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इक पत्थर से प्यार किया है

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दिल देकर हमने दर्द उधार लिया है खुदा समझकर इक पत्थर से प्यार किया है जिसकी खातिर हमने गँवा दी नीदें अपनी रातों की वो हरजाई कीमत क्या समझे मेरे जजबातों की उसने तो हरदम गैरों पे ही ऐतबार किया है वो तो अपनी दुनिया में ही मस्त है खुश है अपनो में उसको क्या दिलचस्पी होगी मेरे अधूरे सपनों में उसने मेरे दिल से बस धोखा हर बार किया है दिल की दरारें वो सिलने ना आएगा पता है हमको वो मिलने ना आएगा फिर भी दिल ने उसका इन्तजार किया है दिल देकर हमनें दर्द उधार लिया है खुदा समझकर इक पत्थर से प्यार किया है ### तेरी मोहब्बत मेरा वहम है, सच तो ये है तू बेरहम है मेरा ये दर्द और मेरा ये आँसू  ऐ बेवफा सब तेरा करम है तेरी अदायेँ हैँ एक धोखा  काश मैँ तेरा दिवाना न होता न होती नीँदेँ हराम मेरी  न तेरी याद मेँ  दिल ही रोता तेरे तसव्वुर मेँ रो रहा हूँ मैँ तनहा और तनहा हो रहा हूँ तेरी अदावत के आँसुओँ से मैँ अपनी पलकेँ भिगो रहा हूँ  ******* तेरे झूठे वादों मेँ तेरी बेवफाई झलकती है तेरे बेशरम इरादों से तेरी बेहयाई टपकती है तू समझती कि तू सबसे हसीँ है  तुझमे सब है बस वफा ...

मेरे बेकाबू जजबात

वैसे तो शराब पीकर भी मैं मदहोश नहीं रहता पर तुझे देखने के बाद मुझे होश नहीं रहता                          ***** ​इक आरजू है दिल मेँ बरसों से  कि तेरी जुल्फ को ओढूँ और रात हो जाये  इक जुस्तजू है दिल मेँ बरसों से  तेरा आँचल उडा दूँ और बरसात हो जाये  ये दीवानगी नहीँ मेरा इश्क है  कि तुझको छू लूँ और मन गुलाब हो जाये  ये गुजारिश नही मेरी ख्वाहिश है  कि तेरी नजर उठे और पानी शराब हो जाये ** तेरा चेहरा है या आफत है  तेरी अँगडाई, अँगडाई नहीँ कयामत है  तुझे हँसी आती है मेरी  दीवानगी पे किसी दिन मर मिटोगे तुम मेरी आशिकी पे  तु दूर रहती है तो जान जाने लगती है  मेरी तनहाई मुझपे मुस्कुराने लगती है  तेरी पायल तेरी चूडी तेरी बिन्दिया की चमक  मुझे सताती है दिन रात अब तू ही बता काबू मेँ करुँ  कैसे  ' बेकाबू जजबात, । ### कितना अच्छा कितना प्यारा आज सारा आलम है खुशियाँ भी हैं थोडी थोडी थोडा ...

भारत में चुनाव-30 दिन का लोकतंत्र

इस समय यूपी में चुनाव का माहौल गरम है। हर कोई नेता जनता की नजर में अपने आपको बेहतर साबित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में  नेता लोग एक एक करके जनता के बीच पहुँच रहे है ठीक उसी तरह जिस तरह बरसात के आते ही बरसाती मेढक बाहर आ जाते हैं और जैसे ही बरसात खतम हो जाती है सारे मेंढक कहाँ गायब हो जाते हैं पता ही नहीं चलता।आज आलम यह है कि जिस गली नेता जी के चमचे भी जाना पसन्द नहीं करते वहाँ भी बडे बडे नेता हाथ जोड के खडे हैं और जनता से उसकी तकलीफों के बारे में पूछ रहे है और आश्वासन दे रहे है कि हर गाँव हर इंसान की समस्या उनकी अपनी समस्या है जिसे चुनाव जीतने के तुरन्त बाद दूर कर दिया जाएगा।वा ह क्या नजारा होता है देखने लायक ...इसी 20 से 30 दिनों तक महसूस होता है कि  भारत में वास्तव में लोकतंत्र है, जनता मालिक है और नेता उसके सेवक।लेकिन बेचारी भोली भाली जनता को यह नही मालूम कि वह सिर्फ 20-30 दिनो के लिए ही राजा है और नेता उसके सेवक क्योंकि चुनाव परिणाम आने के बाद अगले 5 साल जनता से कोई पूछने तक नही आयेगा कि भाइयों बहनों आप सब कैसे हो, समस्या दूर करने की बात तो बहुत दूर की है। आज हर पार्...

राज़-ए-उल्फत

आँखों ही आँखों मे इक अफसाना बना देती है वो दीवानी हँसती है औऱ दीवाना बना देती है औरों को जरूरत होगी मयखाने मे जाके पीने की मेरे लिए वो आँखों से पैमाना बना देती है हर कोई खिंचा जाता है उसके जलवे ही कुछ ऐसे हैं वो शमा सी जलती है सबको परवाना बना देती है मैं समझ नहीं पाता हूँ कैसे हक मैं उसपे जताऊँ कभी अपना कहती है तो कभी बेगाना बना देती है आँखों ही आँखों मे इक अफसाना बना देती है वो दीवानी हँसती है औऱ दीवाना बना देती है **************************************** ये दिल हमारा जिसपे फिदा है वो इस जमाने में सबसे जुदा है बच न सका कोई दिल उससे ऐसी दिल को चुराने की उसमें अदा है अन्दाज भी है बहुत सीधा सादा निभाना भी आता है हर एक वादा दिल चीरते हैं अगर आँखों से तो नाजुक हैं वो फूलों से भी ज्यादा आँखों से नीदें चुराते हैं अक्सर सपनों में आकर सताते हैं अक्सर जब भी करें बात हम उनसे जालिम हँस के गिराते हैं बिजली सी दिल पर कैसे रहें हम बिना बात उनसे जाहिर करें कैसे जजबात उनसे करते बयाँ दिल की हर एक हसरत होती अगर इक मुलाकात उनसे कोई गज़ल है या कोई कहानी कोई अप्सरा है या परियों की रानी दिल करता है ...

हमारी बेटियाँ

हमारे भारतीय समाज में हमेशा से ही नारी को अपने आत्म सम्मान के लिए संघर्ष करना पडा है।प्राचीन काल से ही नारी को अबला ,असहाय और कमजोर समझा गया है और आज वर्तमान समय जो पहले से बहुत आगे बढ चुका है,में भी नारियों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।आज भारत में पढे लिखे शिक्षित लोगों के होने के बावजूद भी ऐसे लोगों की संख्या बहुत ही कम है जो अपनी बेटियों को अपने बेटों के बराबर समझते है। सच पूछिए तो आज भी लोगों के दिलो दिमाग में पुराने रूढिवादी सिद्धान्तों ने घर कर रखा है ।आज भी पढे लिखे लोगों का एक तबका ऐसा है जो समझता है कि बेटियाँ सिर्फ बोझ होती हैं और बेटे घर को रोशन करने वाले चिराग।इसीलिए पुत्र प्राप्त करने के लिए लिंग की जांच करवाई जाती है हालाँकि भारत सरकार इसकी बिल्कुल भी इजाजत नहीं देती फिर भी कुछ डाक्टर या विशेषज्ञ कुछ पैसे की लालच में लिंग जांच कर रहे हैं और रूढिवादी सोच रखने वाले लोगों से कोख में ही मासूम बच्चियों की हत्या करवा रहे हैं। हर साल न जाने कितनी मासूम जिन्दगियाँ सिर्फ इसलिए कोख में ही मार दी जाती हैं क्योंकि वो बेटियाँ होती हैं। आखिर कब बदलेगा हमारा समाज ? कब समझेगा कि बेटियां ...

खुश रहने के तरीके

हमेशा खुश रहना एक कला है  जो सबको नहीं आती और जिनको आती है वो कभी भी निराश या दुखी नहीं हो सकते।खुश रहने वाले इंसान के सामने कभी भी कोई भी समस्या टिक नहीं पाती क्योंकि खुश रहने वाले इंसान का दिमाग हमेशा शान्त और ठण्डा रहता है जिसकी वजह से वह एक टेंशन और गुस्से में रहने वाले इंसान से कहीं जल्दी और सही फैसले लेने में सक्षम होता है । जाहिर सी बात है कि अगर इंसान सही फैसले लेता है तो जिन्दगी बहुत आसान सी लगने लगती है।खुशमिजाज इंसान की अपने आस पडोस , रिश्तेदारों और दोस्तों से घुलमिल कर रहने की वजह से कभी भी बुराई नहीं होती। कुछ लोग कहते है कि खुश रहना कौन सी बडी बात है खुश तो कोई भी रह सकता है बस खुश रहने की वजह होनी चाहिए।अजी, मैं कहता हूँ कि अगर खुश होने की वजह हो फिर तो कोई भी खुश हो जाता है मगर बडी बात तो तब है जब आदमी खुशी न होते हुए भी खुशी ढूंढ ले या खुश होने का बहाना ढूंढ ले।ऐसे इंसान बहुत कम ही देखने को मिलते हैं जो कभी भी हालात से समझौता नहीं करते बल्कि हर हालात का खुश रह कर सामना करते हैं। क्या आप जानते हैं कि आप 24 घण्टों में कितनी देर खुश और कितनी देर नाराज या गुस्सा रहत...

मुलाकात

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उनसे कैसे कब पहली मुलाकात हुई याद आया सब जब पहली बरसात हुई वादा किया था उसने मिलने का मुझसे आये नहीं अब तक जाने क्या बात हुई देख के उनकी प्यारी हँसी सूरज निकला काली जुल्फ खु...