भाजपा तलवार , कमजोर होती धार
एक सत्य बात है कि अगर किसी का उत्थान हुआ है तो उसका पतन निश्चित है और जिसका पतन हुआ है एक न एक दिन उसका उत्थान होना भी तय है। यह बात राजनीति में भी अक्सर लागू होती है।पिछले लगभग 45 से 48 सालों से भारत में कांग्रेस एक मुख्य शासक के रूप में जानी जाती थी । यह जनता का कांग्रेस में विश्वास की वजह से था या जनता के पास कांग्रेस के अलावा कोई अन्य बेहतर विकल्प न होने की वजह से था ,वो अलग बात है लेकिन पिछले कुछ सालों से भारतीय राजनीति में भाजपा ने जिस तरह अपनी पैठ बनाई वह काबिले तारीफ है। हम इस बात पर बहस नहीं करना चाहते कि यह सब कैसे हुआ पर इतना अवश्य है कि देश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी में अपना विश्वास जताया है और सत्ता पर बैठाया है।
एक और सत्य बात यह है कि बुलंदियों पर एक बार पहुँचना तो आसान होता है पर उस बुलन्दी पर टिके रहना या लोगों की आशाओं पर टिके रहना कतई आसान नहीं है। ठीक यही हुआ है कांग्रेस के साथ , शुरू से जनता ने उसे सर आँखों पर बैठाकर रखा पर समय के साथ लोगों की सोच ,आशाएं और मानसिकता बदलती रहती है और इन पर हमेशा खरा उतरना मुमकिन नहीं होता है। देश की जनता का भी कांग्रेस से विश्वास धीरे धीरे उठता रहा,जनता के पास कांग्रेस के अलावा अन्य बेहतर विकल्प बनें और जनता ने कांग्रेस को उखाड फेंका और आज ऐसा वक्त आ गया है कि कांग्रेस को अपना अस्तित्व तक बचाने को संघर्ष करना पड रहा है। आज आलम यह है कि जो जनता कांग्रेस के गांधी परिवार को सम्मान की दृष्टि से देखती थी ( हालांकि महापुरुषों को अब भी सम्मान की दृष्टि से ही देखा जाता है) वह राहुल गांधी और सोनिया गांधी का जमकर मजाक उडाती है।
पिछले कई मुख्य चुनावों में भाजपा ने कई राज्यों में अपना विजयी झण्डा गाडा है और उसकी इन चमत्कारिक सफलताओं ने समस्त विपक्षी दलों की नीदें उडा दी।लगभग सभी विपक्षी पार्टियों को लगने लगा कि अब भाजपा का सामना अकेले करना आसान नहीं है और इसीलिए सब अब एकजुट होते नजर आ रहे हैं।इस एकजुटता का उन्हें बखूबी फायदा भी मिला है क्योंकि पिछले कुछ उपचुनावों में जब जब विपक्षी दल साथ आया है भाजपा को हार का ही मुँह देखना पडा है। इन कुछ हारों ने भाजपा को चेतावनी दे दी है कि यदि आप जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में थोडे से भी चूकते हैं तो विपक्ष इसका फायदा उठाने की कला अच्छी तरह जानता है।वैसे भी भाजपा कितना भी विजय रथ पर सवार हो ,कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां के लोग इस पार्टी के शासन से खुश नहीं हैं जैसे कि (1) विद्यार्थी वर्ग - हमने बहुत से विद्यार्थियों से पूछा कि क्या भाजपा सरकार से आप लोग खुश हैं तो जवाब मिलता है कि 'नहीं ' । वजह लोग बताते हैं कि इस सरकार में वैकेन्सीज बहुत कम निकल रही हैं और जो वैकेन्सीज पहले से चालू हैं या तो वो कोर्ट में विचाराधीन हैं और उनका फैसला नहीं हो रहा, तो कुछ के विज्ञापन तो निकले हैं पर परीक्षा ही नहीं कराई जा रही है।
(2)किसान वर्ग - किसान किसी तरह अनाज तो पैदा कर लेता है लेकिन उसे उचित कीमत पर बेचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड रही है।समय पर नहरों में पानी आता है लेकिन जब जरूरत नहीं होती तो हमेशा पानी आता रहता है।अवसाद ग्रस्त होकर किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं ।
(3)अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग - अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को लगता है कि भाजपा सरकार उनकी विरोधी है और यह उन्हें मिलने वाली सुविधाओं और आरक्षण को खत्म करना चाहती है। भाजपा के तमाम नेता दलितों के घर जा जाकर भोजन करके उन्हें यकीन दिलाने की कोशिशें जरूर कर रहे हैं कि भाजपा उनकी हितैषी है लेकिन उनका विश्वास हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
इसके अलावा अन्य वर्ग भी ऐसे हैं जो भाजपा से खुश नहीं हैं और इन्हीं कमजोर कडियों को अपना हथियार बनाकर विपक्ष भाजपा का विजय रथ रोकने का प्रयास करता है और अब तक सफल भी रहा है। भाजपा यदि अपने विपक्षियों से हर हाल में पार पाना चाहती है और 2019 के चुनाव में अपना दबदबा कायम रखना चाहती है तो इन कमजोर कडियों को मजबूत करने पर अपना ध्यान केन्द्रित करना पडेगा।
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