ख्वाहिश

शादी से पहले लडकियों की

ख्वाहिश होती है लाखों में

चाहत होती है खुशियों की

कुछ सपने होते हैं आंखों में

वो चाहती हैं शादी के बाद

सपनों का इक संसार मिले

पूरी हो हर इक इच्छा और

अपनों का सच्चा प्यार मिले

जो समझ सके हर बार उसे

इक छोटा सा परिवार मिले

जो समझे उसके हर दुख को

पति ऐसा राजकुमार मिले

इक लडकी से दुल्हन बनकर

पति की पत्नी बनकर जाए

शादी के बाद वो मायके का

सब छोडके जब ससुराल आए

सब खुश हों उसके आने से

न शोक न कुछ अवसाद मिले

गर मिलें तो हँसते चेहरे मिलें

और सबका आशिर्वाद मिले

जैसे चंदा संग चांदनी है

जैसे दिन साथ उजालों के

कोई भी परिस्थिति हो लेकिन 

वो मिल के रहे घर वालों से

जब भी वो रसोई में जाए

बस प्रेम के ही पकवान बनें

हर कोई करे तारीफ उसकी

वो हर चेहरे की मुस्कान बने

ना सास ससुर से झगडे हों

ना कोई ननद से हो टकरार

फिर भी हो जाए विवाद अगर

सब मिलकर सुलझाएं हर बार

हर पत्नी पति से चाहती है

उसे साथ मिले हर मुश्किल में

चाहे दुनिया ठुकरा ही दे

पर पति रखे उसको दिल में

पति का सबकुछ है कबूल उसे

वह खुशियां दे चाहे ग़म दे

पत्नी के लिए पति सब कुछ है

पति समझे उसे या ना समझे

वह चाहती है अपने रब से

उसे इतना ही वरदान मिले

चले जिससे उसके घर का वंश

उसको भी इक संतान मिले

वह चाहती है उसके घर में

उसको भी इक पहचान मिले

उसको भी मिले हर इक इज्जत

उसको भी हर सम्मान मिले

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