लोकसभा चुनाव 2019: कौन बनेगा विजेता
लोकसभा चुनाव 2019 का माहौल गरम है।जब भी बाहर जाओ चौराहों पर , चाय की दुकानों पर बस एक ही चर्चा चल रही है.. लोकसभा चुनाव 2019। हर इंसान अपनी अपनी पार्टी की उपलब्धियों को गिनाता नजर आता है और दूसरी विपक्षी पार्टियों की आलोचना करता है। इन चर्चाओं को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि इस चुनाव में किसी एक पार्टी का दबदबा है। किसी भी पार्टी का इस बार बहुमत से सरकार बना पाना थोडा सा मुश्किल लग रहा है। हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी कुछ हद तक मजबूत नजर आती है लेकिन दूसरी पार्टियों के द्वारा जो महागठबंधन का दांव खेला गया है उससे भाजपा को बहुत बडा नुकसान होने की सम्भावना लग रही है। आइए जानते हैं कि इस बार चुनाव में विभिन्न पार्टियों की यथास्थिति क्या है...
सबसे पहले बात करते हैं सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी की। भाजपा फिलहाल अन्य पार्टियों से थोडी सी मजबूत नजर आ रही है जिसकी वजह है नरेंद्र मोदी और उनके द्वारा लिए गए कुछ कडे और सराहनीय फैसले जैसे नोटबन्दी,सर्जिकल स्ट्राइक, पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ के गए राजनीति और कूटनीतिक प्रयास, ग्रामीण स्तर पर जारी की गई कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं, स्वच्छता को लेकर सजगता और सबसे बडी जो बात है वह है जनता के साथ जमीनी स्तर पर जुड़े रहना, खुद को पीएम न समझकर जनता का सेवक या चौकीदार समझना। इन सब चीजों के बावजूद कुछ भाजपा की कुछ कमजोर कडियां भी हैं जो उसे उसे आम जनता से दूर करती हैं जैसे - लोकसभा चुनाव 2014 में किए गए कुछ वादे जिन्हें पूरा नहीं किया गया, राम मन्दिर मुद्दा,मसला 370, काला धन मुद्दा, 15 लाख रुपये का वादा, खुले पशुओं द्वारा किसानों की फसलों को पहुंचाया गया नुकसान (जो अब भी जारी है) और दलितों को लेकर की जाने वाली गलत टिप्पणियां..इत्यादि।
अब बात करते हैं कांग्रेस की जिसने काफी समय तक भारतीय राजनीति में अपना दबदबा कायम रखा और साठ साल से भी ज्यादा शासन किया है। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार कमजोर होती जा रही कांग्रेस का इस समय जो मजबूत पक्ष दिखाई पडता है वह प्रियंका गांधी। प्रियंका गांधी के पार्टी में शामिल होने से जहां कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में उत्साह जगा है वहीं कांग्रेस को फिर से सत्ता में एक उम्मीद थी नजर आई है।भाजपा में मोदी के आने से जो लहर आई थी उसी की उम्मीद कांग्रेस प्रियंका गांधी के आने से कर रही है अब ये अलग बात है कि प्रियंका गांधी सफल होती हैं या नहीं। आम जनता का प्रियंका गांधी मेंं इन्दिरा गांधी की छवि देखना कांग्रेस के लिए टानिक से कम नहीं नहीं है। जहां तक कमजोर कडी का सवाल है तो कांग्रेस में सबसे बडी समस्या है कडे फैसले न ले पाना,घोटाले और विवाद , एक कुशल नेतृत्व का न होना, 60 साल के शासन के बाद भी आम जनता के दिल में मोदी की तरह जगह न बना पाना। कांग्रेस के बडे नेताओं द्वारा जारी किए जाने वाले बेतुका बयान जनता को अक्सर नाराज ही करती रहती है।
अब बात करते हैं महागठबंधन की जिसमें सपा , बसपा व अन्य पार्टियां शामिल हैं। पिछले चुनावों को देखते हुए कहा जा सकता है कि महागठबंधन में शामिल पार्टियों के पास खोने के लिए कुछ नहीं है बल्कि पाने के लिए बहुत कुछ है क्योंकि इस समय ये अपने अस्तित्व की लडाई लड रहे हैं। अलग अलग रहकर भले ही ये पार्टियां कुछ नहीं कर सकती थीं लेकिन एकजुट होने के बाद ये बहुत बडा उलटफेर करने के लिए तैयार हैं।सपा जो पिछडों का प्रतिनिधित्व करती है और बसपा जो खुद को दलितों का प्रतिनिधि समझती है यूपी में काफी मजबूत है। एक उदाहरण के तौर पर यूपी में सपा और बसपा की बात करते हैं। पिछले चुनावों में भले ही इनकी सीटें न निकली हों लेकिन जो वोट पाने का परसेंटेज था वो काफी अच्छा था । अब जब दोनों एक साथ हैं तो यही वोट का परसेंटेज इनकी सीटें निकालने में काफी मददगार साबित होगा।
कुछ मिलाकर इस बार हम कह सकते हैं कि वर्तमान में भाजपा थोड़ी सी मजबूत नजर जरूर आती है फिर भी बहुमत की सरकार बनने में थोड़ी सी आशंका है लेकिन अभी भी चुनाव होने में समय है और इस बचे हुए समय में पार्टियां किस तरह से आम जनता के बीच पहुँचती है , इस पर काफी कुछ निर्भर करेगा। इस चुनाव में महागठबंधन का पर्फोर्मेंस कैसा रहता है यह बहुत महत्वपूर्ण होगा। जिस पार्टी की चुनाव प्रचार तकनीक और आम जनता से व्यवहार अच्छा होगा वही जनता के बीच विश्वास हासिल कर पाएगा। याद रखिए कि माहौल बदलने में देर नहीं लगती बस जरूरत होती है तो सिर्फ योजनाएं बनाने और कुशल नेतृत्व की।
नोट: यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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