सावधानी हटी , दुर्घटना घटी !
आप लोग अक्सर सडकों पर,रेलवे स्टेशन पर या दीवारों पर एक स्लोगन पढते होंगे "सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।" हममें से लगभग सब लोग जानते हैं कि यह स्लोगन बहुत कुछ कहता है और हमें चेतावनी देता है ताकि हम सावधान रहें या सावधानी से गाडी चलाएं। पिछले कुछ दिनों से हम अखबारों और टीवी समाचार के माध्यम से देख रहे हैं कि सडकों पर दुर्घटनाएं बहुत ही ज्यादा बढ चुकी हैं।कुछ हादसे तो इतने दर्दनाक होते हैं कि देख कर ही दिल दहल जाता है।ऐसे हादसों को देखकर तो जी करता है कि गाडी चलाना ही छोड दें या फिर सडकों पर जाना ही छोड दें।क्या आपने कभी सोचा है या कभी विचार किया है कि इतनी ज्यादा घटनाएं क्यों बढती जा रही हैं ? क्यों बिना गलती के मासूमों की असमय सडक हादसों में मौत हो रही है ?
इन सबका कारण है हमारी और आपकी लापरवाही । सडक यातायात के कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं जिनके बारे में या तो जानकारी नहीं होती या फिर हम जानबूझकर उन नियमों को अनदेखा करते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि हम अपनी जान तो जोखिम में डालते ही हैं साथ ही सडक पर चलने वाले अन्य लोगों को भी खतरे में डालते हैं।हमें खुद तो सावधान रहना ही होगा साथ ही हमें अपने अपनों को भी समझाना होगा कि सडक पर चलते समय बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। याद रखिए सामने वाला कितना भी अच्छा चालक क्यों न हो अगर हम लापरवाही करेंगे तो वो भी बौखला ही जाएगा और गलती कर जाएगा। हम कुछ बातों को यदि ध्यान में रखकर गाडी चलाएं तो अपनी और अन्य लोगों की जान काफी हद तक सडक दुर्घटनाओं से बचा सकते हैं । ये बातें निम्नलिखित हैं -
☺ गाडी चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनकर (टू व्हीलर) और सीट बेल्ट बांधकर (फोर व्हीलर) चलें । ऐसा पुलिस से बचने के लिए नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए करें।
☺हेलमेट हमेशा अच्छी क्वालिटी का इस्तेमाल कीजिए जो आपके सिर की रक्षा कर सके न कि सस्ता और कामचलाऊ।
☺यदि बहुत ज्यादा जरूरत न हो तो गाडी हमेशा अधिकतम 50 किलोमीटर प्रति घण्टे से नीचे ही चलाएं। अधिक रफ्तार अधिक जानलेवा होती है।
☺ हम अक्सर देखते हैं कि कोई बच्चा मुश्किल से 10 साल का भी पूरा नहीं होता है कि लोग उन्हें गाडी थमा देते हैं और देखकर खुश होते हैं कि वाह मेरा बेटा गाडी चला रहा है। याद रखिए ज्यादातर एक्सीडेंट अनुभवहीन,जोशीले और नाबालिग चालकों की वजह से होते हैं। इसलिए अपने नाबालिग और नौसिखिया बच्चों को कभी भी मेन रोड पर गाडी न चलाने दें।
☺ गाडी सीख रहे बच्चों को अच्छी तरह से यातायात के नियमों को समझाएं और खुले मैदान में अपनी निगरानी में अभ्यास करवाएं। पूरी तरह पारंगत होने और उम्र में 18 वर्ष पूरा होने के बाद ही सडक पर गाडी चलाने की अनुमति दें।
☺किसी भी दूसरी गाडी को ओवरटेक तभी करें जब सामने से कोई गाडी न आती दिखे। चौराहे पर, मोड पर या भीडभाड वाली जगहों पर बिल्कुल भी ओवरटेक न करें।
☺यदि सडक के किनारे कोई बस्ती हो तो वहां गाडी की स्पीड 10-20 किलोमीटर प्रति घण्टे के आस पास रखें क्योंकि आस पास बस्ती होने से कोई जानवर या मासूम बच्चे अचानक से सामने आ सकते हैं ।
☺ सिंगल सडक पर यदि सामने से बडी गाडी या ट्राली वाला ट्रैक्टर आ रहा हो तो स्पीड कम कर लें या गाडी किनारे पर रोक लें और उसके गुजरने का इन्तजार करें।
☺ कोई नशा करके या शराब पीकर बिल्कुल भी गाडी न चलाएं और न ही किसी को चलाने दें।
☺टायरों में हवा,क्लच और अपनी गाडी का ब्रेक नियमित रूप से चेक कराएं।
☺ हाईवे या सामान्य सडकों पर भी गाडी तेज चलाने की प्रतियोगिता कभी नहीं करनी चाहिए।
☺बन्द रेलवे फाटक को कभी भी नीचे से घुसकर पार न करें। ये फाटक आपकी ही सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।याद रखिए, दुर्घटना से देर भली।
☺गाडी चलाते समय मोबाइल पर बात न करें, ईयरफोन से भी नहीं क्योंकि इससे ध्यान बँट जाता है। कहीं सडक के किनारे रुक जाइए बात कर लीजिए फिर जाइए।
☺स्पीड उतनी ही रखिए कि अचानक कोई बच्चा या जानवर सामने आ जाए तो गाडी पर नियंत्रण किया जा सके।हो सकता है कि आपको कुछ चोटें लग जाए पर स्पीड कम होने से जान तो बच ही सकती है।
आशा है कि आपने सब कुछ ध्यान से पढा होगा अब आप सब से करबद्ध रूप से निवेदन है कि आप उपरोक्त बातों पर ध्यान दें और इस बारे में अपने दोस्तों और परिवार वालों को भी समझाइए क्योंकि जीवन से बढकर कुछ नहीं होता है। सावधानी से गाडी चलाइए। खुद भी सुरक्षित रहिए और दूसरों को भी सुरक्षित रखिए।
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