गर्भावस्था में सावधानियाँ

माँ बनना एक औरत के लिए एक बेहद सुखद एहसास होता है। एक औरत जब गर्भ धारण करती है तो उसे अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है । अक्सर देखा जाता है औरतों को गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के समय बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पडता है। गर्भावस्था में कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिनको हम जड से खत्म नही कर सकते जैसे जी मिचलाना, घबराहट होना या चिडचिडापन होना आदि लेकिन यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है।
ऐसा माना जाता है कि गर्भावस्था में औरतों को आराम की सख्त जरूरत होती है मगर इसका मतलब यह बिल्कुल भी नही है कि वो सिर्फ आराम ही करती रहें। याद रखिए गर्भावस्था में एक औरत को जितनी जरूरत पौष्टिक आहार की होती है उतनी ही जरूरत उसके शरीर को व्यायाम की होती है ताकि उसके पेट में पल रहे बच्चे का पूर्ण रूप से विकास हो । एक औरत को चाहिए कि हमेशा लेटी रहने के बजाय हर एक घण्टे के बाद थोडा सा टहल लें या घर का कुछ काम कर लें इससे उनके मन का तनाव भी कम होगा और शरीर की व्यायाम की जरूरत भी पूरी हो जाएगी। यह आलसी दिनचर्या और आवश्यकता से अधिक आराम करने का ही परिणाम है कि प्रसव के दौरान आजकल की महिलाओं को पहले की महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा परेशानियों का सामना करना पडता है। हाँ ऐसा काम नही करना चाहिए जिसमें भारी वस्तुओं को उठाने की जरूरत पडे या कोई अन्य तरह का खतरा महसूस हो। हल्के काम करें लेकिन करें जरूर। पहले की महिलाओं का प्रसव घर में ही आसानी हो जाता था इसकी मुख्य वजह थी कि पहले की औरतें गर्भावस्था के आठवें महीने तक काम करना नही छोडती थी,  मगर  आजकल की औरतें तीसरे महीने के बाद से ही आराम फरमाने लगती हैं जिसका परिणाम होता है कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पतालों के होने के बावजूद भी प्रसव के लिए आपरेशन की आवश्यकता पडने लगी है। कभी कभी अर्धविकसित , विकलांग और मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चे पैदा होते हैं इसका भी मुख्य कारण है आजकल की गर्भवती महिलाओं का काम न करना और जरूरत से ज्यादा आराम करना ही है।
गर्भवती महिलाओं के शरीर का पर्याप्त व्यायाम न हो पाने से उनमें घबराहट के साथ  हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ जाती है। हाई ब्लड प्रेशर के चलते स्ट्रोक का खतरा छः गुना बढ जाता है।
शोधकर्ताओं का दावा है कि हर दस में से एक गर्भवती महिला प्रीक्लेम्प्सिया से जूझती है। यह एक तरह का विकार है जिसका लक्षण हाई बीपी, चेहरे पैरों में सूजन और सिरदर्द है। शोध से जाहिर हुआ है कि प्रीक्लेम्प्सिया से जूझने वाली महिलाओं में कुछ खास स्थितियों मसलन हाई बीपी , रक्तस्राव और संक्रमण के चलते स्ट्रोक की ज्यादा आशंका रहती है।अमेरिका की कोलम्बिया यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता एलिजा सी मिलर ने कहा कि इस तरह के विकारों की स्ट्रोक में खतरे की अहम भूमिका होती है । सबसे अहम बात यह है कि प्रीक्लेम्प्सिया पीडित महिलाओं में प्रसव के बाद भी स्ट्रोक का खतरा टलता नही है ।

इस तरह एक औरत गर्भावस्था के दौरान अपने आपको जितना व्यस्त और एक्टिव रखेगी उसकी समस्याएं उतनी ही कम होंगी।

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