योग और रोग

क्या आप जानते है कि योग आपके लिए कितना लाभदायक है ? शायद नहीं क्योंकि अगर आप जानते होते तो आप योग कर रहे होते। हम यहाँ योग और रोग की बात कर रहे है ।योग और रोग कभी एक साथ नहीं रह सकते इनमें हमेशा शत्रुता ही होती है ।जो व्यक्ति नियमित रूप से योग अभ्यास करता है वह रोगी बन ही नही सकता बशर्ते कि योग शुरू करने से पहले उसको कोई रोग न हो।फिर भी योग शुरू करने से पहले उस व्यक्ति को किसी तरह का कोई रोग है भी तो अगर वह नियमित रूप से योग अभ्यास जारी रखे तो कोई भी असाध्य रोग हो ,जड से खतम हो जाएगा।
कम शब्दों में बस आप इतना जान लीजिए कि.."जहाँ योग होता है वहाँ रोग नहीं होता है।"

योग जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है गणित की भाषा में  इसका मतलब होता है संख्याओं या वस्तुओं का जोड ,परन्तु शारीरिक योग में योग का मतलब होता है -एक साथ लाना या करना।जब हम अपने मन, अपने शरीर और अपनी आत्मा को एक साथ करने की क्रिया करते हैं तो हम उसे योग कहते हैं।जबकि जो कसरत या व्यायाम होता है वह सिर्फ शरीर से सम्बन्धित होता है ।व्यायाम करने से सिर्फ हमारा शरीर हृष्ट पुष्ट होता है या ताकतवर बनता है इसमें मन और आत्मा को कोई लाभ नही होता है।अगर आपको अपने मन ,आत्मा और शरीर सबको नियंत्रित,संयमित और एक साथ करना है तो यह सिर्फ और सिर्फ योग क्रिया के द्वारा ही सम्भव है।


आपको खुद नहीं पता होगा शरीर में थोडा सा भी दर्द होने पर आपने न जाने कितनी अंग्रेजी दवाइयां खा डाली है । इन अंग्रेजी दवाइयों को खाने से आपको तुरन्त राहत तो मिल जाती है परन्तु जैसे ही दवा का असर खत्म हुआ आपका दर्द ज्यों का त्यों। शरीर पर लाभ से ज्यादा अंग्रेजी दवाइयों के दुष्परिणाम नजर आते है इसलिए दवाओं का प्रयोग कम से कम करें या बहुत जरूरी हो तभी करें।

बाजार में कुछ पेन किलर तो  ऐसे भी हैं जो थोडी देर के लिए शरीर का दर्द तो   मिटा देते हैं पर आपकी किडनी पर बहुत बुरा असर डालते हैं इसलिए अगर आप गर्दन ,पीठ या कमर दर्द से से परेशान हैं तो पेन किलर की जगह योग शुरु कर दीजिए कुछ दिनों में आपका दर्द जड से खतम हो जाएगा ।

गर्दन के दर्द, सर्वाइकल स्पान्डलाईटिस, धातु रोग ,नपुंसकता, कमर दर्द, कफ, हृदय रोग आदि में योग ही सर्वोत्तम इलाज हो सकता है।

याद रखिए हमारा शरीर जितना ज्यादा एक्टिव रहेगा शरीर में बीमारियाँ उतनी ही कम होंगी इसलिए आलस्य न करें
याद रखें, शरीर हमेशा ऊर्जावान और एक्टिव  सिर्फ योग से बना रह सकता है।

योग बहुत ही आसान और लाभदायक ह़ोता है बस मन को शान्त रख के प्रशिक्षक द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना है । हर रोग के लिए अलग अलग तरह के योग हैं आप किसी योग प्रशिक्षक से इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हाँ, योग शुरू करने से पहले योग के नियम जान लेना आवश्यक है और शुरु में इसे किसी प्रशिक्षक की देखरेख में करें फिर थोडा जानने के बाद आप खुद घर पे भी कर सकते हैं। आप चाहें तो इन्टरनेट या योग एप्स की भी मदद ले सकते हैं। गूगल एप स्टोर पर ऐसे बहुत सारे एप आपको मिल जाएंगे जो आडियो और वीडियो के जरिये योग सीखने में मदद कर सकते हैं ये सारे एप बिल्कुल फ्री में उपलब्ध हैं।

हर रोज 30 मिनट का योग आपको तरोताजा रखेगा और आपको बीमारियों से  दूर रखेगा।फिर भी अगर आपके पास समय नहीं है तो 15 से 20 मिनट भी आप योग कर सकते है लेकिन नियमित रूप से। ऐसा नही होना चाहिए कि चार दिन तो बडे शौक से योग किया फिर पाँच दिन कुछ भी नही। थोडा ही कीजिए लेकिन नियमित रूप से।

ज्यादातर लोग बहाने बनाते हैं कि हमें समय नही मिल पाता ,हम जानते हैं कि आजकल जीवन बहुत फास्ट हो गया है किसी के पास शारीरिक व्यायाम के लिए समय नहीं है लेकिन मैं समझता हूँ कि अपने शरीर के लिए 20 मिनट का समय निकालना बहुत मुश्किल भी नही है । हर काम की तरह आपको योग को भी अपने मुख्य कामों की लिस्ट में रखना चाहिए।
अगर आपका शरीर स्वस्थ है तो दिन भर आप खुश रहेंगे और काम में या पढाई में मन भी लगेगा।


योग के लिए उपयुक्त स्थान:

योग अभ्यास के लिए किसी उपयुक्त स्थान का होना बहुत ही जरूरी है क्योंकि आप हर जगह योग नही कर सकते । योग करते समय मन का एकाग्र होना आवश्यक है और किसी ऐसी जगह जहाँ पर शोरगुल हो रहा हो वहाँ आप ध्यान नहीं लगा सकते।

इसलिए योग करने के लिए आपको ऐसी जगह को चुनना चाहिए जहाँ कम शोरगुल या शान्त वातावरण हो इसके लिए आप अपना खुद का कमरा इस्तेमाल कर सकते है या बाहर कहीं जहाँ स्वच्छ हवा आती हो वहाँ कोई चटाई डालकर योग कर सकते हैं


योग करते समय आपको अपने कपडे का भी ध्यान रखना है ।योग करते समय कसे हुए नहीं पहनना चाहिए क्योंकि कसे हुए कपडों में आपकी मांसपेशियाँ उस तरह काम नहीं कर पाएंगी जैसा आप चहते हैं।

योग में श्वाँस और ध्यान का महत्व:

योग प्रक्रिया में साँसों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान

 है बिना साँसों को बांधे या बिना साँसों को नियमित किए योग की प्रक्रिया पूरी ही नही हो सकती। लेकिन ध्यान रहे श्वाँस हमेशा नाक से ही लेना है मुँह से नही।योग के दौरान मुँह से श्वास लेना नुकसानदायक हो सकता है।योग करते समय आपको अपने मन को शान्त और एक जगह केन्द्रित करना है ऐसा न हो कि आप योग अभ्यास करने बैठे हों और आपका ध्यान चाय या भोजन पे हो ।योग करते समय मन में किसी भी तरह की बाहरी बात़े नहीं आनी चाहिए फिर भी अगर आपका मन कुछ न कुछ सोचता रहता है तो इसका मतलब है कि आपका अभी आपने मन पर नियंत्रण नहीं है और इसके लिए आपको और भी ज्यादा अभ्यास करने की आवश्यकता है।

योग करने के लिए उम्र बाधक नही है ।योग किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं लेकिन बच्चों और बुजुर्गों को किसी न किसी की देखरेख में योग का अभ्यास करना चाहिए।

क्योंकि

एक दार्शनिक ने कहा भी है " स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है।"

इसलिए योग अपनाएं
बीमारियों को दूर भाएं
तन और मन स्वस्थ बनाएं।

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