देवरिया कांड: महिलाएं कहीं सुरक्षित नहीं
हमने स्कूल के दिनों में संस्कृत में एक लाइन पढी थी जो थी ' यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: ' अर्थात जिस स्थान पर नारियों का सम्मान होता है वहां पर देवता निवास करते हैं।हम आपको बताना चाहते हैं कि भारत में कुछ नारियों को आश्रय देने के नाम पर कुछ ऐसे भी स्थान बनाए गए हैं जहां देवता नही हैवानियत निवास करती है। अभी मुजफ्फरपुर , देवरिया के बालिका आश्रय गृह में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आ चुकी है। मुजफ्फरपुर , देवरिया जैसे न जाने कितने स्थानों पर महिलाओं को सुरक्षा देने के नाम पर उनसे गलत काम करवाए जा रहे हैं और कुछ पैसों के खातिर अधिकारी और संरक्षक अपना ईमान बेच रहे हैं।
लडकियों और महिलाओं की सुरक्षा को ताक पर रखकर ऐसे आश्रय गृहों का संचालन करने वालों को पैसा इस कदर प्यारा हो गया था कि आश्रय गृह की मान्यता खत्म हो जाने और सहयोग फंड बन्द हो जाने के बाद भी सरकार और अधिकारियों की मेहरबानी से लडकियों को वहां ले जाना जारी रहा।अब अधिकारी कहेंगे कि हमें इस बात की जानकारी नहीं थी।अजी हम कैसे मान लें ? सहयोग फंड रोक दिए जाने के बावजूद भी देवरिया के आश्रय गृह मे सात सौ से अधिक लडकियों को लाया गया क्या कोई समझ नहीं पाया होगा कि बिना सहयोग राशि के इनका खर्च कैसे चलता होगा ? सब कुछ सबको पता होता था साहब ...बस सब अपना अपना हिस्सा लेकर बगल जाते थे।
हम महिलाओं को सम्मान दिलाने की बातें करते हैं लेकिन आश्रय गृह की लडकियों को गाडिय़ों में भेजकर वेश्याओं वाला गलत काम करवा के कुछ लोगों ने उनका आत्मसम्मान तक छीन लिया है। खबर ताजा है इसलिए सरकार ने भी कुछ अधिकारियों को निलंबित करके खानापूर्ति जरूर कर दी है लेकिन चार दिन बाद ही सब फिर से शान्त हो जाएंगे और सब कुछ फिर से चालू हो जाएगा।
मेरी तो समझ में नहीं आता कि महिलाओं के कल्याण और उनकी सुरक्षा के लिए बनाई गई संस्थाएं आखिर करती क्या हैं ? इनका तो काम ही होना चाहिए कि हर उस स्थान की जानकारी रखें जहाँ पर महिलाएं रहती हैं और सब कुछ ठीक होने की सूचना नियमित अन्तराल पर सरकार को देते रहना भी इनकी जिम्मेदारी होनी चाहिए लेकिन यह हमारे देश की महिलाओं का दुर्भाग्य ही है कि उनके लिए बनाई कल्याणकारी संस्थाएं भी तभी हरकत में आती हैं जब उनके साथ कुछ बडी अनहोनी हो चुकी होती है।
खैर, देवरिया कांड के बाद महिलाओं के सुरक्षा के सम्बंध में अगर पूछा जाए तो बहुत से ऐसे सवाल होंगे जिनका जवाब न तो सरकार ,न तो अधिकारी और ही ऐसी संस्थाएं जो महिला हितैषी होने का दावा करती हैं, के पास होगा।महिलाओं सें खासकर युवा लडकियों सें हम कहना चाहते हैं कि अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाएं,अपने हक.के लिये लडना खुद सीखें क्योंकि हमारे देश के कानून और सरकार में अब वह ताकत नहीं रही कि वो आप लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करे।उठा लो चूडियां और पहनाना शुरू कर हर अधिकारी और सरकार के हर उस नुमाइंदों को जो कहते हैं वो महिलाओं की सुरक्षा के लिए तत्पर हैं।
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