कन्या बचाओ
आजकल समाचार पत्रों से लेकर सोशल मीडिया तक अक्सर यह खबर पढने को मिलती है कि किसी मन्दिर के सामने या कूडेदान में एक दिन या दो दिन या हफ्ते भर की मासूम बच्ची लावारिस पायी गई है । यह खबर पढने के बाद किसी का भी हृदय कांप सकता है। जरा सोचिए कि दो दिन की बच्ची जो अभी तक अपने मां बाप को भी ठीक से पहचानती नही होगी उसके साथ इतना बडा अन्याय कोई कैसे कर सकता है। एक मां बाप का स्थान भगवान के बाद सबसे पहले आता है । किसी मां का हृदय इतना कठोर कैसे हो सकता है जो अपनी ही बच्ची को लावारिस छोड कर भाग जाती है । क्या उसे जरा भी दर्द महसूस नही होता ? क्या उसे जरा भी फिकर नही सताती कि मैं अपनी बच्ची को अकेला छोडकर जा रही हूं जहां हमेशा कुत्तों से लेकर अन्य जानवर घूमते रहते हैं जो कभी भी बच्ची को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आखिर हमारा समाज कब बदलेगा? लोग कहते हैं शिक्षा समाज में सुधार लाएगी लेकिन अभी तक जो मैंने देखा है उससे आधार पर मैं कह सकता हूँ कि बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो शिक्षित होते हुए भी ऐसे जघन्य अपराध करते हैं कि एक अनपढ गँवार भी उनके सामने श्रेष्ठ नजर आता है। एक अनपढ और पढे लिखे इंसान (जो कन्या हत्या में भागीदार होते हैं) में सिर्फ इतना ही फर्क है कि अनपढ लोग बच्चियों के जन्म के बाद उन्हें इधर उधर फेंक कर छुटकारा पा लेते हैं और पढे लिखे लोग गर्भ में ही लिंग जांच (सरकारी रोक के बावजूद सिफारिश और जान पहचान के द्वारा) करवा कर बच्चियों की हत्या कर देते हैं।
हो सकता है कि बच्ची को फेंकने वाले इंसान के पास पहले से कई बेटियां हों और वह एक और बेटी का खर्च नही उठा सकता हो। पर इसका मतलब यह तो नही है कि अपनी बच्ची को कूडेदान में ही फेंक दो । अगर आप बच्ची का खर्च नही उठा सकते तो उसके और भी रास्ते है जैसे कि किसी को अपनी बच्ची गोद दे देना या अनाथालय में डाल देना आदि। दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें संतान नही होती उन्हें लोग अपनी बच्ची गोद दे सकते हैं। कम से कम इससे आपकी मासूम बच्ची जीवित तो रहेगी।
मेरी समझ में यह नही आता है कि पिता अगर राजी है ठीक है पर एक मां जो नौ महीने तक अपने पेट में अपने अंश को रखती है वह इस अपराध को करने के लिए कैसे राजी हो जाती है ? अखबारों में आता है कि किसी मजबूरी में मां ने यह कदम उठाया होगा मैं पूछता हूं ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसकी कीमत एक मासूम बच्ची की जिन्दगी है। सच पूछिए तो वह माँ जिसने समाज के लिए , अपने लिए अपनी मासूम बच्ची की हत्या की है वह माँ नही वह एक राक्षसी है बस भूलवश भगवान ने उसे इंसान बना दिया है। ऐसे लोग जो यह अपराध करते हैं पूरी की पूरी इंसानियत पर काला धब्बा हैं और उन्हें इस समाज में रहने का कोई हक नही है।
मैं अपील करता हूँ अपने देश के हर नौजवान से , हर महिला से और हर जिम्मेदार नागरिक से कि यदि आपके आस पास इस तरह की कोई घटना होने की आशंका हो तो तुरन्त इसकी जानकारी किसी महिला संस्था या पुलिस में जरूर दें। याद रखिए आपकी छोटी सी सतर्कता किसी मासूम की जिन्दगी बचा सकती है।
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