वाराणसी फ्लाईओवर घटना : लापरवाही की हद

 वाराणसी में घटित हुई फ्लाईओवर ब्रिज  की  घटना बेहद दुखद है। घटना में मारे गए लोगों के परिवार वालों को कितनी भी सांत्वना दी जाए उनका दुख बांटा नहीं जा सकता। वाराणसी में घटित हुई इस घटना के पीछे कारण कुछ भी हो लेकिन इसमें राज्य सरकार, अधिकारी और सम्बंधित इंजीनियरों की लापरवाही से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। अभी तो यह ब्रिज निर्माणाधीन था लेकिन यदि यही बनकर तैयार होने के बाद गिर जाता तो कितनी जानों का नुकसान होता यह कोई कल्पना भी नहीं कर सकता । 

आपको बता दें कि वाराणसी में कैंट एरिया में एक फ्लाईओवर ब्रिज निर्माणाधीन था जिसका एक हिस्सा मंगलवार को ढह गया जिसके नीचे चार कार एक मिनी बस और सात आठ बाइक्स आ जाने से लगभग अठारह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा जितना दर्दनाक था उतना ही खौफनाक भी। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो घटना के बाद चारों तरफ सिर्फ दहशत का माहौल नजर आ रहा था हर तरफ चीखने और बचाने की आवाजें आ रही थी। प्रशासन की लापरवाही तो देखिए कि शहर के बीचोबीच घटना घटित होने के बावजूद राहत और बचाव दल घटना घटित होने के लगभग एक घण्टे के बाद घटनास्थल पर पहुँचा और तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

घटना पर किसने ट्वीट करके क्या कहा :

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी-

"Extremely saddened by the loss of lives due to the collapse of an under-construction flyover in Varanasi. I pray that the injured recover soon. Spoke to officials and asked them to ensure all possible support to those affected."

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ-

"वाराणसी में कैण्ट स्टेशन के सामने निर्माणाधीन पुल के एक हिस्से के गिरने की दुर्घटना में लोगों की मृत्यु पर गहरा दुःख हुआ। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिजनों को संबल देने की प्रार्थना करता हूँ।"

केशव प्रसाद मौर्य-

"ओवर ब्रिज के बीम गिरने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है सरकार तत्कालिक रूप से हर प्रकार के #राहत और #बचाव कार्य कर रही है पीड़ितों के साथ हमारी पूरी संवेदना है इस घटना के जो भी दोषी होंगे उन्हें किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा ।"@BJP4UP @BJP4India

पूर्व यूपी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव-

"वाराणसी में पुल के हादसे में लोगों को बचाने के लिए मैं वहाँ के अपने सभी कार्यकर्ताओं से अपील करता हूँ कि वे बचाव दल के साथ पूरा सहयोग करें और सरकार से ये अपेक्षा करता हूँ कि वो केवल मुआवज़ा देकर अपनी ज़िम्मेदारी से नहीं भागेगी बल्कि पूरी ईमानदारी से जाँच करवायेगी ।"

हालांकि सरकार ने मृतकों को चार चार लाख और घायलों को दो दो लाख देने का फैसला किया है लेकिन कुछ भी हो चाहे मृतकों के परिवार वालों को चार चार लाख रुपये दे दिए जाए चाहे दस दस लाख, मरने वालों की कमी उन्हें हमेशा खलती रहेगी। अधिकारियों और सरकार को यह समझने की जरुरत है कि पैसों से किसी की जान की कीमत नहीं लगाई जा सकती क्योंकि जिन्दगी अनमोल होती है। इतना तो जाहिर ही है कि यह घटना एक बहुत ही बडी लापरवाही या घोटाले का परिणाम है ।भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों इसलिए इस घटना की  पूरी तरह और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषियों को कडी से कडी सजा दिलाई जानी चाहिए। यही मरने वालों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और सरकार का सही मायने में सच्चा फर्ज। 

ईश्वर मृतकों की आत्माओं को शान्ति प्रदान करे और घायलों को जल्द से जल्द अच्छी सेहत।

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