दिल तोडिये पर चूर मत कीजिए

प्यार का रिश्ता दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। जब हम किसी को प्यार करते हैं तो इसका मतलब होता है कि हम उस पर भरोसा करते हैं। समय के साथ साथ यह विश्वास इतना ज्यादा बढ जाता है कि अगर इस भरोसे या विश्वास पर तनिक भी आँच लग जाए तो हमें बहुत तकलीफ होती है । दोस्तों किसी की जिन्दगी में हमेशा प्यार ही प्यार हो यह भी मुमकिन नहीं है और होना भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे जिन्दगी में बोरियत भी महसूस होने लगती है। इसलिए मोहब्बत में छोटी मोटी टकरार या रूठने मनाने का सिलसिला चलता रहना चाहिए इससे एक तरफ प्यार में गहराई आती है तो दूसरी तरफ प्यार की एहमियत भी पता चलती है।


चाहे पति पत्नी का रिश्ता हो लवर्स का , एक दूसरे पर भरोसा या यकीन अहम रोल अदा करता है।टकरार कितनी भी होती रहे कोशिश यह करनी चाहिए कि इस टकराव में आपसी विश्वास पर कोई आँच न आए। याद रखिए दुनिया में हर गलती माफ की जा सकती है पर आपका साथी आप पर शक करने लगे तो आपके लिए अपना रिश्ता बचा पाना आसान नहीं होगा। एक छोटी सी सच्ची कहानी आपको बताते हैं। एक कपल (पति पत्नी) रहता था दोनों एक दूसरे को बेहद प्यार करते थे और एक दूसरे पर विश्वास करते थे।एक बार पत्नी के फोन पे उसके किसी दूर के रिश्तेदार का फोन आया और उसने बात की। इसके बाद आए दिन उस रिश्तेदार का फोन आने लगा और पत्नी अक्सर बातें करने लगी। कई दिन देखने के बाद जब पति ने पत्नी से पूछा कि वो कौन है और क्यों उससे इतना बात करती हो तो वो बोली कि वो मेरा दूर का रिश्तेदार है और मुझे बहन मानता है। पति ने कहा चलो ठीक है पर इतनी बात मत किया करो जमाना बहुत खराब है।

अब ये तो पति का भरोसा था जो उसने अपनी पत्नी पर दिखाया और उस पर ज्यादा नाराज न हुआ लेकिन पत्नी को इतनी बात से सबक ले लेना चाहिए कि पति ने उसे टोका है तो सम्भल जाना चाहिए।  पत्नी ने पति की बात को सीरियस नहीं लिया और वह उस रिश्तेदार से बातें करती रही और उस रिश्तेदार का फोन भी जरूरत से ज्यादा आने लगा। पति को यह बात अक्सर अखरती पर कुछ न बोलता ।एक दिन उससे बर्दाश्त न हुआ और उसने कह दिया कि तुम अब उस रिश्तेदार से बात नहीं करोगी मुझे अच्छा नहीं लगता। आखिर वो भाई है तुम्हारा तो इतना ज्यादा कौन सी बात होती है तुम्हारी और मेरे सामने क्यों नहीं करती हो बात ? वो बोली कि वो आपके सामने बात नहीं करना चाहता। इतना सुनकर तो पति को और गुस्सा आया और बोला देखो मुझे ये सब पसंद नहीं मेरे विश्वास की भी एक सीमा है इससे पहले पहले कि मैं कुछ और सोचू तुम उससे बात करना छोड दो। पत्नी ने मौके की नजाकत को समझते हुए कहा चलो ठीक है बाबा अब नहीं करूँगी। 
पति मुस्कुराया और अपने काम पे चला गया। शाम को उसने फोन लगाया तो फिर से पत्नी का नंबर विजी जाने लगा और जब पूछा तो पता चला कि वो उसी मुँहबोले भाई से बात कर रही है। पति को को गुस्सा आया और उसने कहा कि तुम मानती क्यों नहीं हो आखिर क्या बात करती हो उससे इतनी देर तक ।पत्नी ने कहा देखो मुझे गलत न समझो मैं उससे कोई गलत बात नहीं करती मैं उसे भाई मानती हूँ। पति ने फोन काट दिया। ऐसा कई दिन हुआ पति अक्सर परेशान रहने लगा लेकिन पत्नी पर कोई फर्क नहीं पडता। लाख मना करने के बाद भी जब पत्नी नहीं मानी तो अन्त में पति ने कह दिया कि अब हम साथ साथ नहीं रह सकते। पत्नी को बुरा लग गया कि उसके पति ने  उसपे शक कैसे किया। पत्नी ने भी ताव में आकर कह दिया कि जाओ मत रहो मेरे साथ अगर तुम्हें मुझ पर इतना ही शक है तो। 
अब दोनों अलग हो गए हैं। वो रिश्तेदार जो पत्नी से बात करता था उसने भी कुछ दिन बाद शादी कर ली और इससे बात करना छोड दिया।अब पति भी अकेला और पत्नी भी। एक अच्छे खासे प्यार के रिश्ते का अन्त हो गया। इसमें आखिर गलती किसकी है पति की ,पत्नी की या उस दूर के रिश्तेदार की जो जरूरत से ज्यादा इन लोगों के रिश्ते में दखलंदाजी कर गया।
हम समझते हैं कि इसमें सारी गलती पत्नी की है। लोगों का क्या है वो तो दूसरों के रिश्तों में जहर घोलने के लिए हमेशा आतुर रहते हैं। अब ये आपका का काम है कि आप अपना रिश्ता कैसे बचा कर रख सकते हैं। पति ने अपना पूरा विश्वास दिखाया और वक्त भी दिया लेकिन पत्नी ने उसके विश्वास का नाजायज फायदा उठाया और पति के मना करने के बावजूद उस इंसान से बात करती रही जो उसके रिश्ते की बर्बादी का जिम्मेदार बना। हम यह नहीं कह रहे कि पत्नी का उसके उसके उस दूर के रिश्तेदार से कोई नाजायज सम्बन्ध रहा होगा ,हो सकता है कि वो उसे भाई ही समझती हो पर पति के जजबातों को नजरअंदाज करना कत्तई उचित नहीं था।  दोस्तों आपको समझने की जरूरत है कि आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी क्या है आप उसी को चुनिए । इस कहानी में भले ही पत्नी सही रही हो या उसका रिश्तेदार सही रहा हो पर पति पत्नी के बीच का आपसी भरोसा दिनों दिन कमजोर होता रहा और एक दिन इतना कमजोर हो गया कि टूट ही गया।


याद रखिए प्यार में आपकी एक गलती से आपके चाहने वाले के दिल के दो टुकड़े होते हैं , दूसरी गलती से चार टुकड़े और बार बार की गलती दिल के ये टुकड़े चूर हो जाते हैं जिनको जोडना मुमकिन नहीं हो पाता। इस कहानी में भी यदि पत्नी एक दो बार गलती करके सम्भल जाती तो शायद वह अपने पति के टूटे दिल को भी जोड सकती थी पर उसने बार बार एक ही गलती दोहराकर अपने पति के विश्वास के इतने टुकड़े कर दिए जिसे जोडना अब शायद ही मुमकिन हो। इसलिए यदि आप अपने रिश्ते को लेकर सजग हैं तो कोशिश कीजिए कि अगर आपसे गलती हो जाए तो सुधारने का प्रयास कीजिए न कि उसे छुपाने के लिए एक नई गलती कर दीजिए।

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