आधुनिक समाज में गांधी जी के विचार
हम भले ही कितने भी आधुनिक हो जाएं लेकिन हमें जीने के लिए एक समाज की जरूरत पडेगी और उस में समाज प्रेम, सौहार्द और भाईचारा बना रहे इसके लिए समाज के लोगों को कुछ सिद्धांतों और नियमों को अपनाना पडेगा जो विभिन्न दार्शनिकों ,समाज सेवकों और बुद्धिजीवियों के द्वारा समय समय पर दिए गए हैं। महात्मा गांधी भी उन महानायकों में से एक हैं जिन्होंने अपने नियमों और सिद्धांतों से समाज को एक सही दिशा प्रदान करने का प्रयास किया है। वर्तमान समय में हमें उनके इन सिद्धांतों की कितनी आवश्यकता है यह आप तभी जान सकते हैं जब आप महात्मा गांधी जी के बारे में पढेंगे और उनके सिद्धांतों का विश्लेषण करेंगे। आइए हम आपको उनके जीवन और पांच महत्वपूर्ण सिद्धांतों से अवगत कराते हैं जो हो सकता है आपके जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव की शुरूआत कर दें -
अहिंसा हमारी ताकत है : आज आप देख सकते हैं कि विभिन्न देश हथियारों की खरीद फरोख्त और खतरनाक से खतरनाक मिसाइल और बम बनाने तथा उनका परीक्षण करने में जुटे हैं। क्या आपको लगता है यह विश्व के लिए अच्छा संकेत है ? जी बिल्कुल नहीं ! युद्ध कभी भी किसी के लिए अच्छा साबित हो ही नहीं सकता है यह सिर्फ विनाशकारी होता है। एक देश को हथियार बनाते देख पडोसी देश असहज महसूस करने लगते हैं और शायद यह असहजता ही उन्हें भी हथियार बनाने हेतु प्रेरित करती है। यही बातें हमपे और हमारे समाज पर भी लागू होती हैं। यहाँ पर महात्मा गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांत की सार्थकता समझ में आती है और समझ में आता है अहिंसा का सिद्धांत हमारे समाज, देश और विश्व को स्वस्थ और जीवित रखने के लिए कितना आवश्यक है।
सत्य हमेशा अच्छा होता है। एक कहावत आपने सुनी होगी कि सच कडवा होता है लेकिन यह भी सत्य है कि सत्य उन्हीं को कडवा लगता है जो झूठ के पक्षधर होते हैं। एक इंसान जो कभी झूठ नहीं बोलता या कम बोलता है वह हर मामले में एक झूठ बोलने वाले व्यक्ति से बेहतर ही साबित होगा चाहे बात बच्चों को संस्कार देने की हो या समाज या देश का नेतृत्व करने की हो। झूठ बोलकर आदमी सिर्फ एक बार इज्ज़त पा सकता है लेकिन सच बोलने वाले का हर जगह हर समय सम्मान होता है। इसलिए सत्य बोलने की आदत डालिए यह आदत आपके जीवन की बहुत सारी समस्याएं अपने आप सुलझा जाएगी।
एक गाल पर कोई चाटा मारे तो दूसरा आगे कर दो । महात्मा गांधी जी का यह एक ऐसा सिद्धांत है जो हमें सिखाता कि झुकना भी समस्याओं का हल होता है। इस सिद्धांत के सही अर्थ को जिसने समझ लिया समझ लो उसने जीवन के एक गूढ़ रहस्य को समझ लिया है। इस सिद्धांत का सीधा सीधा संबंध हमारी आपकी सहनशीलता से है और आप जानते हैं कि हमारी सहनशक्ति ही हमारी वो ताकत है जो जटिल से जटिल परिस्थितियों में भी हमें मजबूत बनाए रखती है। एक गाल पर कोई चाटा मारे तो दूसरा आगे कर दो का मतलब है कि आपको अपने अन्दर क्षमा करने का गुण विकसित करने की जरूरत है।
स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत का महत्व पहले आपको भले ही पता न रहा हो लेकिन कोरोना संकट की अवधि में इसका मतलब लगभग हर इंसान को समझ में आ गया होगा। महात्मा गांधी जी ने स्वदेशी चीजों के उत्पादन और स्वदेशी उद्योगों को वरीयता देने की बात शायद इसीलिए कही थी कि अगर भविष्य में किसी कारण बाहरी आयात बन्द होता है तो हमारे जीवन यापन की आवश्यक वस्तुएं हमें आसानी से मिल सके। यह आत्मनिर्भरता ही कोरोना काल में विभिन्न देशों की सहायक बनी हुई है।
खुद पर विश्वास होना जरूरी है। आपके पास लाखों करोडों के साधन संसाधन मौजूद हों लेकिन यदि आपको अपने ऊपर विश्वास नहीं है तो आप कुछ भी नहीं कर सकते हैं। हमने अक्सर देखा है ज्यादातर लोग सिर्फ इसीलिए कोई बडा काम शुरू तक नहीं कर पाते कि उन्हें डर सताता रहता है कि वे इस काम को पूरा कर पाएंगे या नहीं। उन्हें खुद पर यकीन ही नहीं है वे सफलता से असफलता के बारे सोच सोच कर अपने आपको अन्दर से कमजोर करते चले जाते हैं। इसलिए परिस्थितियाँ कैसी भी हो, काम कैसा भी हो अपने ऊपर से विश्वास टूटने मत दीजिए क्योंकि ठोकरें उसी के पैरों में लगती हैं जो रास्तों पर निकलते हैं।
महात्मा गांधी जी के ऐसे बहुत सारे विचार हैं हैं जो आधुनिक समाज और इंसान के लिए बेहद उपयोगी हैं जिन्हें अपनाकर हम अपने समाज को स्वस्थ और सुन्दर बना सकते हैं।

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