दो दिलों के बीच तीसरे के लिए कोई जगह नहीं
इस दुनिया में रिश्ते बनाना जितना आसान है उतना ही मुश्किल होता है उन्हें निभाना। खासकर ऐसे रिश्ते जिसमें भरोसे और विश्वास की बहुत ज्यादा जरूरत होती है उनमें दरारें पैदा होने की सम्भावना ज्यादा रहती है। चाहे वो रिश्ता पति पत्नी का हो या फिर प्रेमी और प्रेमिका का। प्रेम के रिश्ते का आधार ही विश्वास होता है। दो प्रेमियों के बीच में से यदि भरोसे या विश्वास को हटा दिया जाए तो उनके बीच प्रेम या समर्पण नाम की कोई चीज नहीं मिलेगी.. मिलेगी तो सिर्फ हर रोज एक नई लडाई, झगडा और आपसी मनमुटाव जो दीमक की तरह धीरे धीरे उनके बीच के रिश्ते को खत्म कर देगा।
अक्सर हम देखते हैं कि दो प्रेमियों में लडाई की वजह उनके बीच में आया हुआ कोई तीसरा इंसान होता है । जब दो लोग सालों से एक दूसरे से बात कर रहे हैं और अचानक प्रेमी या प्रेमिका अपने किसी मित्र या रिश्तेदार से बातचीत करने लगता है (चाहे उसका इरादा या नेक ही क्यों न हो) तो उसके पार्टनर को ऐसा लगता है कि वह अब उससे दूर जा रहा है। ऐसे में वह उसे रोकता है कि वहां बात न करो, इससे बात न करो ,उससे बात न करो। यदि उसकी बात मान जाता है फिर तो सब ठीक हो जाता है और यदि नहीं मानता तो यहीं से शुरू हो जाता है रिश्तों के बीच में शक का सिलसिला जो यदि एक बार शुरू हो गया तो जल्दी रुकने का नाम नहीं लेता।
कभी कभी तो कुछ रिश्ते सिर्फ गलतफहमी की वजह से टूट जाते हैं । जब प्रेमी या प्रेमिका को लगता है कि उसका हमसफर उससे ज्यादा किसी और को तवज्जो दे रहा है जबकि ऐसा कुछ होता नहीं है तो भी रिश्ते टूटने की कगार पर आ जाते हैं। ऐसी गलतफहमियों की स्थिति में क्या करना चाहिए जिससे आप अपने रिश्ते को बचा सकें। ऐसे में सबसे पहले तो ये होना चाहिए कि जितनी जल्दी हो सके उस गलतफहमी को दूर कीजिए जो आपके पार्टनर के मन में है। जो भी बात कीजिए उसमें किसी तरह का संदेह मत रखिए बल्कि अपनी बात साफ और सही तरीक़े से रखिए जिससे कि आपका पार्टनर आसानी से समझ सके। अगर आपका पार्टनर आप पर कुछ भी इल्जाम लगाता है तो उस पर चीखने चिल्लाने के बजाय ठण्डे दिमाग से काम लीजिए उसकी पूरी बात सुनिए उसके बाद एक एक करके बडे प्रेम से उनकी हर बात का जवाब दीजिए।ये मत सोचिए कि उसने आप पर इल्जाम कैसे लगाया ..वो मेरे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकता/सकती है बगैरह.. बगैरह। ये रिश्ता ही ऐसा है जिसमें आपको इस तरह की परिस्थितियों से गुजरना ही होगा।
कोशिश हमेशा यह रहनी चाहिए कि दो दिलों के बीच में किसी तीसरे शख्स की दखलंदाजी ही न हो। हम यह नहीं कहते कि प्रेमी प्रेमिका के रिश्ते को छोड़कर आप हर रिश्ते का त्याग कर दें। समाज में रहना है तो समाज में रहने वाले हर दोस्त, रिश्तेदार, पडोसियों से सामंजस्य बनाकर चलना ही पडेगा लेकिन ये सामंजस्य ऐसा न हो कि आपके व्यक्तिगत रिश्ते पर असर डालने लगे। एक सच्चा प्रेम एक सच्चा समर्पण होता है । अपने जीवनसाथी पर विश्वास करना और उसके विश्वास को बनाए रखना ही प्रेम है । जब दो चाहने वाले एक दूसरे पर भरोसा करने के साथ साथ एक दूसरे का विश्वास बनाए रखने के लिए भी प्रयास करेंगे तो रिश्तों में कभी दरारें नहीं आएंगी और न ही किसी तीसरे इंसान की दखलंदाजी से आपके रिश्ते पर कोई फर्क ही पडेगा।

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