पाण्डे जी की बेटी पर बवाल
यूट्यूब पर अभी अभी हाल ही में आए एक गाने " पाण्डे जी की बेटी है, चुम्मा चिपक के देती है " ने एक बवाल खडा कर दिया है। इस एक गाने ने ब्राह्मण समाज के लोगों में खलबली मचा दी है। यहां तक कि कुछ लोग थाने में उस गायक और राइटर पर एफआईआर करवाने तक को तैयार हो गए हैं जिन्होंने इस गाने को बनाया है। ब्राह्मण लोगों का तर्क है कि किसी गाने में किसी जाति विशेष का नाम इस तरह से नहीं आना चाहिए जैसे कि इस गाने में इस्तेमाल किया गया है। लेकिन मैं आपको बता दूं कि इससे पहले भी एक गाना आया था जिसके बोल थे "पाण्डे जी का बेटा हूँ , चुम्मा चिपक के लेता हूँ" ।इस गाने में भी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल हुआ है लेकिन जब यह गाना आया था तो ब्राह्मण तथा पाण्डे समाज के लोगों को बडा मजा आया था ।मैंने देखा है जब आर्केस्ट्रा में यह गाना बजता है तो यही ब्राह्मण लोग स्टेज पर चढकर ऐसे ताव में आ जाते हैं कि बस अब चिपक के चुम्मा ले ही लेंगे। ब्राह्मण लोगों का कहना है कि उस गाने में (जिसे रितेश पाण्डे ने गाया है) बेटे की बात हुई है , तथा पाण्डे जी ने गाया है, इसलिए वो सही है लेकिन अजय यादव जी के गाने में 'बेटी' शब्द का इस्तेमाल हुआ है और बेटी घर की इज्ज़त होती है इसलिए यह गलत है।
मैं ब्राह्मण समाज के लोगों से पूछना चाहता हूँ कि जब पाण्डे जी का बेटा चुम्मा ले रहा था तो किसका चुम्मा ले रहा था ? किसी लडकी का ही ले रहा होगा न ? और अपनी ही बिरादरी की लडकी का चुम्मा ले रहा होगा क्योंकि ब्राह्मण तो अन्य जातियों को लगभग अछूत ही समझते हैं। पाण्डे जी का बेटा जब चुम्मा ले रहा था और ढोल पीट पीटकर सबको बता रहा था तो सब ठीक था , अब जब वह जिसका चुम्मा ले रहा था उसने ( लडकी) सबको बताना शुरू किया कि पाण्डे जी का बेटा चिपक के चुम्मा लेता है और मैं चिपक के देती हूँ तो सब इतना खिलाफ क्यों हैं ? बेटा करे तो जय जय राम और बेटी करे तो राम राम राम। यह कैसा नियम है भाई आखिर इतना बडा पक्षपात क्यों ? पाण्डे जी का बेटा जिसका चुम्मा ले रहा था वो भी तो किसी की बेटी रही होगी । अपनी बेटी ,बेटी है और दूसरों की बेटी ........।
मैं इन दोनों गानों में से किसी भी गाने का समर्थन नहीं करता हूँ और न ही किसी जाति या धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत करना चाहता हूँ। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि कुछ महीने पहले आप लोगों की नजरों में जो चीज सही थी वही चीज आज गलत कैसे ? ये फालतू का बवाल किसलिए ? गाने मनोरंजन के लिए बनाए जाते हैं और उन्हें वैरिफाई या पास करने के लिए सेंसर बोर्ड है आप लोग बीच में क्यों नेतागिरी कर रहे हैं। एफआईआर तो रितेश पाण्डे के खिलाफ भी होनी चाहिए क्योंकि उनके गाने में जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल हुआ है फर्क सिर्फ इतना है कि उसमें 'बेटा' शब्द का इस्तेमाल हुआ है और इसमें बेटी। 'बेटा' और 'बेटी' शब्द के अन्तर की वजह से किसी पर आप मुकदमा नहीं कर सकते । आजकल तो सरकार का भी स्लोगन चल रहा है "बेटा बेटी एकसमान"। यदि एफआईआर हो तो जातिसूचक शब्द वाले हर गाने पर होनी चाहिए और ऐसे सभी गानों को बैन कर देना चाहिए ।
इन गानों से पहले भी बहुत से ऐसे गाने आ चुके हैं जिन्हें बहन बेटियों के सामने सुनना तक बेइज्जती लगता है तब तो किसी ने आवाज नहीं उठाई। आज भोजपुरी सिनेमा में जो भी अश्लीलता बढी है वो हमारे और आपके बढावा देने से ही बढी है। जिस दिन भोजपुरी मे पहला अश्लील गाना आया था उसी दिन अगर हम लोगों नें आन्दोलन कर दिया होता तो आज इतनी बडी मात्रा में अश्लीलता न परोसी जाती।ये सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि ऐसे किसी भी गाने या फिल्म को पास न करें जिसमें जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल हुआ हो या हद से ज्यादा अश्लीलता हो। बाकी रही बात 'पाण्डे जी की बेटी है' गाने के विरोध की तो शायद विरोध करने वाले ये नहीं जानते कि वे इसका जितना विरोध कर रहे हैं, इस गाने का उतना ही प्रमोशन हो रहा है।इन विरोधियों को समझना चाहिए कि आग बुझाने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है न कि पेट्रोल का।
सत्य वचन!!!
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