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भरोसा मत तोडिये

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  प्यार का रिश्ता दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। जब हम किसी को प्यार करते हैं तो इसका मतलब होता है कि हम उस पर भरोसा करते हैं। समय के साथ साथ यह विश्वास इतना ज्यादा बढ जाता है कि अगर इस भरोसे या विश्वास पर तनिक भी आँच लग जाए तो हमें बहुत तकलीफ होती है । दोस्तों किसी की जिन्दगी में हमेशा प्यार ही प्यार हो यह भी मुमकिन नहीं है और होना भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे जिन्दगी में बोरियत भी महसूस होने लगती है। इसलिए मोहब्बत में छोटी मोटी टकरार या रूठने मनाने का सिलसिला चलता रहना चाहिए इससे एक तरफ प्यार में गहराई आती है तो दूसरी तरफ प्यार की एहमियत भी पता चलती है। चाहे पति पत्नी का रिश्ता हो लवर्स का , एक दूसरे पर भरोसा या यकीन अहम रोल अदा करता है।टकरार कितनी भी होती रहे कोशिश यह करनी चाहिए कि इस टकराव में आपसी विश्वास पर कोई आँच न आए। याद रखिए दुनिया में हर गलती माफ की जा सकती है पर आपका साथी आप पर शक करने लगे तो आपके लिए अपना रिश्ता बचा पाना आसान नहीं होगा। एक छोटी सी सच्ची कहानी आपको बताते हैं। एक कपल (पति पत्नी) रहता था दोनों एक दूसरे को बेहद प्यार करते थे और एक दूसरे पर विश्वास...

NEET परीक्षा केन्द्रों की सूची जारी

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  NEET परीक्षा स्थगित करने के सम्बंध में दायर की गई सारी याचिकाओं के खारिज होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा कराने का फैसला किया है। NTA ने NEET   परीक्षा हेतु  परीक्षा केन्द्रों की सूची जारी कर दी है जिसे अभ्यर्थियों आधिकारिक वेबसाइट www.ntaneet.nic.in   पर  जाकर देख सकते हैं। परीक्षा 13 सितंबर 2020 को   निर्धारित है। चूंकि यह समय कोरोना व लाकडाऊन  का खतरनाक समय है और परीक्षा केन्द्र दूर होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को आवागमन और ठहरने आदि की व्यवस्था भी करनी है शायद इसीलिए परीक्षा केंद्र देखने का लिंक इतनी जल्दी खोल दिया गया है। आपको बता दें कि पिछले दिनों बी.एड.की एन्ट्रेंस परीक्षा और बीईओ की प्रतियोगी परीक्षा सम्पन्न हुई है और इन परीक्षाओं में कोरोना के लिहाज से जो सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए थी वह हो नहीं पाई थी और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उडते देखा गया था । इसीलिए छात्र और अभिभावक चाहते थे कि आने वाले कुछ समय तक जब तक कोरोना की दवा नहीं बन जाती सरकार कोई भी परीक्षा न कराए। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई थी म...

शीतपित्त (Urticaria) की समस्या

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शीतपित्त या अर्टिकेरिया एक ऐसी बीमारी है जो अक्सर बारिश के दिनों में या सर्दी के मौसम में ज्यादा परेशानी पैदा करती है। यह एक तरह की एलर्जी है जिसमें हाथों पैरों या फिर पूरे शरीर पर चकत्ते पड जाते है यानि त्वचा उभरने लगती है।  त्वचा पर यह उभार जितना ऊपर होता उतना ही त्वचा के नीचे भी बढता जाता है। अक्सर इसके साथ साथ त्वचा में खुजली भी होती है लेकिन कभी खुजली नहीं भी होती है सिर्फ चकत्ते पड जाते हैं और उसमें हल्दी हल्की सूई की चुभन जैसा कुछ महसूस होता है। शुरू में तो यह ज्यादा परेशानी पैदा नहीं करता लेकिन जैसे जैसे यह बढता जाता है इंसान की खुजली और दर्द बढता जाता है । अगर सही समय पर इसका इलाज न हो धीरे धीरे यह पूरे शरीर पर फैल जाता है और अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत आ जाती है। कभी कभी तो यह इतना बढ जाता है कि इंसान की मौत तक हो जाती है।  अक्सर देखा गया है कि शीतपित्त में ऐलोपैथिक एंटीबायोटिक दवाएं तुरन्त राहत तो दे देती हैं लेकिन दवा का असर खत्म होते ही एलर्जी वापस आ जाती है इसलिए यदि आप इसका स्थाई उपचार चाहते हैं तो आयुर्वेद या होम्यो...

ये हैं TIKTOK के बेहतर विकल्प

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Tiktok और  Likee  जैसे एप्लिकेशन के बन्द होने के बाद इंडियन वीडियो मेकर्स काफी उदास नजर आ रहे हैं।  उनके पास कुछ इंडियन शार्ट वीडियो मेकिंग एप्लीकेशन के आप्सन मौजूद तो हैं लेकिन उनमें किसी का कुछ खास मन नहीं लग रहा है। वजह यह है इंडियन एप्लिकेशन अभी पूरी तरह से शायद इतने तैयार नहीं है कि टिकटाक या फिर लाइकी की कमी को पूरा कर सकें। कुछ एप्लिकेशन में व्यूज नहीं आ रहे तो कुछ में जरूरी फीचर्स की कमी है, कुछ में वीडियो एडिटिंग के पर्याप्त आप्सन या फिल्टर्स  नहीं है तो कुछ एप्लिकेशन में अन्य समस्याएं हैं जिनमें अभी सुधार की जरूरत है।   टिकटाक बन्द होने से खासकर वे यूजर्स परेशान हैं जो टाप पर थे और फेमस थे क्योंकि टिकटाक अब उनके लिए कमाई का एक जरिया बन गया था और एड करके या कंटेंट प्रमोशन के द्वारा  लाखों करोड़ों कमा भी रहे थे। अब ऐसे स्टार्स जब किसी नए  इंडियन एप या प्लेटफार्म पर जाएंगे तो जाहिर सी बात है इन्हें भी शून्य से शुरुआत करनी होगी जो काफी इंट्रेस्टिंग होगा। टिकटाक पर जहां इन स्टार्स को बिना मांगे फालोअर्स लाइक और व्यूज मिल रह...

कोरोना के कारण मानसिक दबाव बढने मत दो

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भारत सहित पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझ रही है। जो संक्रमित हैं वो तो हैं ही साथ ही साथ जो व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ हैं वे भी एक मानसिक दबाव झेल रहे हैं। जैसे ही कहीं सुनाई देता है फला जगह पर एक कोरोना पोजिटिव व्यक्ति मिला है अचानक धडकने बढ जाती हैं कि हाय अब क्या होगा यह वायरस तो थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक अजीब सा डर मन में घर कर गया है कि कहीं यह वायरस हमारे मोहल्ले गाँव या घर तक न आ जाए। कुल मिलाकर कहा जाए तो लोग कोरोना के भय में मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। इसके बाद जो तरह तरह की गलत अफवाहें फैल रही हैं उससे मन और भी बेचैन हो उठता है। थोडी सी भी सामान्य खाँसी या जुखाम बुखार हो गया तो बस फिक्र सताने लगी कि कहीं ये वो तो नहीं.. ऐसे में क्या किया जाए जाए कि लोग इस तरह के मानसिक  दबाव से बाहर आ सकें । इसके लिए हम आपको कुछ बातें बता रहे हैं जिनको अमल में लाकर आप अपने आपको मानसिक रूप से दृढ़ रख सकेंगे- 👍 सबसे पहले तो यदि आपके मन में किसी तरह की नकारात्मक सोच ने घर बना रखा है तो सकारात्मक में बदलिए। जैसे कि कुछ लोग बोलते हैं कि कोरोना जिसको हुआ उसकी म...

आओ दिए जलाएं

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आपको याद तो है न आज 5 अप्रैल है और आज रात 9 बजे लगातार 9 मिनट तक आपको दीपक जलाकर रखना है। दीपक किसी भी तरह का हो सकता है तेल का ,मोमबत्ती का ,टार्च या मोबाइल फ्लैश का। टार्च मा मोबाइल फ्लैश का आप्शन इसलिए है क्योंकि बहुत लोगों के पास मोमबत्ती आदि नहीं होगी तो बाजार में भीड लगाने नहीं जाना है बस मोबाइल या टार्च जलाकर देश की इस एकजुटता में शामिल हो जाना है बस। बहुत लोगों का सवाल है कि इससे आखिर होगा क्या ? वैसे साधारण तौर पर तो इससे फायदे बहुत हैं लेकिन कोरोना में इसका फायदा क्या होगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा। पहला फायदा यह है कि मोमबत्ती का मोम और तेल वाले दिए का तेल जब जलता है तो वातावरण में एक शुद्धता का अनुभव होता है और छोटे मोटे कई जीवाणु इस शुद्धता की वजह से स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं या फिर कमजोर हो जाते हैं । ये तो था वैज्ञानिक कारण अब बात करते हैं सामाजिक कारण की। हमारे प्रधानमंत्री जी ने एक साथ दिए जलाने को इसलिए भी कहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लाकडाउन की वजह से लोग घरों से बाहर नहीं जा पा रहे हैं जिससे उनमें चिडचिडापन , प्रशासन के प्रति रोष और आपसी बिखराव सा मह...

घर पर रहिए: स्वस्थ रहिए

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पूरी दुनिया इस समय कोरोना के काल से ग्रसित है। हर एक देश इसके इलाज की खोज के लिए प्रयासरत है लेकिन कोई सफलता फिलहाल तो दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सिर्फ एक ही विकल्प बचता है दुनिया भर के सामने कि जब तक इसका इलाज नहीं मिल जाता , बचाव किया जाए और उसके लिए कई देशों ने लाकडाउन का सहारा लिया है जिससे लोग आपस में एक दूसरे से थोडी दूरी बनाए रखें और इस वायरस को फैलने का कम से कम मौका मिले। हमारे भारत में भी इस समय 14 अप्रैल 2020 तक लाकडाउन है। हाँ इससे लोगों को थोडी सी परेशानियों का सामना जरूर करना पड रहा है लेकिन एक बेहतर भविष्य के लिए इतनी परेशानी उठाने में किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।  लाकडाउन के समय सब कुछ भारत में ठीक ठाक चल ही रहा था और वायरस की रफ्तार भी कम हो रही थी लेकिन तभी 27-30 मार्च के बीच जो पलायन की प्रक्रिया शुरू हुई , और लोग बसें ट्रेनों के बन्द होने के कारण पैदल ही रोड पर निकल गए और बेवजह भीड बनाई , इस सारी प्रक्रिया में वायरस को एक बार फिर पनपने और अपनी रफ्तार बढाने का मौका मिला है। जिस तरह से लोग एक साथ गाँव की तरफ भागे वास्तव में इस घटना ने सरकार...