा सकता है कि अब जनता की नजरों में भाजपा की छवि धूमिल हो रही है। भले ही सोशल मीडिया पर भाजपाई और उनके समर्थक कहते फिर रहे हों कि शेर ने बडे शिकार पर झपट्टा मारने के लिए अपने दो कदम पीछे लिए हैं पर जो वास्तविकता है वह बदल नहीं सकती। हो सकता है कि भाजपा शेर हो पर भारत कोई जंगल नहीं हैं ।
भाजपा के वरिष्ठ पदों पर आसीन लोगों को यह समझना होगा कि जनता में उनका विश्वास अब कम हो रहा है ।अब कारण चाहे जो भी हो ,चाहे भाजपाईयों का अतिआत्मविश्वास हो या भाजपा नेताओं की बेवजह और गलत बयानबाजी ,हकीकत तो यह है मोदी जी ने कुछ समय पहले कुछ कडे फैसले लेकर जनता में जो विश्वास की अलख जगाई थी वह अब बुझती नजर आ रही है जिसका फायदा उठाने में विपक्षी टीम किसी तरह की कोताही नहीं बरतने वाली।
हालांकि इन चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और जो परिणाम आया उसमें नोटा का बडा हाथ है लेकिन लोग नोटा पर क्यों जा रहे हैं यह सोचने वाली बात है। क्या जो वोट नोटा पर गए वे भाजपा के थे ? और अगर ऐसा है तो आगे भी भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड सकता है क्योंकि जब मजबूत पार्टी के वोट व्यर्थ होते हैं तो कमजोर पार्टियां मजबूत होती हैं। कुछ सालों पहले जब सब पार्टियों से जनता ऊब चुकी थी तो मोदी लहर आई और जनता में अपना विश्वास बनाकर इतने सालों तक राज किया। कहा जाता है कि हर उत्थान का पतन होता है और हर पतन का उत्थान। आज यह सच्चाई अपने आपको साबित कर रही है। फिलहाल भाजपा के लिए अभी देर नहीं हुई है , अब भी जनता का काफी विश्वास उसमें है लेकिन भाजपा को भी सतर्क होना होगा और साथ ही साथ गलत और ऐसी बयानबाजी से बचना होगा जो जनता को पसन्द नहीं होती। भाजपा हमेशा से धर्म को मुख्य मुद्दा बनाकर चलती है और भगवान तथा धर्म पर बेवजह बयानबाजी उन्हें मुश्किल में डाल रही है।
यदि भाजपा जनता में अपनी पैठ फिर से बनाना चाहती है तो अब वह समय आ गया है जब भाजपा को अपने वे सारे वादे पूरे करने होंगे जिनके पूरा न होने से जनता नाराज है। चाहे राम मन्दिर निर्माण का मामला हो,पशुओं को खुला छोडकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने का मामला हो, बेरोजगारी दूर करने का वादा हो, महिलाओं की सुरक्षा हेतु किया गया वादा हो या फिर बढते हुए अपराधों को रोकने के लिए किया गया वादा हो ...सब पर अमल करने की जरुरत है।
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