69000 शिक्षक भर्ती: धांधली और कट आफ को लेकर आक्रोश

69000 शिक्षक भर्ती में एक नया मोड आ गया है।कल तक जहाँ सरकार और विभाग जिद पर अडे थे कि इस बार शिक्षक भर्ती में किसी तरह का कट आफ लागू नहीं किया जाएगा जिसकी वजह से शिक्षामित्रों को छोडकर अन्य अभ्यर्थियों में काफी आक्रोश था और वे इस भर्ती में कट आफ निर्धारित करने के लिए पढाई लिखाई छोडकर कोर्ट तक जा पहुंचे लेकिन किसी की भी नहीं सुनी गई। फिर 6 जनवरी को शिक्षक भर्ती की परीक्षा आयोजित की गई जिसमें बहुत से परीक्षा केन्द्रों पर पेपर आउट होने की खबर चर्चा में रही।एसटीएफ ने कुछ लोगों को सभी 150 प्रश्नों की उत्तर कुंजी के साथ गिरफ्तार भी किया।बस फिर क्या था यह खबर अखबारों, टी.वी. न्यूज और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और अभ्यर्थी परीक्षा को निरस्त कराने हेतु सडकों पर उतर आए और पीएनपी इलाहाबाद में इकट्ठा होकर खूब हंगामा किया।

हंगामे को बढता देख अधिकारी और सरकार शायद बौखला गई और अगले दिन एक ऐसी कट आफ जारी कर दी जो कि किसी ने सोचा भी नहीं था। आदेश हुआ कि जनरल कटेगरी के जो अभ्यर्थी 65% और रिजर्व कटेगरी के 60% लेकर आएंगे वे उत्तीर्ण माने जाएंगे बाकी सब चयन प्रक्रिया से बाहर होंगे।साथ में यह भी कहा गया कि यह कट आफ सिर्फ इसी भर्ती के लिए मान्य होगी और इस न्यूनतम उत्तीर्ण प्रतिशत  के सम्बंध में कोई पत्राचार स्वीकार नहीं होगा।शिक्षक भर्ती में इस तरह से नाटकीय मोड आने से एक दो नंबरों से फेल हुए अभ्यर्थियों में आक्रोश व्याप्त है और इसके पीछे किसी बडी धांधली की आशंका जताई जा रही है।कुछ और भी कारण हैं जो अभ्यर्थियों में आक्रोश भर रहे हैं जैसे :-

☺जब कट आफ लगानी थी तो परीक्षा के पहले क्यों नहीं लगाई ? जो लोग अदालत में कट आफ लगाने की लडाई लड रहे थे ,क्यों अदालत में उनका धन और समय बरबाद किया गया। उस समय क्यों नहीं बताया गया कि कट आफ परीक्षा के बाद लगाई जाएगी।

☺पिछली भर्ती परीक्षा में 40-45% कट आफ थी तो इस बार इतनी ऊँची कट आफ क्यों ? 

☺भूतकाल की किसी भी भर्ती में इतना उच्च पात्रता मापदंड निर्धारित नहीं हुआ तो इसी भर्ती में क्यों ? ऐसा भी तो नहीं कि अभ्यर्थियों की संख्या बहुत ज्यादा थी और सीटों की संख्या बहुत कम।

☺कहा जा रहा है कि यह कट आफ सिर्फ एक पात्रता मापदंड है तो इसे सिर्फ इसी परीक्षा के लिए क्यों  ? भविष्य की भर्तियों के लिए क्यों नहीं ? 

☺एक ही परीक्षा के लिए हर बार अलग अलग पात्रता मापदंड क्यों ? इससे तो अभ्यर्थियों का आत्मविश्वास और मनोबल गिरता है।

☺इतनी ऊँची कट ऑफ लगाने का उद्देश्य शिक्षामित्रों को बाहर करना बताया जा रहा है।यदि आपको सीधा सीधा शिक्षामित्रों को बाहर करना था तो 25 अंक भारांक का नाटक क्यों ?

☺सरकार ने अभ्यर्थियों के साथ भी राजनीति खेली ।मतलब परीक्षा से पहले कट आफ निर्धारित नहीं किया ताकि शिक्षामित्र चुप रहें और परीक्षा हो जाए ,फिर परीक्षा के बाद कट आफ जारी कर दी ताकि बी.एड/बीटीसी अभ्यर्थी शान्त हो जाएं, फिर कट आफ इतनी ऊँची कर दी SC/ST/OBC जनरल की सीटें न ले पाएं।

कुछ अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि सरकार जानबूझकर मामले को उलझा रही है ताकि अभ्यर्थी कोर्ट जाएं और भर्ती को लटकाया जा सके। एक बार भर्ती लटक गई तो अगले चुनाव में इसे मुद्दा बनाकर , इसे क्लियर करने के लिए इस भर्ती से सम्बंधित हर वर्ग (शिक्षामित्र, बी.एड.,बीटीसी) से वोट ले लिए जाएं। सरकार भी जानती है कि यदि जल्दी ही ये भर्ती पूरी हो गई तो कोई न कोई वर्ग (शिक्षामित्र या बी.एड/बीटीसी) उससे नाराज हो ही जाएगा जिसका खामियाजा उसे चुनाव में भुगतना पड सकता है।

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