आखिर कैसे भूल गए तुम

तुम भूल गए हो जितना

ऐ जान-ए-गजल कहो इतना

आखिर कैसे भूल गए तुम

प्यार वफा की रस्में

संग जीने मरने की कसमें

ख्वाबों से भरी वो रातें

रिमझिम रिमझिम बरसातें

आखिर कैसे भूल गए तुम

सब मेरी पसंद का करना

मुझे देख के सजना सँवरना

मुझे देख देख शरमाना

फिर अदा से पलकें झुकाना

आखिर कैसे भूल गए तुम

हाथों में हाथ पकड के

जो वादे गए हो करके

जरा खुल के हमें बताओ

न समझूँ तो समझाओ

आखिर कैसे भूल गए तुम

माना दुनिया दुश्मन है

जीवन में बडी उलझन है

उलझन में फँस सपनों को

गैरों के लिए अपनों को

आखिर कैसे भूल गए तुम

तुम भूल गए हो जितना

ऐ जान-ए-गजल कहो इतना

आखिर कैसे भूल गए तुम

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