चेहरे से नहीं दिल से प्यार कीजिए

किसी के खूबसूरत चेहरे से प्यार मत कीजिए क्योंकि चेहरे की खूबसूरती तो एक दिन खत्म हो जाएगी।  यदि प्यार करना है तो किसी के खूबसूरत दिल से कीजिए क्योंकि दिल की खूबसूरती कभी भी खत्म नहीं होती। जिस इंसान का दिल खूबसूरत है वह अगले सौ सालों के बाद भी खूबरसूरत ही रहेगा।चेहरे का क्या है वह आज खूबसूरत है तो कल बदसूरत भी हो सकता है।याद रखिए आपके खूबसूरत चेहरे से प्यार करने वाला आपको तभी तक प्यार करेगा जब तक आपके पास खूबसूरत चेहरा हैं।आपके चेहरे की खूबसूरती खत्म होते ही उसका प्यार भी खत्म हो जाएगा। परन्तु जो इंसान आपके सुन्दर दिल और आपके अच्छे व्यवहार से प्यार करता है उसके प्यार का कभी भी अन्त नहीं होगा।

इसी से सम्बंधित एक छोटी सी मगर सच्ची कहानी हम आपको बता रहे हैं। तीन दोस्त थे साहिल , रोहन और साहिबा।साहिल साँवला मगर दिल का अच्छा था, रोहन गोरा और काफी हैंडसम था वहीं साहिबा भी  बेहद खूबसूरत थी। रोहन और साहिल दोनों साहिबा से प्यार करते थे जबकि साहिबा सिर्फ रोहन को पसंद करती थी क्योंकि वह बहुत खूबसूरत थी और अपने लिए भी  खूबरसूरत जीवनसाथी ही चाहती थी। साहिल साँवला था इसलिए साहिबा ने उसे रिजेक्ट कर दिया। खैर बात आगे बढती गई और साहिबा तथा रोहन के घर वाले भी राजी हो और दोनों की शादी की तारीख भी तय हो गई। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था शादी में सिर्फ 15 दिन शेष थे। साहिबा अपनी इक छोटी झोपडी में खाना बना रही थी और रोहन तथा साहिल बाहर बैठकर शादी के बारे में साहिबा के घर वालों के साथ विचार विमर्श कर रहे थे। तभी अचानक साहिबा के चीखने की आवाज आई ..."अरे पापा बचाओ आग लग गई।"  इतना कहते वह बाहर की ओर भागी ।दरअसल उसके कपडों में एक तरफ आग पकड चुकी थी । झोपडी में लगी आग ने भी विकराल रूप धारण कर लिया था । रोहन के रोंगटे खडे हो गए थे वह बस खडा होकर देख रहा था और सोच रहा था कि वह क्या करे और साथ ही साथ वह डर भी रहा था कि साहिबा की आग बुझाने में कहीं उसे न आग पकड़ ले ।रोहन यह सब सोच ही रहा था कि साहिल ने तुरन्त अपनी शर्ट उतारी और साहिबा की आग बुझाने लगा । फिलहाल किसी तरह आग बुझी मगर साहिल के भी हाथ जल गए और साहिबा भी एक तरफ काफी हद तक झुलस गई थी। जल्दी जल्दी में लोग उसे अस्पताल ले गए और ट्रीटमैंट शुरू हो गया। रोहन कुछ देर रुका फिर घर चला गया जबकि साहिल वहां से एक पल के लिए भी नहीं हटा।प्राथमिक इलाज होने के बाद डाक्टरों ने कन्फर्म किया कि साहिबा अब खतरे से बाहर है।

किसी तरह तेरह दिन बीत गए मगर रोहन ने एक बार भी साहिबा से सम्पर्क नहीं किया और अब शादी में दो दिन ही शेष थे। इस दौरान कई बार साहिबा ने रोहन से फोन पर बात करने की कोशिश की पर रोहन हर बार फोन काट देता। फिर अचानक रोहन का फोन आता है और कहता है ..."सौरी साहिबा मै तुमसे शादी नहीं कर सकता क्योंकि मेरे घर वाले कह रहे हैं कि वो जली हुई लडकी से शादी नहीं करना चाहते।" साहिबा ने कहा कि घर वालों की छोडो तुम तो मुझसे प्यार करते हो तुम तो मुझे समझो। इसके बाद रोहन ने जो जवाब दिया उसे सुनकर साहिबा के पैर तले से जमीन खिसक गई। रोहन ने कहा ..." कैसा प्यार यार ? शादी कोई खेल नहीं मेरी जिन्दगी का सवाल है । मैं तुम्हारी खूबसूरती पर फिदा था जो अब तुममें नहीं है। तुम्हारा आधा चेहरा जल गया है अब तुमसे शादी करूंगा तो मेरे दोस्त क्या सोचेंगे ?  माफ करना मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता , दुबारा मुझे फोन मत करना।"

रोहन का फैसला सुनकर साहिबा के साथ साथ सारे घर वाले परेशान थे क्योंकि शादी में सिर्फ दो दिन ही बचे थे । रिश्तेदारों को क्या मुंह दिखाएंगे यही सोच सोच के साहिबा के पापा की आँखों से आँसू टपक रहे थे। तभी साहिल पहुंचा और पूछा कि क्या बात है सब लोग इतने परेशान क्यों हैं।साहिबा ने सारी बात बता दी। साहिल ने कुछ देर सोचा और बोला , "बस इतनी सी बात है। साहिबा मैं हैंडसम तो नहीं हूँ पर अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो तो मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ और उसी तारीख पर जिस तारीख पर तुम्हारी और रोहन की शादी होने वाली थी। ये मत सोचना कि मैं तुमपर तरस खा कर ऐसा कह रहा हूं बल्कि इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं तुमसे सच्चे दिल से प्यार करता हूं। तुम्हारा चेहरा जल गया है तो क्या हुआ तुम मेरे लिए अब भी उतनी ही खूबसूरत हो जितनी पहले थी।"

 साहिबा की आँखों से आँसू गिरने लगे आज उसे सच्चे प्यार में और झूठे प्यार में फर्क साफ साफ  दिखाई देने लगा था।

हमने अक्सर लडके और लडकियों को देखा है जो अपने जीवनसाथी का चुनाव करते समय सिर्फ बाहरी सुन्दरता को ही तवज्जो देते हैं। वे यह बिल्कुल भी जानने का प्रयास नहीं करते हैं कि उसका स्वभाव कैसा है या उसका चरित्र कैसा है ।किसी भी इंसान में गुण भी उच्च कोटि के हों और वह सुन्दर भी हो यह बहुत ही कम देखने को मिलता है। वे लोग जो मन या दिल के सुन्दर होते हैं वे आसानी से हर दिल में जगह बना लेते हैं और बडी आसानी से हर अच्छी बुरी परिस्थितियों में अपने आपको एडजस्ट कर पाने में सक्षम होते हैं।

खूबसूरत होना या न होना यह हमारे वश में नहीं होता बल्कि यह तो ईश्वर की कृपा और कुछ हद तक हमारे माता पिता की सुन्दरता पर निर्भर करता है जबकि अपने मन को सुन्दर रखना या अपने व्यवहार को अच्छा रखना हमारे अपने वश में होता है। अपने मन को साफ रखकर, गन्दी बातों और बुराइयों से अपने आपको दूर रखकर  तथा मीठी बोली बोलकर हम अपने आपको दूसरों से बेहतर बना सकते हैं । कोशिश करने से चेहरा खूबसूरत बने न बने लेकिन अच्छी बातों, अच्छे मन,अच्छे दिल,अच्छी सोच और अच्छे व्यवहार से हम जिन्दगी को खूबसूरत जरूर बना सकते हैं।

Comments

  1. वाह!!बहुत खूब ...।मन की सुंदरता ही असली सुंदरता है ।

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