सोनभद्र में नरसंहार
उत्तर प्रदेश में दिनों दिन कानून व्यवस्था गडबड होती जा रही है। ऐसा लगता है हमारा कानून विकलांग सा हो गया है और बदमाशों तथा दबंगों का खौफ जनता के सर चढ कर बोल रहा है। सोनभद्र जिले में अभी एक ऐसी घटना घटी है जिसके बारे में सोचकर भी दिल दहल जाता है। जमीन के विवाद में दबंगों के द्वारा लोगों पर ताबडतोड गोलियां बरसाईं गई जिसमें एक ही गांव के दस लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए हैं।सोनभद्र में हुई घटना बेहद दर्दनाक और बिचलित करने वाली है। आखिर ऐसा क्यों हुआ और कैसे हुआ, इस पर भी राजनीति चालू हो गई है। वर्तमान में सत्ता पर आसीन भाजपा के माननीय मुख्यमंत्री ने इस घटना का जिम्मेदार कांग्रेस को मान रहे हैं जबकि इस समय उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था उन्हीं के हाथों में है।
ऐसा तो हो नहीं सकता कि यह घटना अचानक से घटित हुई होगी। जमीन पर कब्जे को लेकर घटना से पहले भी आपसी मनमुटाव या झगडे हुए होंगे और हमारे कानून तक यह बात पहुंची भी होगी । आखिर क्यों मामले को समय रहते सुलझाया नहीं गया ? आखिर क्यों इतना बडा हादसा होने तक इन्तजार किया गया ? कुछ लोग कहते हैं कि अब उत्तर प्रदेश में गुंडाराज है .. अब तो धीरे धीरे यकीन सा होने लगा है। इससे पहले भी प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जो जिसमें दिन दहाड़े लोग बदमाशों का शिकार बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बदमाशों की बढती ताकत और अत्याचार को देखते हुए अब तो संदेह होता है कि कहीं खाकी भी इन बदमाशों से डरने तो नहीं लगी। अगर ऐसा है तो समझ लीजिए कि हमारे प्रदेश पर खतरे ही खतरे मंडरा रहे हैं ।
जरा सोचकर देखिए कि जिस गांव के दस लोग एक ही दिन दफन हुए होंगे उस गांव में कैसा मातम छाया होगा। भले ही मुख्यमंत्री जी द्वारा दिवंगतों के परिवार को पांच पांच लाख मुवावजा दिये जाने की घोषणा हुई है लेकिन अब अगर दस लोगों की कुर्बानी के बाद भी उस जमीन पर हत्यारे दबंगों का कब्जा हुआ तो धिक्कार है हमारे कानून और कानून व्यवस्था पर। हमारी , सरकार और प्रदेश के कानून के अधिकारियों से गुजारिश है कि एक दूसरे पर आरोप मढने की बजाय इस समय इन बढते हुए अपराधों पर लगाम लगाने की जरूरत है और लगाम लगाई जाए। कानून व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है। पुलिस को अपराधियों के आगे चलने की जरूरत है न कि पीछे पीछे।

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