परीक्षा की तैयारी

जनवरी आते ही स्कूलों कालेजों में होने वाली परीक्षाओं की समय सारणियाँ जारी होने लगती हैं।परीक्षा का नाम सुनते ही हर छात्र की बेचैनी बढ जाती है चाहे वह कालेज का कमजोर छात्र हो या पढने में ठीक ठाक छात्र। सबको चिन्ता सताने लगती है कि पता नहीं यह परीक्षा कैसी जाएगी ,अच्छे नम्बर आ  पाएंगे कि नहीं और जिन्होंने साल भर पढाई के नाम सिर्फ मटरगस्ती की है वो तो कुछ ज्यादा ही परेशान रहते है कि इस बार पास कैसे हुआ जाए। छात्रों में इस तरह की बेचैनी होना भी लाजमी है क्योंकि इस एक परीक्षा पर ही उनके साल भर की पढाई में मेहनत को आँका जाना है तथा आगे के कालेज में दाखिले के लिए भी इसी परीक्षा का प्रदर्शन देखा जाना है। साथ ही साथ बच्चों को अपने माता पिता की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होता है। यही सब बातें बच्चों को और परेशान और बेचैन करती हैं।ये वह समय होता है जब बच्चों को अपने परिवार और माता पिता के सपोर्ट और मार्गदर्शन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
आइए हम आपको बताते हैं कि एक छात्र को परीक्षा के समय में किस तरह से तैयारी करनी है और इस तैयारी में एक माता पिता को किस तरह से अपने बच्चों का मार्गदर्शन करना है।
परीक्षा की तैयारी:
1} सबसे पहले तो हर छात्र को अपने मन से यह बात निकाल देनी चाहिए कि परीक्षा बहुत कठिन है या इसे पास कर पाना आसान नही है इससे आपको अपने अन्दर एक तरह की आन्तरिक शक्ति का एहसास होगा जो आपके मन में बैठे डर को समाप्त कर देगी।
2} इसके बाद अपना हर रोज पढने का समय निश्चित कर लें।आप चाहें तो एक समय सारणी या टाइम टेबल बना लें और उसी हिसाब से अपनी पढाई शुरू कर दें।ध्यान रहे कि टाइम टेबल भी इस तरह बनाना है कि कठिन विषयों को आप सुबह के समय पढ सकें क्योंकि सुबह के समय आपका दिमाग ज्यादा फ्रेश रहता है और पढी हुई चीजें जल्दी याद होती ह़ै और अच्छी तरह से समझ में आती हैं।
3}फिर भी अगर कोई ऐसा टापिक है जो बार बार पढने के बावजूद भी आप भूल जा रहें है या आपसे गलत हो रहा है तो रात में सोने से पहले उसी टापिक को पढ के सोएं और सुबह 4 या 5 बजे जब भी आप उठें एक बार फिर पढें और पढने के बाद एक बार कापी पर लिखिए फिर देखिए वह टापिक आप नहीं भूलेंगे।
4} मोटी मोटी किताबों को लेकर बैठने से अच्छा है कि आप कालेज में अपने द्वारा बनाए गये नोट्स से परीक्षा की तैयारी करे क्योंकि एक तो आपने इसे खुद लिखा है और दूसरी चीज यह है कि नोट्स में एक निश्चत और महत्वपूर्ण कन्टेन्ट ही लिखा होने से आपका समय भी बचेगा।
5}चूंकि परीक्षा नजदीक आने पर समय कम होता है इसलिए नयी चीजें पढने या सीखने की जगह सिर्फ वही पढें और दोहराएं जो आप पढ चुके हैं और अगर आप का पिछला पढा हुआ सब कुछ ठीक से तैयार हो तभी नये टापिक को शूरू करें।
6}कठिन विषयों जैसे गणित, फिजिक्स और केमिस्ट्री के सूत्रों को एक जगह  इकठ्ठा करके लिख लें ताकि जब आपके पास बहुत कम समय हो तो आप हर सूत्र का एक बार आसानी से रिवीजन  कर सकें।
7} हर वो चीज जो आप पढते हैं उसे लिखना भी चाहिए क्योंकि जब आप कोई पढी हूई चीज लिखते हैं तो वह आपके दिमाग में अच्छी तरह से बैठ जाती है और साथ साथ लिखने से आपका लिखने का अभ्यास भी हो जाता है जो परीक्षा में तेज लिखने के लिए मददगार साबित होगा।
8} पढाई करने के साथ ही साथ आप बाजार में मिलने वाले अनसाल्व्ड पेपर की बुक से प्रत्येक पिछले साल पूछे गये सवालों या प्रश्नों को भी हल करने की कोशिश करें इससे पता चलेगा कि आपकी परीक्षा की तैयारी ठीक ढंग से चल रही है कि नही।
9}अगर आप अकेले पढ के ऊब रहे हों तो अपने दोस्तों को बुला कर आपस में एक दूसरे से प्रश्नों को पूछें और उसका जवाब भी देने की कोशिश करें इससे आपकी थकान भी मिटेगी और साथ ही साथ पढाई भी नहीं रुकेगी।
10} परीक्षा के समय में एक बहुत ही जरूरी बात यह है कि आपको कम से कम 6 घण्टे की नींद जरूर पूरी करनी है क्योंकि अगर आपकी नींद पूरी नहीं होगी तो परीक्षा हाल में व्यर्थ का सिरदर्द और तनाव महसूस होगा और आप परीक्षा ठीक से नही दे पायेंगे।
11} अक्सर देखा जाता है कि कुछ बच्चे रात के समय में लेटकर पढते हैं जो कि बिल्कुल गलत तरीका है क्योंकि जो बच्चे लेट कर पढते हैं वे आधे घण्टे से ज्यादा नही पढ सकते और वे सो जाएंगे।
12} आपने देखा होगा कि परीक्षा शुरु होने से एक मिनट पहले तक बच्चे किताब लेकर पढते रहते हैं जबकि ऐसा नही करना चाहिए क्योंकि इससे सिर्फ कन्फ्यूजन पैदा होता है।परीक्षा से एक घण्टे पहले ही सब किताबें रख देनी चाहिए और इस एक घण्टे में अपने आपको रिलैक्स होने का पूरा मौका दे और अपने आप को शान्त और स्थिर रखने का प्रयास करें।जब आप शान्त और स्थिर होकर परीक्षा देंगे तो बेहतर तरीके से आन्सर लिख पाएंगे।
13} परीक्षा हाल में प्रश्न पत्र मिलने के बाद सबसे पहले उसे ध्यान से एक बार पढ लीजिए।फिर सबसे पहले उस प्रश्न का उत्तर लिखें जो आपको अच्छी तरह से आ रहा हो और सबसे कठिन और कन्फ्यूजन वाला प्रश्न सबसे अन्त में, क्योंकि अगर आप पहले कठिन वाला प्रश्न हल करने लगेंगे तो उसमें ज्यादा समय लगेगा और हो सकता है अन्त में समय कम बचने पर सरल वाला प्रश्न छूट जाए जो कि आपको अच्छी तरह आता है।
14}सिर्फ सही और सटीक उत्तर लिखनें का प्रयास करें अगर आपको प्रश्न का उत्तर कम आता हो तो वही लिखें जो आपको आ रहा है व्यर्थ की कहानी लिखकर उत्तर जाँचने वाले को बहकाने का प्रयास न करें।
15} पूरा उत्तर एक साथ लिखने के स्थान पर हेडिंग डालकर लिखें ताकि उत्तर की सुन्दरता थोडी सी बढ जाए और जो महत्वपूर्ण वाक्य हो उसे अंडरलाइन जरूर करें क्योंकि इससे कापी चेक करने वाले का ध्यान तुरन्त उस महत्वपूर्ण वाक्य पर जाएगा।
16}  सारे प्रश्न हल करने के बाद कम से कम एक बार सारे प्रश्नों को चेक करना चाहिए ताकि अगर छूट रहा हो या कुछ कमी रह गई हो तो उसे तुरन्त सुधार लिया जाए।
माता-पिता की जिम्मेदारी:
सच पूछिए तो परीक्षा तो सिर्फ बच्चे की होती है लेकिन साथ ही साथ परीक्षा के समय में माँ बाप की भी अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी बढ जाती है ।इस समय हर माता पिता की जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों का सही मार्गदर्शन करे और इसके लिए निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक है-
1} सबसे पहले माँ बाप का यह काम है कि वे अपने बच्चों पे अच्छे नम्बर लाने का किसी भी तरह से दबाव न बनाएं क्योंकि कोई भी प्रेशर बच्चों की पढाई पर बिपरीत असर ही डालेगा।
2} अपने बच्चों की पडोस के किसी बच्चे से तुलना न करे और कभी भी ये बात न कहें कि फला बच्चा पढने में बहुत अच्छा है तुम क्यों नही हो? याद रखिए हर बच्चे की योग्यता और क्षमता अलग अलग होती है।
3}घर में किसी तरह का झगडा, टेंशन ,क्लेष न होने पाये और अगर हो भी जाता है तो बच्चों को इन सबकी भनक तक न लगने दें और उन्हें ऐसा माहौल दें कि वे सिर्फ अपनी परीक्षा की तैयारी पर ही ध्यान दें।
4}परीक्षा की तैयारी के साथ साथ बच्चों का मनोरंजन भी आवश्यक है इसके लिए अगर वो टी.वी. देखना चाहे तो जरूर देखने दें लेकिन सिर्फ निश्चित समय लगभग एक घण्टे के लिए।
5}कभी कभी बच्चे परीक्षा की टेंशन खुद ले लेते हैं और इस टेंशन में न तो वो ठीक से खाते पीते हैं न ही सोते है ऐसे मे माँ बाप की जिम्मेदारी है कि बच्चों के खाने पीने के साथ यह भी ध्यान दें कि वह पूरी नींद ले रहा है कि नही।
परीक्षा के समय में भी खेलना जरूरी है:
कुछ माता पिता ऐसे भी होते है जो अगर सुन लें कि बच्चे की परीक्षा की डेट आ गई है तो बस बच्चों का खेलना बन्द करा देते हैं और चाहते है कि उनका बच्चा सिर्फ और सिर्फ पढाई करे जो कि बिल्कुल भी गलत है।
याद रखिए कि शारीरिक कामों के साथ मानसिक कामों में भी थकावट होती है और बच्चों की मानसिक थकावट दूर करने का सिर्फ एक ही तरीका है वह है उनका मनोरंजन या खेल। इसलिए हर दिन कम से कम एक घण्टा बच्चों को खेलने की छूट जरूर देनी चाहिए इससे वे तरो ताजा महसूस करेंगे और जो कुछ भी पढेंगे उसे अच्छी तरह से समझेंगे।

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